मधेस गुलामी का अाज २०१ वर्ष पूरा : जयकृष्ण गोइत

 मनोज बनैता, सप्तरी, २१ मङ्सिर ।
जनतान्त्रिक तराई मुक्ति मोर्चा [क्रान्तिकारी]के संयोजक जय कृष्ण गोईत ने तराई -मधेस मे रह रहे जनता को आज के दिन काला दिवस के रुप मे मनाने की अपील की है । उनहोने अपने फेसबुक मे यह पोस्ट किया है कि इतिहास साक्षी है कि ०८ दिसम्बर, १८१६ के दिन चीन से भय-आक्रान्त ब्रिटिश इष्ट इण्डिया कम्पनी ने नेपाल को चीन के पक्ष मे जाने के डर से हमारी मातृभूमि ‘तराई’ का मेची नदी से लेकर राप्ती नदी तक तथा वर्तमान नेपाल-भारत सीमा से लेकर उत्तर का भू-भाग स्मरण-पत्र के कुटिल चाल द्वारा नेपाल को दिया गया था । सिर्फ ईतना ही नही तराईवासीयो को नेपाल का गुलाम बनने पर मजबुर कर दिया । स्मरण-पत्र के बूँदा-७ मे ये उल्लेख किया गया कि यदि किसान के अतिरिक्त तराईवासी मे से अगर कोई व्यक्ति सम्पति त्याग कर कम्पनी के क्षेत्र मे रहना चाहे तो वह रह सकता है । ११ दिसम्बर, १८१६ का दिन स्मरण-पत्र के शर्त को नेपाल के राजाद्वारा स्वीकार कर फिर स्वीकृति-पत्र कम्पनी को दिया गया था । इतिहास के घटना क्रम मे उस वक्त उत्तर का शक्तिशाली चीन और विश्व का शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य नेपाल के ही पक्ष मे थे । ईसी तरह ०८ दिसम्बर, १८१६ का दिन ब्रिटिश इष्ट इण्डिया कम्पनी ने तराई और तराई के मूल निवासी को नेपाल का गुलाम बनाया । आज ०८ दिसम्बर, २०१७ मे गुलामी का २०१ [दाे साै एक] वर्ष पुरा होने जा रहा है । जनतान्त्रिक तराई मुक्ति मोर्चा [क्रान्तिकारी] ने ०८ दिसम्बर, २०१७ तदनुसार २२ मंसीर २०७४ को ‘काला दिन’ करार करते हुवे सम्पुर्ण तराईवासीयो को काला दिवस मनाने के लिए अपील करता है ।

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