मसौदा निर्माणकर्ता बुद्ध को कैसे भूल गए ?

budhhaअमरदिप मोक्तान

काठमांडू,२३ जुलाई | विश्व के मानचित्र पर नेपाल भले ही एक छोटा देश के रूप में जाना जाता हो किन्तु नेपाली बहुत भाग्यशाली हैं । विश्व पटल पर नेपाल का नाम स्थापित कराने में तीन नाम अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं—रणबाकुरां वीर गोर्खा, विश्व का सर्वोच्च शिखर सगरमाथा तथा नेपाल की पवित्र मिट्टी में एशिया की ज्योति के रूप में जाने वाले अहिंसा के प्रवर्तक बुद्ध की जन्म स्थली ।किन्तु नेपाली का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये है कि बुद्ध के प्रति अगाध सम्मान और श्रद्धा होने के बावजूद महामानव भगवान बुद्ध का नाम निर्माणधीन संविधान में उल्लेख्य नहीं होना ।

भगवान बुद्ध नेपाल में जन्मे हैं इस बात के प्रचार और प्रसार के लिए देश विदेश में सेमिनार, गोष्ठियाँ, बुद्ध के नाम का टीशर्ट लगाकर प्रचार करना यह सब बहुत हो चुका है और हो भी रहा है और बुद्ध का जन्म नेपाल में हुआ है यह भी स्थापित हो चुका है ।

यदि निर्माणाधीन नेपाल के संविधान की शुरुआत अहिंसा के प्रवर्तक गौतम बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल शब्द से प्रस्तावना शुरु की जाती तो शायद निर्माणाधीन संविधान पवित्र ग्रन्थ के रूप में उच्च स्थान प्राप्त करता और बुद्ध नेपाल में जन्में हैं इस बात की पुष्टि और भी मजबूती के साथ होती ।

पता नहीं विश्व मानचित्र में सम्मानित बुद्ध अपने ही जन्मभूमि नेपाल के निर्माणाधीन संविधान की प्रस्तावना में जगह क्यों नहीं पा सके ? प्रस्तावना लेखन मं आबद्ध बुद्धिजीवी मसौदाकार की पूर्वाग्रही सोच के कारण ऐसा है या अन्जाने में यह कात छूट गई है या किसी को खुश करने के लिए किसी के आदेश से बुद्ध का नाम अनदेखा कर दिया गया है पता नहीं ।

प्रारम्भिक मसौदे के लिए सुझाव लेने का काम सम्पन्न हो चुका है । प्रस्तावना में सुधार् अभी भी संभव है । नेपाल के नेताओं को नेपाल की गरिमा को विश्व के सामने उच्च बनाने और बुद्ध के प्रति सम्मान प्रकट कराना अत्यन्त आवश्यक है । इसलिए प्रस्तावना के शुरुआत में बुद्ध शब्द को किसी भी हाल में नहीं छोड़ा चाहिए । बुद्ध के प्रति सम्मान तथा श्रद्धा करने वाली जनता बुद्ध शब्द लिखने पर हर्ष प्रकट करेंगे । (नेपाली से हिंदी अनुवाद) स.

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