मधेसी दालों से हमे कोई वैर विरोध और टकराहट नही : परमेश्वर कापडी

मधेस आन्दोलन ३ के पूर्वार्ध में काठमाण्डू आकर मिथिला राज्य संघर्ष समिति ने जनकपुर बम काण्ड के शहीद को श्रद्धाञ्जली अर्पण हेतु सभा का आयोजन कर अन्र्तक्रिया भी किया है । क्या ये सीर्फ श्रद्धाञ्जली सभा का आयोजन था या संघर्ष का नया दिशा, ईसी सन्दर्भ में समिति के संयोजक परमेश्वर कापडी से हिमालिनी के लिए विजेता चौधरी से हुई विशेष बातचित का अंश प्रस्तुत है–

parmeshwor-kapad
  बम काण्ड के चार वर्ष बाद मिथिला राज्य संघर्ष समिति अचानक से जुर्मुराने का क्या कारण हैं ? कहिं ये जारी मधेस आन्दोलन से घबराया हुवा तो नही है ?
 आपका ये प्रश्न आरोप जैसा है, २ नं. प्रदेश में मिथिला प्रदेश का छाह और भाष दिखाई देता है । ईस का भाषा व स्वरुप मिथिला को प्रतिध्वनीत करता है, ऐसे में इस क्षेत्र को मिथिला प्रदेश न मानने का कोई विकल्प ही नही है । मिथिला राज्य संघर्ष समिति आज नहि जागा है अन्दर ही अन्दर जाग कर अपना कार्य कर रहा है । दुसरी बात मधेस आन्दोलन से हमें कोई सरोकार नहीं, मधेस का भाषा और संस्कृति, कला और संगीत, पौराणीकता क्या है ? जीसके पास कुछ नही वो मिथिला से टक्कर क्या लेगा । मिथिला तो हमारा हैं, इसी लिए डरने की जरुरत हमें नही ।
ड्ड आपने कहा, मधेस आन्दोलन से सरोकार नही पर मधेस आन्दोलन ३ के पूर्वार्ध में इस तरह संघर्ष के लिए उठना, कहीं बहती गंगा में डुबकी लगाने का प्रयत्न तो नहीं ?
 हम लोग अपना आन्दोलन का सर्थकता मान कर बैठे हैं । समझिये हमें मिथिला राज्य मिल गया । क्षेत्र नं. २ का पहिचान है मिथिला, इस का नाम चाहे कुछ रखदें परन्तु इस का वर्चश्व मिथिला मैथिल पना में है । तथाकथित मधेसी आन्दोल बाले थारु, लिम्बुवान और सभि के नाम लेते है पर कभि मिथिला का नाम नही लिया अर्थात हमारे अस्तित्व को स्वीकार नही करेगें । दुसरी बात मधेसी दल बाले मेची महाकाली को मधेस बनावें पर मिथिला में उनका कोई प्रवेश नही ।
ड्ड मिथिला का अपना सभ्यता विद्यमान है फिर मिथिला राज्य रंघर्ष का औचित्य क्या ? क्या मागें है समिति का ?
 क्षेत्र नं. २ मिथिला प्रदेश एव्म राजकाज का भाषा मैथिली हो तथा संवैधानीक सुनिश्चितता के लिये आवाज और दबाब सृजना कर राजनीतिक वृत्त में स्वीकृति के लिये उपस्थापन करने का हमारा ध्यय है और माग भी । राज्य संविधान मे देने मात्र से पूर्णता नही पाता है इसी लिए हम सृजनशील लोग भाषिक, कला, लोकलोकिकता, संचार, आर्थीक विकास लगायत को परिपूर्णता के दृष्टिकोण मे रख कार्यनीति व योजना बना व्यवहारीक एवम् स्थायी रुप से संचालन, रुपान्तरण के पक्ष में आवाज उठाने का धर्म बनता है ।
ड्ड संघर्ष समिति का आगामी कार्यक्रम क्या है ?
 एक ही कार्यक्रम से आबाज और दबाव श्रृजना कर दीया है हम लोगों ने । इसी तरह निरन्तरता चलति रहेगी । हम लोग सीर्फ राजनीतिक माग नही करते उसे चलाने, बनाने व छजाने श्विवास रखते हैं, इसी लिए क्रमगति से प्रप्ति भी निश्चित होगी ।
ड्ड राजनीतिक दालों का सहयोग व समर्थन कितना प्राप्त है ?
 मधेसवादी दल इतर सभी राजनीतिक दल का नैतिक व सकारात्मक समर्थन प्राप्त है । संवैधानीक सुनिश्चितता मिले सरह समझिये ।
ड्ड मैथिल जनता का कितना सद्भाव व सहयोग–समर्थन मिल रहा है ? क्या है जनबल की स्थिती ?
 कुछ गद्दार कुपात्र लोग को छोड सम्पूर्ण मिथिला व मैथिल का समर्थन व सद्भाव हमें प्राप्त है ।
ड्ड सुननेमें आया है जनकपुर रामानन्द चोक पर हुए बम काण्ड के बद संघर्ष समिति के कार्यकतार्, समर्थक डरे हुए हैं, कितनी सत्यता है ईस बात में ?
 व्यक्तिगत रुप से मैं समिति का संयोजक हंसता रहा और बम काण्ड के अपराधी पत्ता लग जेल में सड रहा है । धोख देकर अन्जान मैं प्रहार किया, सीधा सामने नजर मिला के बोलने का हिम्मत नही एसो से हमें डरने की क्या जरुरत ।
ड्ड बम काण्ड का अनुसंधान कहा तक पहुँचा है ?
 बम काण्ड का अनुसंधान दृश्य रुप में प्रहरी छानबिन, अदालती मुददा अनुसार संजय टकला एवम् कम्पनी अर्थात आसेपासे का स्तर तक पहुँचा है । अपराधी जेल में है । लेकीन हम लोगों का स्पष्ट धारणा व मुख्य माग न्यायीक छानविन हों ऐसा है । हमें लगता है न्यायीक खोजपडताल अगर हुवा तब पता चलेगा कि काण्ड में संलग्न लोग खुद बम काण्ड नही किया था करबाया गया था और पृष्ठभूमि मे बडा नेता का हाथ है ।
ड्ड आपका ईशारा किस के तरफ है ?
 मेरा ईशारा ही नही यकीन है की बम काण्ड में मधेसी नेता का हाथ व संलग्नता भी है । इसी लिये हम लोग न्यायीक छानविन का माग कर रहें हैं ।
ड्ड ईस आशंका का वजह कही मधेसी दलों के साथ वैरभाव के कारण तो नही ?
 मधेसी दल को भ्रम है के मिथिला राज्य संघर्ष समिति हमारा शत्रु है और मधेस प्रदेश नही होने देना चाहता लेकीन वास्तविकता यह है की मधेस आन्दोलन का मुददा का सममान असल में मैथिल लोग ही कर रहें हैं । इस का पहचान व आधारतत्व मिथिला मैथिल से बनता है । ये पहचान सर्वमान्य और परिपूर्ण है । जो भी नेता हंै वे प्रथमतः मैथिल हैं, उनका भाषा, कला संस्कृति एव्म जीवनदर्शन मिथिलामय है, लोगों को लगता है के वे वागर हो के मधेसी बना है । उन लोगों से हमे कोइ बैर–विरोध नही हम लोग राजनीतिक माग को लेकर चले हैं जब के वो लोग राजनीति और कुर्सी के खेल को लेकर चले ह,ैं ऐसे में हम में और इन में टकराहट कहीं नहीं है । ये लोग मिथिला मैथिल को लेकर है ना की हम लोग मधेस मधेसी को लेकर ।

Loading...
%d bloggers like this: