मधेश विरोधी पार्टियां राष्ट्रघात व राष्ट्र विरोधी प्रचार कर रही है : केशव झा

(केशव झा राष्ट्रीय मधेश समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैंं)
केशव झा (राष्ट्रीय मधेश समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव), काठमांडू, 25 दिसिम्बर |
अगहन १४ गते संविधान संशोधन विधेयक संसद सचिवालय में पंजीकृत हुआ है । इस विधेयक को लेकर अभी मधेश विरोधी पार्टियां प्रतिरोध में उतरी हुई हैं । विशेषकर एमाले इस विधेयक के प्रतिरोध में है । वैसे नेपाल में एकल जातीय नश्ल के लोग हैं । वे हमेशा यही चाहते हैं कि देश में एकात्मक शासन कायम रहे और संघीय व्यवस्था भी न हो । इसलिए विभिन्न षड़यन्त्र सृजन कर मधेश व मधेशियों के हित विपरीत प्रतिरोध में उतरे हुए हैं । और राष्ट्र घात व राष्ट्र विरोधी प्रचार कर रहे हैं । इसी प्रकार वे पड़ोसी को भी आक्षेप लगाते हैं । उन्हें समझना चाहिए कि जब वे सत्ता में थे, तो पड़ोसी को खुश करने के लिए चूं तक भी नहीं बोलते थे । सत्ता से बाहर आते ही उसे आक्षेप लगाते हैं । यही इस देश का दुर्भाग्य है ।
इसी प्रकार पंजीकृत विधेयक को लेकर हम भी विरोध में हैं, लेकिन हमारा विरोध परिमार्जन को लेकर है । खासकर सीमांकन, भाषा, नागरिकता की प्राप्ति और राष्ट्रीय सभा में प्रतिनिधित्व जैसे सवालों पर हमारी असहमति है । जैसे, संघीय सीमांकन भूगोल के आधार पर मात्र न होकर जातीय और भाषिक रुप में होना चाहिए । प्रदेशों की संख्या १० होनी चाहिए । उनमें से मधेश में २ प्रदेश होना चाहिए । इसी प्रकार संघीय सीमांकन आयोग की रिपोर्ट में झापा, मोरंग, सुनसरी, कैलाली अ‍ैर कंचनपुर के सीमांकन के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं है । इसलिए इसमें भी परिमार्जन होना चाहिए ।
संघीय व्यवस्था में भाषिक नीति स्पष्ट होनी चाहिए । क्योंकि भाषा ही पहचान बनाती है । अतः देश की सभी मातृभाषाएं सरकारी कामकाज की भाषा होनी चाहिए । और कामकाज की भाषा बनाने का अधिकार भाषा आयोग को ही होना चाहिए जिससे हम आगे बढ़ सकते हैं । जबकि विद्यमान संशोधन विधेयक में इस बात का उल्लेख नहीं है ।
नगरिकता की प्राप्ति की प्रक्रिया में भी परिमार्जन हेतु हमने कहा है कि विदेशी महिला नेपाली पुरुष से शादी करने के बाद उन्हें ‘वैवाहिक वंशीकृत’ की नागरिकता प्रमाण–पत्र मिले । और नागरिकता प्राप्त करने का अधिकार भी संघीय कानून के तहत न होकर प्रचलित कानून के तहत होना चाहिए, जिससे वे किसी भी पदाधिकार से वंचित न हों । इसी प्रकार राष्ट्रीय सभा के चयन प्रक्रिया में भी परिमार्जन की आवश्यकता है । खासकर प्रदेशों में प्रतिनिधित्व और मताधिकार के सवालों पर ।
कानून निर्माता कहते हैं कि संविधान की संरचना संघीय है । लेकिन हमारी मान्यता है कि इसकी प्रक्रिया एकात्मक है । इसलिए इसमें भी परिमार्जन करने हेतु जोरदार रुप से हमने अपनी अड़ान रखे हैं ।
दूसरा मसला है संशोधन विधेयक पारित होने का । अभी एमाले के अतिरिक्त भी दो तिहाई बहुमत होने की संभावना है । इसके लिए कांग्रेस और माओवादी प्रयत्नशील हैं । बहुमत होगा और सम्भवतः संविधान पारित भी होगा ।
जहां तक सवाल है चुनाव का । अभी की स्थिति में चुनाव होने का कोई संभावना नहीं  है । वैसे सैद्धान्तिक रुप से इस प्रक्रिया में भी हमारी असहमति है । हमारी मान्यता है कि स्थानीय चुनाव प्रदेश सभा की मातहती में हो, वह भी संविधान संशोधन के बाद हो । इसलिए चुनाव सम्बन्धित प्रस्ताव भी संशोधन होना चाहिए । समग्रतः कहा जा सकता है कि संविधान को सर्वस्वीकृत बनाने के लिए संविधान संशोधन होना अति आवश्यक है । और समय की मांग भी है ।
(केशव झा राष्ट्रीय मधेश समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैंं)

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