महज २ हजार भारु के लिए कपकपाने वाली ठंढ में सुवह चार बजे से लाइन

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नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा भारु का नियन्त्रण अभी भी बरकरार  

विजेता, काठमांडौ, १६ पौष ।
पुस की कपकपानेवाली ठंढ में थापाथली में सवेरे सवेरे लगी लोगों की लम्बी कतार देखकर भ्रमित न हों। वे तीर्थालु नही है । महज २ हजार भारु के लिए उक्त लाइन लगी है ।
नेपाल राष्ट्र बैंक के हाता से थापाथली चोक तक पहँची भीड वास्तव में भारतीय रुपैयाँ साटही करनेवालों की है । सुवह चार बजे से लाइन न लगने पर पैसा साटही का कुपन नहीं मिलता इसी लिए सुवह से ही लोगों की भीड बैंक के आगे लगती है ।
बैंक ने भारतीय नोट बदलने के लिए दैनिक एक सौ कुपन मात्र उपलब्ध करवाती आ रही है । वहीं भारु के लिए लगभग दैनिक पाँच सौ से अधिक लोग बैंक पहुँते हैं ।
भारत के इलाहाबाद स्थित गंगासागर स्नान हेतु जाने के मनसाय से कौशलटार की मंजु कार्की कल सुवह सात बजे आने तक सम्पूर्ण कुपन समाप्त हो चुके थे। कार्की कहती हैं–इसी लिए वापस जाना पडा । महज २ हजार भारु प्राप्त करने के लिए बहुत मुस्किलें झेलनी पडी बताते हुए उन्होंने आज सवेरे अपने दो बेटों के साथ सुवह ४ बजे ही लाइन लगने के लिए आई थीं । उन्होंने बताया मैंने इस से पहले भी कईं बार लाइन लगते हुए भारु १० हजार ही प्राप्त किया है ।
भारत ने ५ सौ व १ हजार के भारु पर प्रतिवन्ध लगाने के बाद बजार में भारु का अभाव होने के बाद राष्ट्र बैंक के बैंकिङ कार्यलय थापाथली में भारु सटही के लिए सर्वसाधारण की भीड लगती आ रही है । राष्ट्र बैंक ने १ सौ भारु सटही का सुविधा दे रही है ।
भारतके सुपौेल विहार के राकेश महतो दो हजार भारु के लिए ज्ञानेश्वर स्थित डेरा से सुवह ४ बजने से पहले ही लाइन लगने के लिए आने की बात बताई । ठंढ में एक सवेरे लाइन में बैठना दुर्गती है बताते हुए महतो बताते हैं एक बार में २ हजार ही मीलता है वो भी महिने में मात्र दो बार । इस नियन्त्रण से और भी दिक्कत आने की बात महतो बताते हैं । ज्ञानेश्वर में चाट की दूकान चलाते आ रहें महतो गाउँमें बच्चा विमार होने के कारण घर पैसा भेजने के लिए इस प्रकार लाइन की धक्का मुक्की खा रहें हैं । जरुरत बडी है और पैसा कम मील रही है बताते हुए उन्होंने दोस्तो को भी लाइन में खडा किया है बताया ।
सटही सम्बन्ध में नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता नारायणप्रसाद पौडेल कहते हैं् – नागरिकता दिखाकर २ हजार, सटही के उद्धेश्य बताने पर ज्याद में १० हजार व औषध उपचार में जाने के लिए ज्यादा में २५ हजार भारु उपलब्ध करवाया जाता है ।
भारत में तिर्थधाम करने वालों के साथ घुम्ने जाने वाले समेत भारु सटही करने के लिए कतार में खडे दिखें । वहीं इलाज के लिए जानेबालों की भी भीड कम नही थी । कुपन न पाकर वापस जानेवालों की संख्या भी अधिक होने की बात एक पीडित ने जानकारी दी ।
यद्यपि नेपाल राष्ट्र बैंक ने व्यक्तिगत अवस्था देखकर ज्यादा में २५ हजार तक भारु सटही कर रही है ।
राष्ट्र बैंक ने ५ सौ व १ हजार के भारु सटही करने के लिए भारत सरकार की निर्णय की प्रतिक्षा कर रही है । भारत ने २ हजार का नयाँ भारु नोट जारी करने के बाद भी रिजर्भ बैंक अफ इन्डिया (आरबीआई) द्वारा खुला नही कीजाने की वजह से नेपाल में प्रतिवन्ध है ।
प्रवक्ता पौडेल ने बताया नेपाली ज्यादा में २५ हजार भारु मात्र सटही कर पाने की कानूनी व्यवस्था होने के कारण उसी बराबर रकम बदल पाने की माग राष्ट्र बैंक कर रही है ।
नेपाल की बैकिङ प्रणाली में ५ सौ व १ हजार के भारु नोट २ करोड रुपैयाँ मात्र रही है । ज्यादा भारु काठमाडौ उपत्यका व प्रमुख शहर के अतिरिक्त सीमा क्षेत्र में ज्यादा होने की बात पौडेल बताते हैं ।

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