मधेसीयों के साथ दुसरें दर्जे के नागरिक जैसा व्यवहार क्यों ? रोशन झा

रोशन झा २७, जनवरी २०१७ राजबिराज, सप्तरी । अंग्रेज चले गए लेकिन जिल्लत भरी जिन्दगी जीने के लिए छोड गए । सन् 1816 में और 1860 में जब ब्रिटिस सरकार द्वारा मधेस की भूमि नेपाल सरकार को दिया गया तो उस संधि में यह भी उल्लेख किया गया था कि नेपाल के शासक ईस प्रान्त की जनता के साथ किसी प्रकार की ज्यादती नही करेगी । मधेस की धरती पर नेपाली शासन संचालन के वक्त से ही शासक द्वारा मधेसीयों की भाषा, पहिचान और राष्ट्रियता मिटाने का प्रयास किया गया ।
बिगत दो-सय वर्षों से मधेसी जनता नेपाली शासन सत्ता में जीते आए है और खुद को नेपाली बनाने का प्रयास भी किया, परन्तु नेपाली राज्य और नेपाल के नागरिक द्वारा हमेसा ही मधेसीयों के साथ सौतेला व्यवहार किया गया और मधेसीयों को दुसरें दर्जे की नागरिक की तरहा सम्झा गया ।
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जब कोई भारतिय नागरिकता धारी प्रशान्त तामाड़ जो की नेपाली मूल का है वह ईन्डियन आईडल मे भाग लेता है तो उसे जिताने के लिए नेपाली जनता चन्दा संक्लन करके उन्हे जितने के लिए भोट करता है और उनकी जीत का जस्न नेपाल मे मनाया जाता है । ईतिहास गवाह है नेपाल में जितने भी राजनैतिक परिवर्तन हुआ है उसमे मधेसीयों ने उल्लेखनीय सहभागिता जनाते हुए बराबर का योगदान दिया, किन्तु उन्हे अधिकार के नामपर कुछ नही मिला । जब कोई मधेसी हक अधिकार के लिए आन्दोलन करता है उनपर राज्य द्वारा चरम दमन का प्रकाष्ठा पार करके पुलिस द्वारा गोलीयों से भूँज दिया जाता है । तब जाकर नेपाली राजनैतिक नेता उन्हे गाछ में फलनेवाले ‘आम’ का दर्जा देते है, तो वही नेपाली जनता द्वारा उस दमन का बिरोध करने के वजाय मधेसीयों को “धोती, मर्सिया,भेले, काले, विहारी, यूपीका और ईन्डियन कहकर तिरस्कृत और अपमानित किया जाता है । नेपाली राज्य के उपेक्षा के कारण आज मधेस अपना अस्तित्व खोज रहा है ।
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2 Comments on "मधेसीयों के साथ दुसरें दर्जे के नागरिक जैसा व्यवहार क्यों ? रोशन झा"

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Roshan kumar jha
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नेपालको विखण्डन करने के लिए हिमालिनी ने कसम खा रखा है क्या ?

Nabaraj mishra
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आपकी नजरिया हि गलत है..!सम्बिधान मे कहाँ लिखाहै मधेसी दुसरी दर्जाका नागरिक है ..? मधेसी आयोग बनायाहुवा है …, कुछ अध्ययन किए है कि नहि ..?क्या मधेस के भोटो के लिय प्रचारकी जरिय बनरहेहै ..!सम्बेधन सिल हुईए.!एक बात जरुर है कि .. जिस जगह पर जौन जातीका बहुमत है वहाँपर उनजातिका दबदबा कायम है .मधेस मे हि लिजिय यादब कास्ट जहापर ज्यादा रहेताहै वहाँ पर उनलोगोका दबदबा होता है .. जहाँ पर पचकुनियका बहुमत होताहै वहाँ पर उनही लोगोका दबदबा होता है… ए रोग जहाँ परभी है ! इसको चेतनाकी माध्यमसे निर्मुल किया जाताहै.! और सवाल है गङ्गा नदि तक… Read more »
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