मधेस का भूमि दोहन कर रहा है भूमाफिया

मनोज बनैता सिरहा, १४ अगस्त ।

विगत कुछ वर्षों से मधेश के भूमि में चलरहे सौदेबाजी के कारण जमीन का मूल्य आसमान को छु रहा है । मधेश की आवाम की  अगर बात करें तो ७० फिसदी मधेशी अभी भी गरीबी की रेखा चिन्ह के भीतर है मगर यहाँ का जमीन का रेट दिन दोगुणा और रात चाैगुणा के औसत मे बढ रहा है । मधेश के विभिन्न शहरी ईलाको में गैरमधेशी लोग आकर बसने लगे हैं । ये आन्तरिक बसाई सराई का दौर यूँ ही अगर चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं है जब मधेशी अपनी जमीन में ही विदेशी बन कर  रह जाएगा । इस आन्तरिक बसाइ सराई में जितनी जिम्मेवार सरकार है उतना ही जिम्मेवार है वो शख्श जो चन्द टुकडाें लिए अपनी मातृभूमि का  सौदा कर रहा है । भूमाफिया के कारण मधेश की अवस्था इतनी नाजुक बनती दिख रही है कि मानो मधेश का भूगोल और संस्कृति अब सिर्फ एक ईतिहास के पन्नो मे सिमट के रहनेवाली है । मधेश का एक ऐसा कोई भी शहर और गाँव नहीं है जिन्हे भूमाफिया द्धारा बख्शा गया हो । लाहान सिरहा की अगर बात करे तो यहाँ जो जमीन का रेट ५ साल पहले ५०,००० (पचास हजार) प्रति कठा हुअा करता था वो आज ५०,०००००(पचास लाख) प्रति कठा है । जमीन के इस कृत्रिम म‌ंहगाइ में भूमाफिया सबका साथ दे रही है सरकार और विभिन्न बैंक जो मधेस के इस जरजर अवस्था मे बराबरी का साझेदार है । निजी तथा सरकारी बैको के लिए मानो हर दिन दिवाली है । १० से लेकर २५ प्रतिशत कमीशन के चक्कर मेये बैंक  मधेशी समुदाय का दिवाला निकालने पर तुला हुअा है । अगर कोई आम मधेशी बैंक के ऋण के लिए आवेदन करे तो उन्हें बैंक का चक्कर कटते काटते पैरो मे छाले पड जाते है । बैंक के स्वघोषित ईमान्दार मैनेजर उन्हें कागजी प्रक्रिया के उस दलदल मे फसाते है जहाँ से वो आम मधेशी कभी बाहर नहीं निकल पाता है । लेकिन हम अगर उन भूमाफिया का जो बात करें तो उनके लिए बैंक का ऋण लेना बस चींटी मारने बराबर है । अक्सर उनलोगो को बैंक जाना ही नहीं पडता है । अधिकांश सेटिंग शाम को किसी होटेल मे पेग के घुंट के साथ ही हो जाता है । अगर होटल मिलन के पश्चात वो लोग बैंक चले भी जाते है तो उनकी दामाद से कुछ कम खातिरदारी नही‌ की जाती है । ऋण का समयावधि तो बस पुछिए ही मत वो लोग जब और जिसवक्त चाहे ऋण ले सकते हैं । नापी कार्यालय, नगरपालिका और मालपोत कायार्मलय मे उपभोक्ता सबको जितनी परेशानी झेलनी पडती है उतना ही सहज भूमाफिया सबके लिए है । अगर आम मधेशी को नक्सा लेना हो तो उन्हें कोई नहीं है सहज रुप से देनेबाला मगर माफिया लोग का बात हि कुछ निराला है उनलोगो को नक्सा सम्बन्धी सम्पूर्ण कामकाज कर्मचारी खुब मन लगा के करते है । हाल ही मे लाहान नापी शाखा अधिकृत को जब ढीला सुस्ती का कारण पूछा गया तो उनहोने बडी असानी से कहा कि कर्मचारी की संख्या लाहान में कम है ईसिलिए कार्यलय के काम मे देरी लग रही है । मगर ताज्जुब की बात यह है कि भूमाफिया का काम पलक झपकते ही हो जाता है । भूमाफिया कैंसर की तरह मधेश को बर्बाद करदेगा अगर समय पर उनका ईलाज ना हो तो । वो लोग चाहे मधेशी समाज का हो चाहे कोई और आखिर है तो गद्दार । उनलोगो का ना तो कोई धर्म है ना ही कोइ जात । पत्रकार, नेता, समाजसेवी लगायत विभिन्न पेशा का नकाब लगा बैठे उन नकाबधारी माफिया सबको सामाजिक बहिष्करण करने से ही सही मायनो मे मधेश की आनेवाले पीढियो के लिए सुनहरे भविष्य का उपहार होगा ।

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