महिला और घरेलू हिंसा : विनोदकुमार विश्वकर्मा

विनोदकुमार विश्वकर्मा | नारी ईश्वर का वरदान है, उसकी महत्ता को किसी भी समाज में नकारा नहीं जा सकता क्योंकि उसका समाज–निर्माण में अमूल्य योगदान है । नारी–पुरुष परिवार रुपी एक रथ के दो पहिए हैं, जिनमें से यदि एक पहिया टूट जाए तो रथ का चलना कठिन हो जाता है । पुरुष के जीवन काल में तीन स्त्रियों से घनिष्ट सम्बन्ध स्थापित होता है । माता, पत्नी और पुत्री । ये तीनों स्त्रियां अपनी–अपनी भूमिका कुशलता से निर्वाह करती हुई लोगों के आदर, प्रेम और वात्सल्य की हकदारी होती हैं । नारी भिन्न–भिन्न रुपों में परिवार एवं समाज की सेवा करती है । एक माता के रुप में बच्चों की सेवा, पत्नी के रुप में पति की सेवा, बहू के रुप में परिवार के बड़े–बूढ़ों की सेवा और एक परिचारिक के रुप में वह समाज के दुःखी और बीमारों की सेवा करती है ।
नारी को सुख व सुरक्षा प्रदान करने के बदले में, पुरुष वर्ग ने नारी से जो मूल्य लिया है, उससे नारी की सामाजिक समता, सामाजिक अन्तरचेतना व अन्तरात्मा को झकझोर दिया है । पुरुष अधिशासित सामाजिक व्यवस्था में नारी को तिरस्कृत किया जाता है, नारी को शोषण किया जाता हे, उसका अपमान किया जाता है । और यहां तक कि नारी के साथ अमानवीय पशुवत हिंसात्मक व्यवहार किया जाता है । आज नारी को खरीदा जाता है । बेचा जाता है तथा लूटा जाता है ।
महिलाओं को लिंगभेद के कारण सामाजिक अधिकार और आर्थिक अधिकारों का न मिलना आज एक बड़ी चुनौती बन गई है । इसी कारण महिलाओं का आज सब से अधिक शोषण हो रहा है । इसकी सब से भयावह समस्या अवैध देह व्यपार के रुप में पूरे विश्व के सामने खड़ी है । अवैध देह व्यापार में शोषण, वेश्यावृत्ति, बलपूर्वक श्रम कराना या गुलाम बनाकर देह व्यापार करना शामिल हैं ।
इसी प्रकार घरेलु हिंसा भी एक चिन्ता का विषय बन गया है । वास्तव में महिलाओं के विरुद्ध होने वाली आपराधिक हिंसा का कोई एक तथ्य नहीं है । अर्थात् घरेलू हिंसा महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध यह एक ऐसी गम्भीर समस्या है, जो उसे शारीरिक, मानसिक, यौनाचार और आर्थिक रुप से उसकी हत्या करती या अपंग बना देती है ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महिलाओं के विरुद्ध हिंसा का पूरा जीवन क्रम यों उजागर किया है ।
– जन्म पूर्व हिंसा– लिंग चुनाव के लिए भ्रूण हत्या, लिंग जाँच हो जाने पर गर्भावस्था के दौरान औरत पर अत्याचारों क्योंकि जह बालिका शिशु को जन्म देने वाली है ।
– शैशव हिंसा– बालिका जन्म लेते ही उसकी हत्या । इसके साथ ही उसे जन्म देने वाली औरत को दिए जाने वाले शारीरिक, यौन और मानसिक उत्पीड़न ।
– बालिका उत्पीडन– बाल विवाह, यौन और मानसिक उत्पीडन, दुराचारपूर्ण व्यवहार, बाल वेश्यावृत्ति और अश्लील सामग्री तैयार करने के लिए उनका इस्तेमाल ।
– किशोरावस्था और प्रौढावस्था में हिंसा– डेटिंग और सामंती हिंसा (एसिड फेंकना, डेट के दौरान दुष्कर्म करना) गरीबी के कारण मजबूर करके यौनाचार करना । जैसे– लड़कियों द्वारा अपनी फीस के बदले, फीस देनेवाले के साथ यौन सम्बन्ध बनाना । कार्यस्थल पर यौनशोषण, दुष्कर्म, यौन उत्पीडन, जबरदस्ती करवाई गई वेश्यावृत्ति, मानसिक उत्पीडन, बलात करवाया गया गर्भधारण ।
– वृद्ध महिलाओं के साथ हिंसा– आत्महत्या करने के लिए विवश कर देना या आर्थिक कारणों से की गई हत्या यौन, शारीरिक और संवेदना के स्तर पर मानसिक उत्पीड़न ।
जीवन साथी द्वारा की गयी घरेलू हिंसा कभी–कभी महिलाओं की मौत का कारण भी बनती रहती है । नेपाल में घरेलू हिंसा का भड़काने का कारण भी कभी–कभी यह कह सकते हैं–
– पुरुषों की आज्ञा न मानना ।
– उलटकर बहस करना या जवाब देना ।
– पुरुष को गर्लफ्रैंड के बारे मैं पूछताछ करना ।
– पति के अनुमति के बगैर कहीं चली जाना ।
– पुरुषों को सेक्स करने के लिए मना करना ।
– पुरुषों को पत्नी पर विश्वासघाती होने का सन्देह ।
घरेलु हिंसा एक ऐसा अपराध है, जो न तो सही तौर पर रिकॉर्ड किया जाता है और न ही इसकी सही तौर पर रिपोर्ट की जाती हैं । अंततः जब कोई महिला रिपोर्ट लिखाना चाहती है या मदद चाहती है तो पुलिस उसके प्रति उदासीनता का व्यवहार करती है । इसके साथ–साथ महिला का यह भी सत्य है कि शर्म, बदला लिए जाने का भाव, कानूनी अधिकारों की जानकारी न होना, अदालती प्रक्रिया के प्रति विश्वास की कमी या भय, कानूनी कार्यों पर होने वाले खर्च भी ऐसी ही कारण हैं जो घरेलू हिंसा से उत्पीड़ित महिला को रिपोर्ट न लिखवाने के लिए विवश करते हैं ।
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि जो घोषणाएं, पारंपरिक मान्यताएं, धार्मिक विचार, नैतिक मूल्य, महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक या व्यक्तिगत स्थिति पर अत्याचार करती आ रही है, निसन्देह उसे एक दिन में तो समाप्त नहीं किया जा सकता । लेकिन अगर व्यापक पैमाने पर प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक माध्यम इस अभियान में पूरी शक्ति व निष्ठा से साथ दे तो निश्चित ही इस हिंसात्मक हिंसा का अंत हो सकता है ।
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