महामना मालवीयजी सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के हिमायती थे : राष्टपति भंडारी

photo by binod vishwokrma

photo by binod vishwokrma

विनोदकुमार विश्वकर्मा , काठमांडू, माघ ९ ।  आदिकाल से न जाने कितने कर्मवीरों और तपस्वियों ने भारत में जन्म लेकर अपने आदर्श चरित्र, प्रतिभा, कर्मनिष्ठा, त्याग और सेवा से संसार का सुधार और संगठन किया तथा भारतवासियों को अज्ञान के अंधकार से निकाल कर ज्ञान का दीपक दिखलाया । भारत में ऐसे ही देवपुत्रों में आधुनिक ‘महर्षि महामना पं. मदनमोहन मालवीय जी’ भी थे । जिस वीर योद्घा ने अपनी युवावस्था में ही भारत की रक्षा के लिए पेटी कसी थी । वह अंत तक भी उसी प्रकार, वरन् उससे भी दुगुने आवेश से डटा रहा । न जाने कितने पुराने साथी मैदान छोड़कर भाग खडेÞ हुए । पर यदि कोई वीर था, जो आदि से लेकर अंत तक पितृभक्त पुत्र के समान अपना सुख और घर त्याग कर निरन्तर मन, वचन और कर्म से कर राष्ट्र की सेवा करता रहा हो, जिसका प्रत्येक कार्य में भारत का कल्याण छिपा हो, जिसकी प्रत्येक प्रार्थना भारत की हित कामना के लिए होती हो, जिसके उपदेशों में देश सेवा का राग भरा हो–वह अकेले मालवीय जी थे ।
भारत रत्न पं. मदनमोहन मालवीय जी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक थे । खासकर विश्वविद्यालय की वर्षगाठ एवं मालवीय जी की जन्म तिथि के अवसर पर विश्व के अधिकांश देशों में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है । इस बार २० जनवरी को काठमांडू के हृदय स्थल में अवस्थित राष्ट्रीय सभागृह के सभागार में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की सौवीं वर्षगांठ एवं मालवीय जी की १५५ वीं जयंती समारोह का आयोजन किया गया । समारोह के समुद्घाटन के बाद मुख्य अतिथि राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने कहा कि महामना मालवीय जी सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के हिमायती थे । और उनसे हमें शिक्षा लेनी चाहिए ।

3
राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच सदियों से रहे सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, शैक्षिक, धार्मिक सम्बन्धों को और प्रगाढ़ बनाने में यह समारोह ने एक मजबूत सेतु का काम किया है ।
विशिष्ट अतिथि के रुप में शिक्षा मंत्री धनीराम पौडेल ने कहा कि नेपाल में शिक्षा प्रारंभ से पूर्व नेपाल के लोग महामना मदनमोहन मालवीय जी द्वारा स्थापित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से ही शिक्षा आर्जन करते थे । अभी भी नेपाल के बहुत शिक्षाविद एमफील, पीएच.डी. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से ही करते आ रहे हैं ।

6
बताया कि नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के बीच अन्योन्याश्रित सम्बन्ध रहा है । इन दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक क्षेत्रों में ऐकभाव्य बना रहे, यही सबसे बडी उपलब्धियां होंगी ।
विशिष्ट अतिथि के रुप में भारत के विद्वान राजनेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खासकर नेपाल के अधिकांश विद्यार्थी यहां आकर ज्ञानार्जन करते है । इसलिए नेपाल के प्रति आज से नहीं सदियों से हमारा इतना सद्भाव रहा है कि उन्हें शब्द में वर्णन नहीं किया जा सकता है । विश्व में नेपाल ही एक ऐसा देश रहा है, जो कभी भी पराधीन नहीं रहा है । आज नेपाल स्वतंत्र और स्वाभीमानी देश रहा है, इससे हमें गर्व हो रहा है ।
बताया कि मालवीय जी ने जब काशी हिन्दू विश्वविद्यालय बनाने का निर्णय लिया तो उस समय बहुत लोगों ने ‘हिन्दू’ शब्द पर विरोध किया, तब मालवीय जी ने कहा कि सिन्धु नदी के पास रहने वाले सभी हिन्दू हैं । इस विश्वविद्यालय में हिन्दू, मुसलिम, पार्सी सभी लोग ज्ञानार्जन कर सकते हैं ।
4काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रा. डॉ. गिरिष चन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि काशी ज्ञान को समृद्घ बनाने की राजधानी रही है और ज्ञान को समृद्घ करने हेतु एक स्रोत के रुप में मालवीय जी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की थी । जो अभी काशी कर्मवीरों की राजधानी एवं विश्वविद्या की राजधानी के रुप में संसार भर परिचित है ।
महमना मालवीय मिशन भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष न्यायमुर्ति गिरीधर मालवीय ने कहा की मालवीय जी का प्रादुर्भाव पुण्यतीर्थ प्रयाग में उस समय हुआ, जिस समय भारतीयों की स्वतंंत्रता की भावना को भलीभांति कुचला जा चुका था । उनकी प्रेरणा से भारत में राष्ट्रोत्थान, नवजागरण तथा सांस्कृतिक चेतना का असाधारण और अभूतपूर्ण प्रचार–प्रसार हुआ । वे दीनता, हीनता तथा पराधीनता के निराशान्धकारपूर्ण वातावरण में हमारे मध्य साहस, शक्ति एवं संदेश लेकर आए ।
उन्होंने कहा की नेपाल में हिन्दू विश्वविद्यालय बनाने का जो प्रस्ताव किया गया है, वह सराहनीय कार्य है । हमे पूर्ण विश्वास है कि नेपाल सरकार अविलंब स्वीकृति देकर इस पूण्य कार्य को सफल बनाएगी ।
मौके पर महामना मालवीय मिशन, नेपाल के अध्यक्ष योगाचार्य जी.एन. सरस्वती ने आभार ज्ञापन करते हुए कहा की भारत की पवित्र एवं योग भूमि में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है, इसी से प्रेरणा लेकर नेपाल में भी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु हमलोग प्रस्ताव सहित आगे बढेÞ हंै । और इसके लिए हमे एक हजार हेक्टर जमीन भी उपलब्ध हो गई है । उम्मीद है कि मालवीय जी का सपना साकार करने में अवश्य ही हमें सफलता हासिल होगी ।
मौके पर नेपाल के पूर्वप्रधानमंत्री स्व. वी.पी. कोइराला, स्व. कृष्ण प्रसाद भट्टराई और स्व. मनमोहन अधिकारी को मरणोत्तर सम्मानपत्र से मुख्य अतिथि राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने सम्मानित किया । स्व. वी.पी कोइराला के सुपुत्र डॉ. शशांक कोइराला, स्व. कृष्ण प्रसाद भट्टराई के भतीजे विनोद भट्टराई और स्व. मनमोहन अधिकारी की बहु शांति अधिकारी ने उक्त सम्मानपत्र ग्रहण किया ।

10
इसी प्रकार समारोह में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलगीत की प्रस्तुति हुई । ध्यातव्य है की काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलगीत की रचयित्री डॉ. शांति स्वरुप भटनागर हैं ।
समारोह की अध्यक्षता महामना मालवीय मिशन, नेपाल के अध्यक्ष योगाचार्य जी.एन. सरस्वती ने की । कार्यक्रम का संचालन सुरेन्द्र गौतम ने किया था और स्वागत मन्तव्य मिशन के महासचिव जीवनचन्द्र कोइराला ने किया था ।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: