मधेश में २६५ और पहाड़/हिमाल में ४७९ स्थानीय निकाय, मधेशियों को कितना मिलेगा ?

 श्याम सुन्दर मंडल, ४९% पहाड़ी जनता के लिए ७७% जन प्रतिनिधी छनौट होने की व्यवस्था

kamal_thapa

श्याम सुन्दर मंडल, ३०फागुण, सप्तरी |  नेपाली साम्राज्य के विवादित संविधान को कार्यान्वयन करने हेतु ७४४ नगर एवं गाँव-पालिका बनाया गया है | जिसमें ६,६८३ वार्ड रहने की व्यवस्था की गई है | उसमें कुल ३६,६५४ जनप्रतिनिधियों की छनौट होगी | नई व्यवस्था अनुसार ४ महानगर में प्रमुख-उपप्रमुख ८, १३ उपमहानगर में प्रमुख-उपप्रमुख २६, २४६ नगर में प्रमुख-उपप्रमुख ४९२ रहने की व्यवस्था है |

४८१ गाउँपालिका में प्रमुख-उपप्रमुख ९६२ रहेगी और ६,६८३ वार्ड में वडा अध्यक्ष ६,६८३ एवं हर वार्ड में ४ सदस्य के दर से कुल २६,७३२ (हर वार्ड में १ महिला और अल्पसंख्यक, दलित में से १) जन प्रतिनिधी रहेगी | गाउँसभा में अल्पसंख्यक, दलित में से २ सदस्य के दर से ९६२ तथा महानगर, उपमहानगर और नगर सभा में ३ सदस्य के दरसे कुल ७८९ जन प्रतिनिधियाँ रहेगी |

सामान्य विश्लेषण : मधेशियों को कितना मिलेगा ? कुल प्रतिनिधी = ३६,६५४ (१००%) अब,

१. मधेश में कुल स्थानीय निकाय की संख्या – २४०+२५= २६५,

२. मधेश में जम्मा प्रतिनिधी = १३,०५६

३. मधेश में नेपालियों की संख्या = ३५%

४. मधेशियों को मिलेगा (१००-३५=६५%) अर्थात,

५. स्थानीय निकायों में मधेशियों की प्रतिनिधित्व (०.६५×१३,०५६)= ८,४८० प्रतिशत में केवल २३.१%, वह भी अलग अलग प्रदेश में | बजेट लूटने की व्यवस्था है यह | अगर केन्द्रिय सरकार हर स्थानीय निकाय को १ अरब अनुदान देने की निर्णय करेगी तो पहाड़ी/नेपाली लोगों के लि ५७२ अरब बजेट जाएगी और मधेशियों के लिए केवल १७२ अरब आएगी | हर सुविधा में यह विभेद संरचनागत एवं संस्थागत ढंगसे ही कायम रहेगी | मनोगत, नियति, और व्यवहारिक विभेद तो आज भी जारी है और मधेश नेपाली उपनिवेश में रहने तक जारी रहेगी |

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