मधेश मैं अाैर हिन्दी : अछुतम कुमार अनन्त

२१ अगस्त

अछुतम कुमार अनन्त

मुझे हिंदी न किसी ने पढ़ना सिखाया और नही किसी ने लिखना । फिर भी मैं हिंदी पढ लेता हूँ,समझ लेता हूँ और थोड़ा बहुत लिख भी लेता हूँ ।  मैंने नेपाली स्कूल और कॉलेज में पढ़ा और लिखा । पर मुझे आज भी नेपाली शुद्ध से न लिखना आता है और नही बोलना इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं नेपाली नहीं हूँ मैं भी नेपाल का हूँ अाैर मुझे यहाँ की हर भाषा से प्यार है ।  इसीलिए मैं चाहता हूं कि हिंदी को नेपाल के संबिधान में उचित स्थान मिले । और जो संपर्क हिंदी भाषा की वजह से चल रहा है वह युहीं चलता रहे

 

आज नेपाल में हिंदी भाषा को लेकर बहुत बड़ी बहस चल रही है । खास कर मधेश के संबंध में । क्योंकि मैं भी मधेश से ही हुँ, तो मैंने सोचा क्यों न मैं इस पर कुछ लिखूं । मेरा घर धनुषा जिला में है । जहाँ १०० प्रतिशत लोग मैथिली या फिर कहे ठेठी मैथिली बोलते है । वर्तमान नेपाल के संबिधान में मैथिली को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है । जो कि एक मैथिली भाषी होने के नाते मुझे बहुत ही गर्व महसूस हो रहा है । तब भी मैं चाहता हूं कि हिंदी भाषा को भी नेपाल के संबिधान में उचित स्थान मिले । अब प्रश्न आता है कि नेपाल में हिंदी मातृभाषी तो बस ०.२९% है यह सरकारी अाँकडा है जबकि सत्य तथ्य कुछ अाैर ही है। तो इसे क्यों नेपाल के संबिधान में उचित स्थान मिले ?

मधेश के संदर्भ में हिंदी एक ऐसी भाषा है जो मधेशी के लोगों को उत्तर,पूर्व,पश्चिम और दक्षिण के लोगों से जोड़ता है । हिंदी बस मधेश से मधेश को ही नही जोड़ता । हिंदी मधेश से पहाड़ को और मधेश से भारत को भी जोड़ता है । मधेश में मैथिली,भोजपुरी,अवधि,बज्जिका,थारू आदि भाषा बोली जाती है । और हिंदी इन समस्त भाषियों को एक आपस मे जोड़ता है । मधेश में नेपाली वही लोग समझते है जो पढेलिखे हो या फिर पहाड़ में कुछ समय बिताए हो । जब हिंदी का सवाल आता है तो मधेश के पढेलिखे हो या अनपढ सबलोग समझते है । मधेश में शिक्षित लोग भी नेपाली नही लिख सकते । मेरे घर मे मेरी माता जी हिंदी बहुत अच्छी तरह से समझती हैं पर नेपाली नही  अाैर मुझे लगता है कि उस दाैर के सभी लाेगाें के साथ यह बात है ।

मैं अपना उदाहरण देना चाहूंगा । मैं जब काम के सिलसिले में मलेशिया आया । तब मेरी मुलाकात मेरे सुपरवाइजर से हुई । जो नेपाली मूल के थे । जिसकी मातृभाषा नेपाली थी । सुपरवाइजर ने मुझे बुलाया और बोला कि, “भाई तुम्हारा नाम क्या है ?” मुझे यह अपेक्षा नही था कि वाे मुझे नेपाली भाषा छोड़ हिंदी में मेरा नाम पूछेगा । बाद में धीरे धीरे मधेश के विभिन्न जिलों के साथी सब आये । जैसे बारा, महोत्तरी,मोरंग,सुनसरी,पर्सा, सर्लाही,कैलाली,सिरहा आदि आदि । जो लोग मैथिली बोलते थे उनसे मेरी बातचीत मैथिली भाषा में ही होती थी । परंतु कुछ साथी मैथिली नही बोल पाते थे । तो वह लोग मुझ से नेपाली में नही हिंदी में बात करते थे । इस से बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि हिंदी मधेश से मधेश को जोड़ने में ही नही  बल्कि मधेश से पहाड़ को भी जोड़ता है । 

मुझे हिंदी न किसी ने पढ़ना सिखाया और नही किसी ने लिखना । फिर भी मैं हिंदी पढ लेता हूँ,समझ लेता हूँ और थोड़ा बहुत लिख भी लेता हूँ ।  मैंने नेपाली स्कूल और कॉलेज में पढ़ा और लिखा । पर मुझे आज भी नेपाली शुद्ध से न लिखना आता है और नही बोलना इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं नेपाली नहीं हूँ मैं भी नेपाल का हूँ अाैर मुझे यहाँ की हर भाषा से प्यार है ।  इसीलिए मैं चाहता हूं कि हिंदी को नेपाल के संबिधान में उचित स्थान मिले । और जो संपर्क हिंदी भाषा की वजह से चल रहा है वह युहीं चलता रहे ।

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