मनमोहन ने देश को कहा अलविदा

manmohan_singh शवेता दीप्ति , एक नजर मनमोहन पर

काठमाणडू 17-o5-014 । आने वाले के साथ–साथ जाने वाले को भी सलाम करने की परम्परा है । भारत अपने दस साल पुराने प्रधानमंत्री को विदा कर रहा है । आज हर ओर मोदी की चर्चा है जो एक प्रखर व्यक्तित्व के मालिक हैं, वहीं मनमोहन सिंह एक शांत और सहज व्यक्तित्व रखते हैं । किसी भी पूर्वाग्रह से परे अगर मनमोहन जी पर एक सरसरी नजर डाली जाय तो भारत की जनता को उनसे उतनी शिकायत नहीं है, जितनी उनकी खामोशी से रही है ।

यह तो विश्लेषक भी मानते हैं कि भारत के विकास में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है । प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने उनके कार्यकाल में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है । विदेशों में भी इनकी छवि अच्छी है और इनका सम्मान भी है ।

विदा लेते हुए इस प्रधानमंत्री के लिए भारत की जनता में मिली जुली भावनाएँ हैं । उन्हें इनसे प्यार भी है और शिकायत भी है । मनमोहन जी के आर्थिक उदारीकरण की नीतियों के कारण भारत के काफी क्षेत्रों में तरक्की हुई है किन्तु अंत में ये नाकाम हो गए । उधर परमाणु मोर्चे पर आपने भारत को विश्व की अगली पंक्ति में ला खड़ा किया । देखा जाय तो अपने पहले कार्यकाल में आप जिस तरह  उभरे, दूसरे कार्यकाल में वह जगह कायम नहीं रख पाए जिसका खा,मियाजा आज काँग्रेस भुगत रही है । बावजूद इसके विश्लेषक मानते हैं कि पिछले दस साल के दौरान उच्च आर्थिक विकास दर बनाए रखना आपकी बड़ी उपलब्धि है । भारत में इस माहौल के कारण रोजगार और धन का सृजन हुआ । लोगों की आय का स्तर बढ़ा । यहाँ तक कि साल २००७ और २००८ के बीच उभरे वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान भारत की स्थिति अन्य बड़े देशों के मुकाबले बेहतर रही । बहरहाल परिवर्तन सृष्टि का नियम है और यह आवश्यक भी है, नहीं तो खुदा होने का गुमां मानव को हो जाएगा । मनमोहन सिंह एक सौम्य, शांत और सहज प्रधानमंत्री के रूप में हमेशा याद रहेंगे । प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को आए चुनाव नतीजों का स्वागत किया है और भाजपा के नेतृत्व में बनने वाली देश की अगली सरकार को शुभकामनाएं दी हैं.

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