मशहूर एक्टर ओमपुरी का निधन

छह वर्ष की उम्र में ओम पुरी सड़क किनारे चाय के कप धोते थे। उनका बचपन काफी गरीबी में बीता और लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने यह सफलता हासिल की। 

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ओम पुरी का शुक्रवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 66 साल के थे। मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर शबाना आजमी ने कहा कि उनसे करीब की दोस्ती रही थी, उनके साथ कई फिल्मों में काम किया, उनका निधन होना बहुत अफसोस की बात है। मधुर भंंडारकर ने कहा – यकीन नहीं हो रहा है…?

– मधुर भंडारकर ने कहा कि यकीन नहीं होता कि इतना एक्टिव इंसान इसतरह अचानक चला गया, बहुत दुखद बात है, फिल्म इंडस्ट्री में उनका बहुत कमाल का योगदान रहा है।
– डेविड धवन ने कहा कि बड़ा धक्का लगा उनकी डेथ की न्यूज सुनकर। 1974 में हम रूम मेट रह चुके थे। वो ब्रिलियंट एक्टर थे।
– शबाना आजमी ने कहा- “उनसे करीब की दोस्ती रही थी, उनके साथ कई फिल्मों में काम किया, उनका निधन होना बहुत अफसोस की बात है।”
कौन थे ओम पुरी?
– 18 अक्टूबर, 1950 को अंबाला में पैदा हुए ओम पुरी एक पंजाबी परिवार में पैदा हुए थे।
– हिंदी फिल्मों के अलावा पाकिस्तान और हॉलीवुड की फिल्मों में काम किया।
– पुरी ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से ग्रेजुएशन किया।
– उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से भी पढ़ाई की। यहां नसीरुद्दीन शाह उनके क्लासमेट थे।
कैसा रहा फिल्मी सफर?
– साधारण चेहरे के बावजूद ओम पुरी अपनी खास एक्टिंग, आवाज और डायलॉग डिलिवरी के लिए जाने जाते हैं।
– 1976 में आई उनकी पहली फिल्म ‘घासीराम कोतवाल’ थी।
– अमरीश पुरी, स्मिता पाटिल, नसीर और शबाना आजमी के साथ मिलकर उनके कई यादगार फिल्में दीं।
– 1980 में आई भावनी भवई, 1981 में सद्गति, 1982 में अर्धसत्य और डिस्को डांसर, 1986 में आई मिर्च मसाला और 1992 की धारावी से शोहरत मिली।
– सनी देओल के साथ घायल औऱ 1996 में गुलजार की माचिस में उन्होंने सिख आतंकवादी का किरदार निभाया। ‘माचिस’ में बोला गया उनका डायलॉग ‘आधों को 47 ने लील लिया और आधों को 84 ने’ काफी मशहूर हुआ।
   source:bhashkar
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