Wed. Sep 26th, 2018

महिलाओं की दशा कब सुधरेगी : शिल्पा जैन सुराणा

डॉ शिल्पा जैन सुराणा, वारंगल | स्वाति की शादी को 7 साल हो गए है। शादी से पहले स्वाति एक हंसती खिलखिलाती जिंदगी का भरपूर लुत्फ उठाने वाली लड़की थी, आज शादी के 7 साल बात वो लड़की कही खो सी गयी है, माथे पर सलवटे लिए पूरा दिन घर मे चक्करघिन्नी की तरह घूमती रहती है, अब तो उसे अपने शौक भी याद नही, पति घर परिवार बच्चो में उस चुलबुली लडकी ने अपने आप को खो दिया।

दर्शना का जब CA का रिजल्ट आया, तो पूरे परिवार में जश्न का माहौल था हो भी क्यों नही, आखिर वो घर की पहली CA जो थीं, शादी के बाद परिस्थिति ऐसी बनी कि उसे अपनी जॉब छोड़नी ही पड़ी, ससुराल वालों को उसके जॉब करने से सख्त नाराजगी थी, उनका कहना था ये सारे शौक शादी से पहले सही है, शादी के बाद एक लड़की के लिए पहली जिम्मेदारी उसका घर है। ये हमारे समाज की विडंबना ही जहाँ लड़कियों के लिए प्रोफेशन को एक शौक के रूप में परिभाषित किया जाता है।

निशा थक हारकर स्कूल में पढ़ाकर जैसे ही घर पहुंचती, बिखरा हुआ घर, सिंक में पड़े बर्तन उसे मुँह चिढ़ाते मिलते, दिन भर की थकान भूल कर वो पहले घर के कामो में लग जाती, जॉब कर के आने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उसके माथे पर ही होती। सासु माँ ये कह कर इतिश्री कर लेती कि वो पूरे दिन उसके बच्चे को संभालती है ये क्या कम है।

ईशा औऱ उसका पति अनीश दोनो ही मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत थे, घर आते ही अनीश जहाँ मोबाइल, tv, लैपटॉप में लग जाता, ईशा आकर घर के कामो में जुट जाती, इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा भी होता, मगर अनीश एक दो दिन बाद वापिस अपने पुराने ढ़रे पर लौट आता।

ये किसी एक घर की कहानी नही भारत मे कमोबेश हर घर की यही कहानी है। दुख की बात है कि जो महिला पूरे परिवार की धुरी है सबसे ज्यादा उपहास भी उसी का उड़ाया जाता है। सर्वे के रिजल्ट चौकाने वाले है पर सच्चाई यही है, भारतीय महिलाएं आज सबसे ज्यादा नाखुश है और उनमें सबसे बड़ा प्रतिशत घेरलू महिलाओ का है। पर ऐसा क्यों है ??

हमे इसका निदान करने से पहले इसका कारण जानना पड़ेगा। इसका कारण है कि महिलाओं द्वारा किये गए काम की कोई कद्र न होना, “तुम घर मे करती ही क्या हो।” “घर मे रहने वाली औरतो को काम ही क्या होता है।” और सबसे बड़ी ये बात “ये कुछ नही करती ये हाउसवाइफ है।”…..ये कुछ नही करती ….शूल से चुभते ये शब्द और स्थिति देखिये महिलाएं ये भी मान लेती है कि वो कुछ नही करती क्योंकि वो हाउसवाइफ है।

आज स्थिति और भी बदतर हो रही है, जब से शिक्षा का प्रसार बढ़ा है, महिलाओं ने भी उसमे अपनी श्रेष्ठता साबित की है, उन्हें उड़ने के लिए एक नया आसमान मिलता है, मगर न जाने क्यों शादी होने के बाद उनके लिए सारे रास्ते बंद हो जाते है, एक महिला से ये आशा की जाती है कि वो पूरे परिवार की जिम्मेवारी उठाये, वो करती भी है, सुबह सबसे पहले उठती है, सबसे अंत में सोती है,पढ़ी लिखी महिलाओ को जॉब करने की अनुमति नही और जो जॉब करती है उन्हें जॉब के साथ घर के भी सारे कामो को देखना पड़ता है, उस पर महिला यदि माँ है तो उसकी जिम्मेदारी 24*7 की हो जाती है, ये हकीकत है एक ही इंसान पर उम्मीदों का इतना बोझ…. एक महिला से हर समय परफेक्ट होने की उम्मीद की जाती है, वो अपने आपको साबित करते करते थक जाती है पर लोगो की उम्मीद खत्म नही होती। 10 में से 9 काम सही हो और 1 गलत तो उन 9 की सफलता कोई मायने नही रखती। वास्तव में एक गृहणी की परीक्षा हर दिन चलती है।

ऐसे में अगर वो अवसाद ग्रस्त है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है, हमारे समाज के दोगले मापदंडों की, ऐसे में बहुत जरूरत है कि उनमें आत्मसम्मान और स्वाभिमान को जागृत किया जाए,ऐसी बहुत सी महिलाएं है जो पढ़ी लिखी है या उनमे कोई न कोई प्रतिभा है पर उसे सामने लाने के लिए कोई मंच नही, एक घेरलू महिला के लिए ये संभव नही हो पाता कि वो 9 से 5 की नौकरी कर पाए वो कुछ करना चाहती है मगर सही प्लेटफार्म उपलब्ध नही है।

ऐसे में उनके पास एक साधन उपलब्ध है कि वो घर से ही कुछ काम कर पाए, जिसे वर्क फ्रॉम होम के नाम से जाना जाता है, मगर बहुत कम संस्थान ऐसे है जो ये सहूलियत देते है, देश मे लाखो महिलाएं ऐसी है जो कुछ करना चाहती है मगर ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नही है, सरकार ने डिजिटल इंडिया स्कीम शुरू तो की मगर वो ठंडे बस्ते में जाती हुई नजर आ रही है, इस दिशा में कोई विशेष प्रयास नही है, कुछ ऑनलाइन कंपनिया इसमे ठगी भी कर रही है, जहाँ वो काम करवाने के बाद भी भुगतान में आनाकानी कर रही है।

सरकार को चाहिए कि वो इस दिशा में प्रयास करे, तो लाखो महिलाओं को इससे फायदा होगा, साथ ही देश के राजस्व में बढ़ोतरी होगी वो अलग, एक अलग ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की जा सकती है जो पढ़ी लिखी महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवाए, पार्ट टाइम जॉब हो जिससे घरेलू जिम्मेदारी निभाने के साथ साथ कुछ करने का मौका मिलेगा और साथ ही में उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।पढ़ा लिखा और सक्षम होने के बावजूद वो कुछ नही कर पाती ये परिस्थिति उन्हें और अधिक तनावग्रस्त बना देती है।

उम्मीद है सरकार इस बारे में गंभीरता से विचार करे, इससे महिलाओ को रोजगार मिलेगा और समाज मे भी उनकी स्थिति में सुधार होगा, अगर ये किया जाए तो महिलाओ में खोया हुआ आत्मविश्वास अवश्य ही लौटेगा, कही न कही एक गहरे प्रयास की आवश्यकता आज इस समाज को है। अगर आप भी चाहे तो अपने सुझाव कमेंट के जरिये शेयर कर सकते है

 

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