मर्चवार का वह भयानक दृश्य और हिरासत मे विभेद की चरम पराकाष्ठा : विकासप्र. लोध

हिरासत से निकलने का बाद विकास प्रसाद लोध

हिरासत का पहला अनुभव : विकास प्रसाद लोध, लुम्विनि , १ मई |

मित्रो हिमालिनी के कृपा तले आप लोगों ने मेरा बहुत सारे लेखों को  अध्यन किया और अपने असीम प्रेम की वर्षा की। मित्रों आज मैं मेरे गिरफ्तारी पश्चात के कुछ अनुभव आप के समक्ष हिमालिनी के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा हुं। आपका प्रेम, आपके  सुझाव की अपेक्षा करते हुए तथा हिमालिनी परिवार को कोटि कोटि धन्यवाद देते हुए मेरे वृतान्त का आरम्भ करता हुं।

मित्रो सबसे पहले मेरे परिचय से प्रारम्भ करता हुं।
✔मेरा परिवार मेरी प्रथम शक्ति है ः
 मेरा जन्म मधेश की पावन भूमि, शान्ति भूमि लुम्विनि के एक मध्यम परीवार मे २६ साल पहले हुवा। सामान्य बचपन से जटिल युवा अवस्था तक पहुँचाने में मेरे पुज्यनीय  माता पिता की असीम अनुकम्पा एवम मेरे भाईयों और बहन का विशेष सहयोग रहा। मेरे माता पिता शिक्षित होते हुए भी संस्कृति के कारण मैंं बाल विवाह का शिकार हुआ। मेरे अधूरे जीवनको पुर्ण करने वाली मेरी धर्म पत्नी मुझे हर पल एक नयाँ हौसला प्रदान करने से बिल्कुल नही चुकती हैं।
✔मेरा परिवार मेरी प्रेरणा है हर हाल में इनका साथ मुझे मिलता आ रहा है । मेरे पिताजी मेरे गुरु हैं और उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया है ।
जिसकी वजह से मैं सफल होता आया हूँ । इसबार हिरासत में पिताजी तीन बार मिलने आए और उनका आगमन मुझे हिम्मत देता रहा ।
मेरे हिरासत के समय मेरे स्वजन मित्रों का  विशेष प्यार मिला जिसके सहारे मैं मेरा हिरासत समय पूरा करने में सफल रहा। मेरे स्वराजी मित्र का मेरे अन्दर के जोश को ताजा रखने मे काफी योगदान रहा जिनका मैं ऋणी हुं।
✔डा सिके राउत मेरे आदर्श
 “विभिन्न अनगिनत संकटो से ग्रसित एवम अस्तित्व विहीन होने के कगार पर खड़े मधेश तथा मधेशियो का सफल इलाज के मार्ग प्रशस्त करने वाले महान व्यक्ति डा सिके राउत को मै बुद्ध के अवतार से कम नही आँकता ” सुन्दर पावन एवम मनोरम मधेश भुमि को गुलामी से मुक्त कर अमन की स्थापना का संकल्प लेने वाले, स्वराज एवम रामराज्य का स्थापना के लिए संघर्ष करने वाले, एवम अहिंसाको अपना प्रमुख धर्म मानने वाले डा सिके राउत की जिन्दगी अमेरीका के विलासमय वातावरण में  गुजर जाती। अच्छी शिक्षा, अच्छी तनखाह, अच्छी कामयावी कौन नही चाहता। वह सपना जो हर कोई देखता है । अपनो की खातिर मधेश के लिए इतना बड़ा त्याग देने वाले व्यक्ति को अपना आदर्श वनाने मे मुझे गर्व महसुस होता है। मुझे मधेश की अस्मिता प्यारी है, और प्यारा है मधेशियो का अस्तित्व ,इसका संरक्षण और सम्वर्धन करने का सौभाग्य प्राप्त होना मेरे लिए किसी रत्न वा मेडल से कम नही। मुझे मालुम है केवल आजादी ही एक विकल्प है जिस से मै इनको अन्तिम रूप दे सक्ता हुँ। और डा सिके राउत के नेतृत्व मे मधेश के लिए कुछ करने का अवसर प्राप्त होना मेरा सौभाग्य है।
✔मर्चवार का वह भयानक दृश्य
 मधेश और मधेशियो के अस्तित्व, इतिहास रक्षा के लिए, मधेशी वीर सपुतों के सम्मान एवम पहचान के लिए, अपना जीवन समर्पण करने वाले मधेश के युवा वैज्ञानिक डा सिके राउत के सहभागिता मे माघ ५ गते १० वां बलीदानी दिवश मे सहभागी होने तथा मधेशी शहीद प्रति श्रद्धांजलि मे फूल माला अर्पण करने के लिए लाखों मधेशी योद्धा लहान के पशुपति मा○वि में उमड़ पड़े जहाँ डा सिके राउत द्वारा सम्वोधन हुआ।  डा सिके राउत के तरफ बढते मधेश वासियो के समर्थन को देख बौखलायी नेपाल सरकार डा सिके राउत को उनके ही निवास जनकपुर धाम से राज्य विप्लव तथा संगठित अपराध के तहत गिरफ्तार कर हिरासत मे ले लिया जिसके विरोध मे उतरे हजारों स्थानिय वासीयो पर लाठी चार्ज तथा  दमन करते हुए ७  लोगो को गिरफ्तार कर राज्य विप्लव तथा संगठित अपराध के तहद मुकदमा दर्ज किया गया। जिसका विरोध पुरे मधेश मे होना वाजिव है, और जगह जगह हुआ भी। मधेश तथा विदेश में रहे डा सिके राउत के समर्थको द्वारा विभिन्न चरण मे विभिन्न विधि द्वारा विरोध होना और उसी क्रम में विभिन्न स्थानो से समर्थको की गिरफ्तारी भी होती रही। उसी क्रम मे रूपन्देही के मर्चवार मे गत फाल्गुण ७ गते  डा सिके राउत गिरफ्तारी के विरोध मे वृहत रैली निकली। हजारो हजार के तदाद में  लोग गाँव गाँव से निकल्ने लगे सड़के जाम होने लगे । हर तरप्m विरोध भी हुआ और पुलिस दमन भी । इस दमन ने यह साबित कर दिया कि मधेशी की इस देश में क्या स्थान है । नेपाली शासकों को मधेशीयो का हर कार्य  गुनाह दिखता  है। लोग जगह जगह गिरफ्तार होने लगे अन्ततः मै भी गिरफ्तार हुआ मेरे साथ २७ लोग गिरफ्तार हुए जिसमें २ भारतीय नागरिक जो बारात आए थे वह भी गिरफ्तार हुवे। हम शान्तिमय वातावरण मे एक सभा जुलुस भी नही कर सकते तो हमारा इस देश मे क्या अस्तित्व है ? गिरफ्तार कर हम सभी को सदरमुकाम ले जाया गया २१ लोगो को देर रात छोड़ कर वाकी हम ६ लोगो पर राज्य विप्लव तथा संगठित अपराध  के तहत मुकदमा चलाया गया । चेहरा काला होना ही गुनाह है वो भी कोई छोटा गुनाह नही देश का सब से बड़ा गुनाह राज्यविप्लव है। और सब से बड़ी गुनाह की गर बात की जाए तो निःसन्देश मधेशी होना वा मधेशी के घर जन्म लेना ही है। शताव्दियो से इस गुनाह की भरपाई करते आरहे हमारे बाप दादा और हम इस कहेजाने वाले छोटे देश नेपाल के नागरिक्ताधारी अनागरीक वनकर अपना गुजर वसर कर रहे है।
हिरासत मे विभेद की चरम पराकाष्ठा 
  हिरासत मे अनेको प्रकार के व्यक्तियो को अपराधी करार करके अनुसन्धान के लिए रखते है। जिन मे कुछ गुनहगार होते है तो कुछ वेगुनाह। हिरासत को एक अलग दुनियाँ का दर्जा दिया गया है। लगता विल्कुल है कि यह प्रशासन का नियम नही कैदियो का अपना कानुन है। लेकिन वास्तविकता बिल्कुल अलग है। वह प्रशासन के द्वारा ही बनायी गई यातना मशीन मात्र हैं। हिरासत कक्ष मे वादशाह, खजाञ्चि, नाईके, रहा करते हैं। जो आगन्तुक नये कैदी को कमरे का नियम सिखाते है और प्रशासन के ईसारो पर मारते पिटते है। वहाँ का विभेद मुझे पागल कर दिया। पहाडी मुल के लोग जब आते तो उन्हें उच्च दर्जा दिया जाता लेकिन जब मधेशी मुल के लोगो का प्रवेश होता है तो उसे पहले कम्वल से ढक कर पिटा जाता है फिर उसके पास से वरामद सभी रूपये पैसे जप्त कर लिए जातें हैं। और शौचालय के पास रख्खा जाता है। मधेशीयो को तुच्क्ष माना जाता है। वह हिरासत का विभेद मै ठिक से वयां नही कर पा रहा लेकिन इतना समझिए कि उस तरह के विभेदी वरताव देख कर मेरे आँखें नम हो जातीं थीं।
हिरासत एक सीख 
 जीवन की शररुवात एक अनोखी सीख से प्रारम्भ होती है। भले ही नवजात अवस्था मे कुछ ज्ञात न रहता हो परन्तु हमारा पहली सीख जन्म ही है। जन्म के वेला की पीड़ा ही पहली सीख है और मौत आखिरी सीख। जन्म और मृत्यु के बीच एक छोटी दूरी जिसे जीवन की संज्ञा दी गयी है वह भी एक अनन्त सिखों का सागर है,जो जीवन को पुर्ण बनाने की कोशिश करता है। ठीक उसी प्रकार मेरे जीवन मे एक नइ सीख का भण्ड़ारण हुवा। मुझे गिरफ्तार करते समय से लेकर रिहा होने तक मै कुछ न कुछ नयाँ सीखता रहा एक अनुभव का भण्ड़ारण करता रहा जो मै आप लोगो से वाटने की कोशीस कर रहा हुं।
ये मेरा पहली गिरफ्तारी होने के कारण दिल मे थोड़ा भय अवश्य ही था परन्तु हिम्मत चौगुनी होगई थी । क्यो कि मै अपने सिद्धान्तों पर विश्वस्त था और लक्ष्य प्रति अटल। शान्तिपुर्ण मार्ग पर चलने के कारण मेरा मन तनिक भी विचलित नही हुवा। क्योकि मै जान्ता था संघर्ष के रास्ते कठिन अवश्य होते है लेकिन गंतव्य विहिन नही होते। और सत्य पर अटल विश्वास था कठिनाईयो को चीरते हुवे सत्य की जीत होनी निश्चित थी। मुझे बखुवी ज्ञात था मेरा मार्ग तथा लक्ष्य आसान नही हैं। फिर भी मुझे विश्वास था जिस लक्ष्य को प्राप्त करने वाले लोग महा त्यागी है भला वह लक्ष्य दूर कैसे हो सकता है। हम सच की लड़ाई लड़ रहे है, मधेश और मधेशी जन्ता की लड़ाई और इन्साफ की लड़ाई में जीत हमारी ही होने का दृढ विश्वास ने मुझे अथाह शक्ति प्रदान किया। वह शक्ति जो मुझे हिरासत जीवन सरल बनाने मे अचुक औषधी सावित हुइ।
 सब से बड़ी बात मै मधेशी के सिवाय कुछ नही हुं यह अनुभव मुझे हिरासत पश्चात हुआ। मधेश प्रति निष्ठा का उजागर हुआ। मधेश के सेवा मे ही जीवन समर्पण करने की जुनुन पैदा हुवा। हिरासत मे गैरमधेशीयो द्वारा पुलिश के इसारों पर यातनाए मिली लेकिन उस से कहीं ज्यादा मधेश का प्रेम मिला। हम ने सीखा कैसे इन्सान थोड़ी जगह पर थोड़ा जल और थोड़ा भोजन मे कैसे सन्तुष्ट रह सक्ता है ।  चचा स्वराजी बनने  का अवसर हिरासत से प्राप्त हुवा। हिरासत मे लेकर मेरे लक्ष्य को उजागर कर मुझे ध्येयवान निष्ठावान तथा संकल्पवान वनाने के लिए नेपाल प्रहरी को धन्यवाद।।
 
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