मधेस के ठेकेदारो ने ही मधेशियों के वजुद को बेच डाला : डी. के. सिंह,

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डी. के. सिंह, बारा, २५ अप्रैल । इतिहास गवाह है … जिस मधेसी नेता पे हम ने भरोषा किए वह तो छिपकलि के तरह रङ्ग बदलने मे माहिर निकला। अगर पुरानी ईतिहास को टटोला जाए तो मधेसी समुदाय सदियो से नेपाली सम्रराज्य से अवहेलना सहते हुए अपेक्षित है। फिर इधर आकर जन आन्दोलन 2062-63 का इतिहास के पना पल्टने से साफ- साफ दिखाई देता है कि हमारे मधेसी नेताऔ ने अपने सता भता के लालच मे सम्पुर्ण मधेसी समुदाय को नेपाली सासक के हात बेच हि डाला बदले मे उन नेताऔ को कुर्सी , भता, सता, उनके बच्चो को अछे स्कुल- कलेज मे उच्च शिक्षा हासिल करने को मिला लेकिन हमारे मधेसी भाई लोग का बलि दि गई ।उनके बच्चो को बाप का सयाँ छिन गया , घर से बेघर हो गए,खाने को लाले पड गए, उनके माँ-बाप के बिर्ध अवस्था मे सहारे के लाठी टुट गए, उनके पत्नी कि माङ्गे सुनी हो गई यानि के विधवा हो गए। , बहन के भाई छिन गए, भाई के भाई का सहारे छुट गए फिर भि हमारे मधेसी बन्धु आस लगा कर बैठे रहे और इन्तजार पे इन्तजार करते रहे। फिर जन आन्दोलन भाग -2 देखने को मिला और उस मे भि फिर से दुसरी बार मधेसी जनताऔ को बेवकुफ बना कर , इमोसनली ब्लैक मेल किया गया और झुठ असवासन दिया गया कि अब कि बार मधेसी को अधिकार मिल जाएगा ।और ऐक नारा भि लगाया गया अभि नहि तो कभि नही!! ऐ नारा का नाम दिया गया … बेचारे मधेस वासी फिर से उसी झुठी झाँसे के सिकार बन गए। पर हुआ कया फिर से मधेसी भाई पुलिस के गोली का सिकार बन गए।और हम सब चाह के भि कुछ नही कर पाए। इसि तरह से बार बार बन्द हडताल किया गया जिसके बजह से पहाड पे कोइ खास असर तो नहि पडा कयु कि हमारे मधेसी मन्त्री लोग हि उनको डिजल , मट्टीतेल , पेट्रोल और खादय पदार्थ अपने गाडी मे भरकर अपने आका के घर पहुँचाकर मालिक के चाकरी बजाते थे और इनका साथ हमारे कुछ ऐसे युवाऔ बुद्धिजीवी देते थे जैसे लगता था नेताऔ के वदले धरती पर भगवान उतर गए है ।इनकि बातो को कैसे टाला जा सकता था। बदले मे इन मधेसि युवाऔको भि दारु-मास मिलने के साथ कुछ पैसे मिलजाते थे पर ऐलोग भि कया करे ईश पापी पेट को पालने के लिए वैसे कदम उठालिए।इन सारी बातेको बदले मधेस को आर्थिक घाटा ब्योहोर्ना पडा, कितनी गाडिया फुकी गई, बच्चो को पढाइ से दुर रखा गया, किसानो का कर्जा बढता गया और आम्दानी शुन्य हो गई। जितने गाडीवाले थे वो सब के सब बरबाद हो गए।बहोत सारे किसानो के खेत मे पैसो के कारण बाली नहि लगपाई , जमिन बन्जर सा रह गया, जो किसान इतना होने के बावजुद भि बाली लगाए तो जब फसल मे पानी देने के समय आय तो डिजेल के अभाव मे बाली नष्ट हो गया। कितने किसानो को तेल फुकि गई पर उन माफिया मन्त्री के और उनके चमचो का नहि फुका गया।।। मधेसी अगर उस समय धोखे से भि पहाड के साइड जाते थे तो उनको गालि- गलौज से आत्मा जुडा जाता था तो ऐ सारी उपलब्धि हमारे मधेसी नेता ने दिए थे। उस समय जितने भि मधेसी नेता थे सब के सब मधेसी के बेटा बन्ते थे और मधेसके हि मुद्दा उनके लिए अहम था ।आज के समय मे देखा जाए तो वो मधेसी नेता लोग दना दन नेपाली के बेटा बन्ने लगे है । ईसका भि ऐक खास बजह है :- नेपालियो के साथ साथ उनलोगो ने भि मधेस और मधेसियो , सहिदो के नाम पर देस- विदेस से खुब लुटे और अपना घाग भरे , सता भता भि मिली, जिनके पैर मे चपल तक नहि था 062-63 के पहले उनके पास जगह जगह पर आलिसान महले बने है।अब उनलोग को लग चुका है कि मधेस मे अब अपना दाल गलने वाले नहि है कयु कि उनका बिक्लप डा. सि. के . राउत नेतृत्व के स्वतन्त्र मधेस गठबन्धन आ चुका है ।और गठबन्धन ने मधेसी नेताऔ , मधेसी पार्टीयो के बारे मे ,नेपाली साशक बर्ग के बारे मे मधेसी जनतको आँख खोलने पर विबस कर चुका है ।और मधेसी जनता भि चाह रही है कि हम इन नेपालियो के साथ मे कयु मिलकर रहे हमे अलग होना है ।तो वो लोग भि डा. राउत के साथ देने धिरे धिरे आ हि रहे है। जगह जगह तो इन मधेसी नेताऔ के स्टेज शो को छोड कर डा. राउत के सभा के पास आने लगे। तो ऐ सारी बात हमारे मधेसी नेता जी को अनपच होने लगा और फिर से स्वतन्त्र मधेस गठबन्धन के सयौंजक डा. सि. के. राउत को जेल भेजनेका षडयन्त्र मधेसी नेता करने लगे और नेपाली सम्ररज्रय को पकडने और दमन करनेके लिए उकसाने लगे फिर आखिर कार आरेषट करहि लिया गया।उसके वाद जगह जगह मधेसी युवऔ , स्वराजियो द्वारा फ्री डा. सि. के. राउत, नेपाली उपनिवेश के अन्त हो – मधेस देस स्वतन्त्र हो, जनमतसंग्रह का ऐलान हो , हत्या हिन्सा बन्द कर, वाक सवतनत्रता कायम कर, पुलिस दमन बन्द कर, मानवअधिकार के उल्ङघन बन्द कर , जैसे नारे शान्तिपूर्ण रुप से गुजँने लगे लेकिन उसके बादभि नेपाल सरकार के पुलिस निकाय ने दमन किया ।यहाँ तक कि मधेस के जिल्ला मे जगह जगह दमन हुई स्वराजी लगायत मधेसी जनता पर लाठी बरसाई गई, महिलाऔ के उपर भि नेपाली पुलिस ने लाठि मारी , मोरङ्ग से ऐक स्वराजि के आँख फोड दि गई, रुपन्देही मे स्वराजि के कान कि जाली फाड दि गई, भैरहवा मे ऐक स्कुली छात्रा को सर पे मार कर बेहोस कर दि गई, बहोत सारे स्वराजी मित्रको करागार मे रखा गया और वही पर एस. पी. – डि. एस. पि. के रोहवर मे पहाडी रोड छाप लडको से दिनानुदिन पिटाइ गरवाई गई ताकि स्वतन्त्र मधेस गठबन्धन छोड दे अलग देस के माङ न करे पर स्वराजि तो कदम खा कर बैठे है मरना होगा तो मरेङगे पर अजादि लेकर रहेङगे , अजादी से एक इनच भि कम नहि ।नेपाली पुलिस द्वारा मधेसी लोगो के घर मे घुस घुस कर गाली – गलौज बेइज्जती कि गई , ताकी आमसभा मे न जाए यहाँ तक कि जान मारने कि धमकी दि गई, और जगह जगह जान मारने कि साजिस भि रचि गई। इतना सारे बेइजती करवाने मे अहम भुमिका हमारे मधेसी नेता जी लोगोका हात है। इसके वाद अब इन मधेसी नेताऔ ने चुनाव के समय मे आकर नयाँ नाटक मंचन कर रहे है।पार्टी परित्याग , चुनाव बहिस्कार , पार्टी प्रबेश, तो अपने अपने पार्टी के नाम मे से मधेसी शब्द को हटाकार नेपाल, राष्ट्रिय , जैसे शब्दको जोड रहे है अब उतना से भि सन्तुमधेसी शब्द को हटाकार नेपाल, राष्ट्रिय , जैसे शब्दको जोड रहे है अब उतना से भि सन्तुष्टि नहि मिला है तो 5-6 पार्टी मिलकर ऐकिकरण करके नई नाम मे उतर रहे है चिन्ह छाता लेकर।फिर से मधेसी जनता के आँखो मे धुल झोकने का काम हो रहाहै। अब आप हि बताईए जिन मधेसी नेता जि लोग का :- १. मधेसी शब्द से घिर्ना हुआ और वो लोग अपने पार्टी से मधेसी शब्द को निकाल कर फेक दिए। २.जब इतना दिनो से मधेसी के जान के सौदा कर के हमेसा भजाते रहे है। ३.व्यक्ती के स्वभाव नहि बदला , चेहरा नहि बदला और पार्टी के नाम बदल लेने से, मधेसी शब्द हटा देने से मधेस के भलाई तो नहि हो सकते न? ४. निर्वाचन मे नहि जाएङगे बोलते है और अनदर हि अनदर चुनाव के तयारी कर रहे है। ५.कुछ मधेसी पार्टी वाले तो अपने बिधया देबि महारानी के सेवा मे परम भक्त लोग को भि भेज डाले है ताकि महारानि रुष्ट न हो जाए। ६.कुछ लोग तो मधेस मे नारा हि लगा डाले है 1 भोट तो 1 हातीवाले नोट। ७.##लेकिन सबसे खास बात तो एह है कि मधेसी नेता लोगो का डर है कि हमारी पार्टी का मधेस से पता न साफ हो जाए… और ये हकिकत भि है पता साफ होना तो निसचित हो चुका है। और जब से थ्रेस होल्ड के नियम लगा है तो और भि इन मधेसी पार्टी का औकाद धिखाई दे दिया है। तो अब बेचारे करे तो करे कया ?? ८. तो फिर से मधेसि जनता को बेवकुफ बनाने के काम मे लगे है, युवाऔको दलाल बनाने मे तुले है। ###मेरा तो बस इतना हि कहना है कि इनलोगो के बातो मे ना आकर मधेस के हरेक जिल्ला मे खुद से नेतृत्व ले कर स्वतन्त्र मधेस गठबन्धन के पक्ष मे लगे और मधेस देस बन्ना ने मे महत्त्वपूर्ण योगदान देकर मधेस के इतिहास मे अपना नाम दर्ज करवाए… नहि तो इन मधेसी नेताऔ का कया भरोषा ऐ लोग तो आसतिन के साँप से भि बढकर है।ऐ लोग खुद का जमिर बेच चुका है कल के समय मे हम सबको ना बेच दे नेपालीयो से… कयु कि इन मधेसि नेताऔ के घर मे किसि ऐक न एक सदस्य का वैवाहिक सम्बन्ध नेपालियो से है हि तो हम सबको ऐलोग उसि तरह बन्ना चाहते है। अपना पहचान और वजुद मिटाकर एकीकरकण होना कोई माने नही रखता…. ##याद रहे इनलोगो का मुहँतोड जवाब दे और मधेस से पुरणत: बहिष्कार कर मधेस देस बन्ने मे महत्त्वपूर्ण योगदान दे…

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