मशहूर कव्वाल अमजद साबरी की नृशंस हत्या

मशहूर कव्वाल अमजद साबरी की नृशंस हत्या
कराची, पाकिस्तान
amsabriदुनियाभर में मशहूर पाकिस्तानी कव्वाल अमजद साबरी को बुधवार दोपहर कुछ लोगों ने कराची के लियाकताबाद इलाके में गोलियों से भून दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। ४५ साल के अमजद मशहूर साबरी ब्रदर्स के मेंबर थे। सूफी सिंगर अमजद की फैमिली ने कन्फर्म किया कि २०१४ में ईशनिंदा के आरोपों के बाद उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही थी। तहरीक ए तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। पिछले साल इंडिया में वे इसलिए चर्चा में थे क्योंकि सलमान खान की फिल्मबजरंगी भाईजान में अपने पिता की कव्वाली भर दो झोली के इस्तेमाल पर उन्होंने कॉपीराइट का मुद्दा उठाया था ।
साबरी अपने एक दोस्त के साथ घर जा रहे थे। इसी दौरान लियाकताबाद १० चौराहे पर कुछ लोगों ने उनकी कार पर काफी करीब से गोलियां चलाईं।
एडिशनल इंस्पेक्टर जनरल मुस्ताक मेहर ने बताया, दोनों हमलावर एक मोटरसाइकिल पर सवार थे। उन्होंने ३० बोर की पिस्टल से साबरी पर पांच बार फायरिंग की।
दो गोलियां साबरी के सिर और एक उनके पैर में लगी ।
साबरी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि उनके दोस्त को गंभीर हालत में हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है।
एरिया को सील कर दिया है और हमलावर की तलाश जारी है।
साबरी को पाकिस्तान के बेहतरीन कव्वालों में एक माना जाता था। वो कुछ दिन पहले ही अमेरिका और यूरोप के कई देशों में शो करके लौटे थे।
साबरी ब्रदर्स ब्रांड को १९५० के दशक में उनके पिता गुलाम फरीद और चाचा मकबूल ने बनाया था।
हरियाणा के रोहतक में जन्मे इन दो भाइयों ने ही दुनियाभर में कव्वाली को पहचान दिलाई। बाद में अमजद ने परिवार की सूफी गायकी को आगे बढ़ाया।
( अमजद साबरी मशहूर कव्वाली गायक मकबूल साबरी के भतीजे थे। मकबूल का २०११ में इंतकाल हो चुका है।
मकबूल साबरी ने अपने भाई गुलाम फरीद साबरी के साथ मिलकर ५० के दशक में कव्वाली ग्रुप बनाया था। अमजद इस विरासत को आगे बढ़ा रहे थे।
जब भी साबरी ब्रदर्स ने एकसाथ कव्वाली गई, वे काफी चर्चा में रहे। उनकी कुछ मशहूर कव्वाली भर दो झोली मेरी, तजदर ए हरम और मेरा कोई नहीं तेरे सिवा हैं।
उनकी फारसी कंपोजिशन नमी दनम छे मंजिल बूद भी काफी मशहूर हुई थी।
भर दो झोली को मूल रूप से साबरी ब्रदर्स ने ही गाया था।
सलमान खान स्टारर २०१५ की सबसे हिट मूवी में शामिल ुबजरंगी भाईजानु में जब अदनान सामी की आवाज में यह कव्वाली शामिल की गई थी तो अमजद साबरी ने इसका विरोध करते हुए कॉपीराइट का मुद्दा उठाया था।
यह कव्वाली उनके पिता गुलाम फरीद और चाचा मकबूल ने गाई थी।
ईशनिंदा के आरोप भी लगे
२०१४में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने ईशनिंदा के आरोपों पर जियो और एआरवाय न्यूज को नोटिस जारी किए थे।
दोनों चैनल्स ने अपने मॉर्निंग शो में एक कव्वाली पेश की थी।
आरोप है कि कव्वाली में शादी का जिक्र था, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती थी।
कुछ रिलीजियस फिगर्स का जिक्र भी इसमें किया गया था।
इसके बाद तारिक असद नाम के एक वकील ने कव्वाल अमजद साबरी और इसे लिखने वाले अकील मोहसिन नकवी के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

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