महापुरुषों की नजर में नारी

    पुरुष किसी सुन्दरी के चरणों पर अपने जीवन को उसी प्रकार बलिदान कर देता है, जिस प्रकार एक मर्कट अपने शिकारी के चरणों पर ।

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महिला सशक्तिकरणः आज की अपरिहार्य आवश्यकता

– स्वामी रामकृष्ण परमहंस
    जहाँ स्त्रियों का सम्मान होता है, वहाँ देवता भी प्रसन्न रहते हैं ।
-मनु
    जिस परिवार में स्त्रियों का सम्मान नहीं होता, वह पतन और विनाश के गर्त में लीन हो जाता है ।
-महाभारत
    पति के लिए चरित्र, सन्तान के लिए ममता, समाज के लिए शील, विश्व के लिए दया तथा जीव मात्र के लिए करुणा संजोने वाली महाप्रकृति का नाम ही नारी है ।
-महषिर् रमण
 जीवन में जो कुछ पवित्र और धार्मिक है, स्त्रियां उसकी विशेष संरक्षिकाएं हैं ।
– महात्मा गांधी
 स्त्री और पुरुष विश्व रुपी अंकुर के दो पत्ते हैं ।
-जायसी
 छलनामयी ! तेरा ही नाम औरत है !
-शेक्सपीयर
    स्त्रियों का सम्मान करो ! वे हमारे पार्थिव जीवन को स्वर्गीय सुमनों से सुरभित एवं गुम्पिmत बनाती हैं ।
-शिलर
    अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी !
आंचल में है दूध और आँखों में पानी !!
– मैथिलीशरण गुप्त
    नारी तुम केवल श्रद्धा हो,
विश्वास रजत नग पगतल में,
पीयूष-स्रोत सी बहा करो,
जीवन के सुन्दर समतल में !!
– जयशंकर प्रसाद
     स्त्रियों की अवस्था के सुधार न होने तक विश्व के कल्याण का कोई मार्ग नहीं । किसी पंक्षी का एक पंख के सहारे उडÞना नितान्त असंभव है ।
-स्वामी विवेकानन्द
र्    र्सप अत्यन्त निकट आने पर ही दंशन करता है । परन्तु नारी तुम्हें पर्याप्त दूरी से भी दंशित करती है । र्सप का विष इस शरीर मात्र को नष्ट करता है, किंतु वासना पारलौकिक जीवन में प्रवेश कर कई जन्मों का नाश कर देती है । वासना से घृणा करो, किंतु नारी से नहीं ।
-स्वामी शिवानन्द सरस्वती
    पवित्र नारी सृष्टि की सर्वोत्तम कृति होती है, वह सृष्टि के सम्पर्ूण्ा सौर्न्दर्य को आत्मसात् किए रही है ।
-रवीन्द्रनाथ ठाकुर
    पुरुषों की दृष्टि होती है, नारियों की अन्तरदृष्टि !
-विक्टर हृयुगो
    कांटों भरी शाखा को फूल सुन्दर बना देते हैं, और गरीब से गरीब आदमी के घर को लज्जावती स्त्री सुन्दर और र्स्वर्ग बना देती है ।
-गोल्डस्मीथ
    नारी प्रकृति की बेटी है । उसपर क्रोध न करो । उसका हृदय कोमल होता है, उसपर विश्वास करो ।
-महाभारत
    काव्य और प्रेम दोनों नारी हृदय की सम्पति हैं । पुरुष विजय का भूखा होता है, नारी र्सपर्मण की । पुरुष लूटना चाहता है, नारी लुट जाना ।
-महादेवी वर्मा
    जो अपने घर आता है, उसे मेहमान समझा जाता है, अतः स्त्री भी मेहमान है ।
-प्रेमचन्द्र
    एक गुणवती नारी अपने पति के लिए किरीट के समान होती है ।
– पुरानी बाइबल
    तुम्हारे रोम-रोम में नारि ! मुझे है स्नेह अपार !
तुम्हारा मृदु उर ही सुकुमारि ! मुझे है स्वर्गागार !
तुम्हारी सेवा में अनजान ! हृदय है मेरा अन्तर्धान !
देवी ! मां ! सहचरि ! प्राण !
– सुमित्रानन्दन पन्त

    या भव परावार की, उलंघि पार को जाइ ।
तिय छवि छाया ग्राहिनी, ग्रह बीचही आई ।।
– बिहारी
    रमें तुम भू पर विमल विभूति, युगों के सीमा-बन्धन काट
प्रणत जन रहा वासना-कीट, नारि ! तुम उससे कहीं विराट ! -व्रजवासी लालशर्मा
-स्त्रियां पुरुषों से अधिक बुद्धिमती होती हैं, क्योंकि वे पुरुषों से कम ज्ाानती हं किन्तु उनसे अधिक समझी हंै ।
-जेम्स स्टीफेन्स

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