महिला अधिकारवादी सम्मेलन नेपालगन्ज मेें सम्पन्न

नेपालगन्ज,(बाके), पवन जायसवाल, २०७२ अगहन २० गते ।
पश्चिम क्षेत्र की महिलाए के उपर हो रही विभिन्न प्रकार की हिंसा के विषय में आयोजन किया गया महिला अधिकारवादी सम्मेलन नेपालगन्ज मेें शनिवार को सम्पन्न हुआ है ।
पश्चिम क्षेत्र के १३ जिला के महिला अधिकारकर्मीयों के बीच में हुआ छलफल से दुसरा दिन बालविवाह और महिला हिंसा अन्र्तसम्बनध के विषय में बी ग्रुप के कार्यक्रम संयोजक प्रमोद रिजाल ने कार्यपत्र प्रस्तुत किया था ।
1महिला तथा बालबालिका विकास कार्यालय बाके के फोकल पर्सन बिन्दु कुवर ने सामाजिक इज्जत, अन्धविश्वास, प्रविधि की गलत प्रयोग के कारण बालविवाह ने प्रसय पाया है उल्लेख करते हुयें बालविवाह के क्षेत्र में काम करते आ रहें संघ संस्थाओं ने ईस विषय में थोडा संवेदनशील होकर काम करने के लियें जोड दिया ।
बातचीत के कार्यक्रम में बोलते हुयें राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नेपालगन्ज के क्षेत्रीय संयोजक मुरारी खरेल ने बालविवाह होने के कारण और प्रवृति के उपर सभी लोगों की ध्यान न होने की कारण से बालविवाह मौलाते जा रहा है उल्लेख करते हुयें पश्चिम क्षेत्र में बालविवाह की संख्या अधिक है तो भी कानूनी दायरा में नही आया है तथ्यांक दिखाई पडी है बालविवाह करानेवालों को कानूनी कठघरा में लाने के लियें सभी लोगों की आवश्यकता रही है जोड दिया ।
इसी तरह हिमराईटस नेपाल के क्षेत्रीय संयोजक प्रकाश उपाध्याय ने बाल विवाह और भागीविवाह को एक ही जगाह रखने से बालविवाह की समस्या और जटिल बनते जा रहा है बताया । एडभोकेसी फोरम के बसन्त गौतम ने बालविवाह अपराध है और ऐसी अपराध करनेवालों को मा“फी नही देना चाहिए इस विषय को कार्यान्वयन कराने तर्फ सभी लोगों की एक्यबद्धता और प्रतिवद्धता एकदम जरुरी रही है बताया ।
कैलाली की अधिकारकर्मी गोमा आचार्य ने अभिभावको की मोह माया की अभाव और अपने बच्चों पर उन लोगों की उचित ध्यान न होने की कारण से भी बालविवाह की अवस्था और विकराल होते जा रही है ।
3द्धन्द्ध तथा एकल महिला संजाल की क्षेत्रीय संयोजक शोभा विसी ने बालविवाह की सम्बन्ध महिला हिंसा से अन्र्तनिहित होने से ऐसी हो रही जब तक महिला पर होनवाली हिंसा में कमी नही आएगी तबत क बालविवाह नही रुकेगी बतायी ।
एक्सन एड नेपाल श्रोत केन्द्र के संयोजक सरोज पोख्रेल ने महिला पर हो रही हिंसा एकले नही होती बताते हुयें हिंसा की अन्र्तनिहित पक्ष से खोताल्ना जरुरी रहा है ।

कार्यक्र में महिला पर हो रही हिंसा न्युनिकरण के लियें पुरुषवादी सोच को त्यागकर महिलावादी सोच की विकास अब करना जरुरी रही सहभागी महिला अधिकारवादीयों ने जोड दिया ।
महिला हिंसा के विषय सामाजिक समस्या की विषय होने के कारण समाज की सकारात्मक परिवर्तन नहाने तक महिला पर हो रही हिंसा में कमी नही होगी जोड देते हुयें सहभागी महिलाए“ और पुरुषो ंकी समान सहभागिता होगी तब मात्र महिला पर हिंसा की न्युनीकरण होगी ।
कार्यक्रम में अपांग महिलाए“ की समस्या के बारे में दिपा थापा, बादी समुदाय की समस्या के बारे में पार्वती नेपाली, कमैया महिलाए“ की समस्या के बारे में कृष्ण थारु, सिद्धराज पनेरु, कमला पन्त, कमला कुँवर, साहिदा शाह, अमृता केसी, रुपा गहतराज, सानी परियार लगायत लोगों ने महिला हिंसा और बालविवाह के बारे में बोले थे ।
कार्यक्रम में बाँके ,बर्दिया ,दांग ,कैलाली, कंञ्चनपुर ,सुर्खेत ,दैलेख ,बैतडी, बाजुरा ,डोटी नवलपरासी, कपिलबस्तु, पाल्पा करके १३ जिला के महिला अधिकार्मीयों की सहभागिता रही थी ।2

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