मधेश में बाढपीडिताें को राहत वितरण के प्रति सरकार और केन्द्रीय पार्टियाँ तथा सीडीओ कार्यालय गम्भीर नहीं : बाढपीडित स्थानीयवासी

१५ अगस्त

त्रिभुवन सिंह राैतहट

सरकार के राहत कार्य की सुस्त गति से मधेश की पीडित जनता की स्थिति बदहाल होती जा रही है । ग्रामीण क्षेत्र में भुखमरी की अवस्था आ गई है । स्थानीयवासियों का आक्रोश स्थानीय निकाय पर बढ रहा है । उनका कहना है कि मधेश में काम करने वाली ज्यादातर एनजीओ एमाले पार्टी से आबद्ध हैं पर आफत की इस घडी में उनका साथ हमें नहीं मिल रहा है । । मधेश बाढ के प्रकोप से जूझ रहा है । पर सरकार की राहत शैली संतोषजनक नजर नहीं आ रही है । मरने वालों की संख्या ९० से ज्यादा हो चुकी है और कितने ही लापता हैं । घर है नहीं, पर खाने और पीने की सामग्री तथा दवा भी सरकार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं करवा पा रही है । कई जगहों पर स्थानीय वासियों का मानना है कि स्थानीय निकाय और सीडीओ कार्यालय इस मामले को गम्भीरता से नहीं ले रही है । जो संस्था या निकाय काम करना चाह रही है उसे भी रोका जा रहा है क्योंकि स्थानीय सम्बन्धित निकाय इस मामले में साथ नहीं दे रही है । इस पर गृहमंत्रालय द्वारा एकल द्वार पद्धति के नियम ने संघ संस्थाओं को असमंजस की स्थिति में ला दिया है । मधेश के कई स्थानीय संस्था सहायता करना चाह रही है क्योंकि वो समस्याग्रस्त क्षेत्र से आबद्ध हैं पर गृहमंत्रालय द्वारा जारी नियम ने उनके हाथ को रोक दिया है और लोगों में आक्रोश और असंतोष बढता जा रहा है । पीडितों का कहना है कि यह समय ऐसा है जब तत्काल राहत की आवश्यकता है, अगर यह स्थानीय संघ संस्थाओं को उनके स्तर पर नहीं करने दिया गया तो केन्द्र से राहत पहुँचते पहुँचते काफी देर हो जाएगी ।

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