मधेस को आजाद होने से कोई नही रोक सकता : विशाल जनसभा में सीके राउत का उद्घोष

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रोशन झा माघ ५ लहान | लहान बजार 2073 साल माघ 05 गते स्वतन्त्र मधेस गठबन्धन के संयोजक डाॅ. सि. के. राउत जी के प्रमुख आतिथ्य मे आयोजित सहिद सम्मान कार्यक्रम में सिरहा और सप्तरी से आये विशाल  मधेसी जनसमुदाय की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही । हजारौं-हजार मधेसी मानव मैला सहित शान्तिपूर्ण रैली के साथ डाॅ. राउत सहिद पार्क पहुँचे । सहिदों के सहादत की सम्मान करते हुए उन्होनों सहिदों को माल्यार्पन किया और मधेस की आजादी के नारों के साथ सहिद पार्क में आजादी का झण्डा उतोलन किया । सहिद सम्मान कार्यक्रम पश्चात पशुपति आदर्श उच्च मा. वि. प्राड़गण मे आयोजित जनसम्बोधन कार्यक्रम में पहुँचे डाॅ. सि. के. राउत सहित बृहत मधेसी मानव सागर । उक्त कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि डाॅ. राउत एवं अन्य अतिथि के रुपमे सहिद अनिश अन्सारी जी की माता जी, गठबन्धन के सह-संयोजक कैलास महतो, केन्द्रिय प्रवक्ता अब्दुल खान, केन्द्रिय सहजकर्ता चन्दन सिंह, डाॅ. बिरेन्द्र यादव लगायत उपस्थित सम्पूर्ण जनसमुदाय रहा । डाॅ. सि. के. राउत ने जन सम्बोधन करते हुए कहा कि सहिद रमेश महतो, अनिश अंसारी, बेचन यादब लगायत के सहिदों ने मधेस की मुक्ति के लिए आजादी के लिए सिना तानकर फिरड़गी नेपाली पुलिस का गोली खाकर सहादत दिया था ।
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सहिदों का सपना साकार करने के लिए उन्होनों प्रण लिया कि मधेस की आजादी प्राप्त होने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा । मधेस मे नेपाली आप्रवासन का जिक्र करते हुए उन्होनें कहा कि आज मधेस की 7% भूमी पर नेपालीयों का कब्जा हो गया है, अपनी ही भूमी पे थारु, मुस्लिम, दलित लगायत मधेसीयों को अल्पसंख्यक बनाया जा रहा है । टिकापुर में थारु के साथ हुए अत्याचार, रंगेली मे मधेसीयों को की गई हत्या तथा नवलपुर में मधेसी मोर्चा द्वारा आयोजीत कार्यक्रम से मधेसीवादी दल के नेता को धोती उठाकर टमाटर खेतों मे भागने वाली बात बताते हुए मधेस और मधेसी जनता के हक-अधिकार की आजादी ही एक मात्र विकल्प उन्होने कहा । डाॅ. राउत ने कहा आजादी के बाद मधेस मे सैकडों फैक्ट्रियां खुलेगी 10ओं लाख मधेसीयों को नौकरी मिलेगी रोजगारी के लिए नेपालीयों की गुलामी और विदेश जाने की स्थिति नही आएगी ।
पिछले 25 वर्ष में ही दुनीया में हुए 35 देसों की आजादी की बात बताते हुए उन्होनें कहा कि मधेस की आजादी कोई मुस्किल काम नही केवल दृढ संकल्प लेने की आवश्यक्ता है, कोई माई के लाल मधेस को आजाद होने से नही रोक सकता । तत्पश्चात कैलास महतो जी मन्तव्य देने मञ्च पर आए मन्तव्य के दौरान कैलास जी ने कहा आप को क्या चाहिए संघियता या आजादी ? तो जनमास से एक ही स्वर में आजाद मधेस का नारा जोरदार रुप से गुंजने लगा । 24 अक्टुबर 2014 मधेस फ्याकट की डाटा देते हुए उन्होने कहा कि उस समय जब मधेस के जिल्लों कि सि. डि. यो. , एस. पी. , न्याधिस को नेपाल सरकार ने जब बुलाकर कहा कि ये मधेसी पागल हो गया है एक मधेस प्रदेस कि बात कर रहा है उनका मांग पुरा होना चाहिए कि नही तभी 36 से अधिक सभी कार्यालय प्रमुखों ने कहा नही; जब उसका कारण पुछा गया तो उनसबों ने कहा कि मधेस के सिर्फ 12 जिल्ले से नेपाल सरकार कच 92 से 94 % राजस्व प्राप्त होता है अगर मधेसीयों को प्राण्त मिल गया तो हम लोग भिखमंगे हो जाएंगे । मधेसीयों को धोती, भेले, मर्सिया, बिहारी ईन्डियन कहकर अपमान करके करने वाले नेपालीयों का ईतिहास बताते हुए कहा कि ये वो लोग हैं जो ईरान से भागकर भारत होते हुए हुए नेपाल आए हैं जिनका माँ-बाप का कोई ठिकाना नही है। मधेस कि आजादा का नारा बुलन्द करते हुए उनहोनें नेपाली शासन सत्ता कि गुलामी के खुट्टे कि बन्धन को तोडकर मधेस कि आजादि के लिए प्रतिबद्ध रहने के लिए मधेसी जनता को आवहान किया ।
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