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मधेस आन्दोलन की कविता ने आलोचना के बाद पायी प्रशंशा– श्रवण मुकारुङ्ग

विजेता चौधरी, काठमाण्डू, चैत्र २२
चर्चित कवि एवम् प्राज्ञ श्रवण मुकारुङ्ग ने चितवन में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बहुचर्चित कविता अनुहार खोजी रहेछ रामभरोस, वचन करने के बाद बेसुमार प्रशंसा पायी ।
कवि से हुई एक मुलाकात के दौरान उन्हों ने कहा– मधेस आन्दोलन के समय में लिखी गई मेरी इस कविता में मैने मधेस का चित्र प्रस्तुत किया है । जब यह कविता पहली बार बाचन किया था तब बहुत से साहित्यकार, श्रोता एवम् पाठक इस कविता की आलोचना किए थें । पर अभी स्थिती यह है की मैं जहा भी यह कविता वाचक करता हुँ, तो श्रोताआों का प्रशंसा एवम् वाहवाही पाता हुँ । shravan
कवि मुहारुङ्ग अपनी अनुभव सुनाते हुए कहते है– समय के साथ पाठकों व श्रोताओं का दृष्टिकोण परिवर्तन होता हैं । मेरी यह कविता इस बात का प्रमाण है ।
अनुहार खोजी रहेछ रामभरोस कविता कवि के चर्चित काव्य संग्रह बीसेनगर्ची को बयान में संग्रहीत है ।

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