महिला समस्याओं के प्रति ज्यादा ही गम्भीर हू“

समानुपातिक की ओर से संविधान सभा के सदस्यों के  मनोनयन की बात जब चली तो विशेष रूप से मधेशवादी दलों की बहुत ही चर्चा हर्ुइ । ऐसा आरोप लगा कि मधेशवादी दलों मेंे परिवारवाद हावी है । चाहे नेपाल के स्थापित अखबार हों या आन लाइन या सामाजिक सञ्चाल सभी ने मधेशवादी दलों का मखौल उडÞाया । लेकिन कथित बडेÞ दलों के भीतर में जो परिवारवाद चल रहा है उसकी बात कहीं बाहर नहीं आयी । परिवारवाद के कारण सबसे ज्यादा अगर कोई चर्चा में थीं तो उसमें से एक है- मधेशी जनाधिकार फोरम गणताँत्रिक से समानुपातिक में मनाेनित हर्ुइ सभासद सरिता कुमारी यादव । उम्र के हिसाब से संविधानसभा की संभवतः सबसे छोटी सभासद सरिता का कहना है कि मीडिया ने भ्रामक समाचार परोसा । अपने आपको सक्षम समझनेवाली सरिता ने हिमालिनी पत्रिका से बात करते हुए कहा उन्हंे अपनी जिम्मेवारी का बोध है और वो बखूबी अपनी जिम्मेवारी का निर्वाह भी करेंगी । प्रस्तुत है, कञ्चना झा की सभासद सरिता से हर्ुइ बातचीत का महत्वपर्ूण्ा अंश-

० करीब तीन महीने हो चुके हैं तो कैसा लग रहा है सभासद बनना –
– सभासद वनना अच्छा लगा, अर्थात मैं अपने आप में जिम्मेवारी का बोध कर रही हूँ । मंै जिस समुदाय से सम्वद्ध हूँ उसके लिए कुछ करने की जिज्ञासा बढÞी है । खासकर महिला उसमें भी मधेशी महिला एवं अन्य मधेशियों की समस्याओं को नजदीक से अध्ययन कर उसपर कुछ कर सकने की हैसियत प्राप्त कर चुकी हूँ । और उनके समस्याओं के निदान में अपनी भूमिका निर्वाह कर पाउँ ऐसी इच्छा भी रखती हूँ ।

sarita yadav

सभासद सरिता कुमारी यादव

० राजनीति में तो आपका नाम कहीं चर्चा में नही था, फिर अचानक से आपको पार्टर्ीीे सभासद वना दिया, ऐसा क्यों –
– मैंै बचपन से ही नेपाल की राजनीति के प्रति आकषिर्त रही । संयोग ही कहिये  कि मैं राजनीतिक व्यक्तित्व के साथ ब्याही गई, जहाँ से राजनीतिकर् इच्छा समयानुसार प्रष्फुटित होती गई । मैं पार्टर्ीीध्यक्ष राजकिशोर यादव की केवल गृहिणी ही नहीं अपितु राजनीति में भी सहचर की भूमिका में रही और पार्टर्ीीे कई अहम फैसलों मंे मंैने अपनी अहम भूमिका अदा की  है ।
जहाँ तक अचानक से सभासद वनने का प्रश्न है, तो मैं यही कहँूगी कि मैं मीडिया में ज्यादा नहीं रही । परन्तु दल के प्रत्येक सदस्यों के वीच अपनी भूमिका द्वारा जानी जाती रही । इन्हीं सव बातों का ख्याल एवं अपने दल के तमाम लोगों के सदस्यता एवं सदभाव का सम्मान करते हुए मुझे इस जिम्मेवारी को लेने के लिए आगे आना पडÞा । अर्थात मेरे दल ने र्सवसम्मत से मेरे नाम का प्रस्ताव किया जिसे मैं अस्वीकार नहीं कर पायी ।
० लेकिन पार्टर्ीीे कार्यकर्ता और आम लोगों का आरोप है कि पार्टर्ीींे परिवारवाद हावी है और आपको सभासद बनाने पर काफी आलोचना भी हर्ुइ क्या कहती हैं आप –
– मंै नहीं मानतीं । जहाँ तक रही आरोप की बात तो यह पर्ूण्ातः कपोल कल्पित है । खासकर मिडिया ने भ्रामक समाचार प्रकाशित किया । मेरी पार्टर्ीीे जव एक सुर में मेरा नाम प्रस्ताव किया और मुझ से सभासद बनना स्वीकार करवाया, तो मैं कैसे मान लूँ कि मेरे दल के लोग मेरा विरोध कर रहे हैं । इसलिए मैं मीडिया वालों से ऐसी मिथ्या समाचार प्रकाशित न करने का  अनुरोध करती हूँ ।
० अच्छा ठीक है, अव यह वताईये कि जिस कार्य के लिए आपको भेजा गया है क्या वो कार्य होगा अर्थात एक वर्षमें संविधान वनेगा –
– संविधानसभा में सभासद की भूमिका निर्वाह करने जब आर्इर्र्हूँ तो निश्चय ही संविधान बनाना हमारा ध्येय होगा । वैसा संविधान जिसमें अभी तक वहिष्कृत समुदाय अर्थात मधेशी, जनजाति, दलित, महिला आदि के अधिकारों की सुनिश्चितता हो । ऐसा संविधान बनाने में मैं बढÞचढÞ कर अपनी भूमिका निभाउँगी । परन्तु ये बडÞे दल अर्थात नेपाली काँग्रेस और एमाले पर निर्भर करता है कि वे संविधान वनाने एवं बहिष्कृत समुदाय को अधिकार दिलाने के प्रति कितनर्ेर् इमानदार हैं । मैं बहिष्कृत समुदाय के अधिकार युक्त संघीयता सहित के संविधान वनाने मंे अहम भूमिका निर्वाह कर सकती हूँ ऐसा मेरा विश्वास है ।
० आपकी पार्टर्ीीो वहुत छोटी पार्टर्ीीै संविधान सभा में उसकी क्या भुमिका रहेगी –
– मैं और मेरा दल जिन मुद्दों पर आधारित राजनीति कर रही है उन मुद्दों से समझौता की संभावना वहुत ही क्षीण है । जिन मुद्दो के साथ मैं हुँ वही मुझे बल प्रदान करता रहेगा । हाँ अगर हमारी संख्या अधिक होती तो मुझे कुछ अधिक वल जरूर मिलता । खैर मैं अकेली नहीं अपितु मुद्दों के साथ संविधान वनाने में अपनी अहम भूमिका निर्वाह करुँगी ऐसा मुझे भरोसा है । यदि कहीं से भी मुद्दे पर आधारित बर्ेइमानी नजर आयी तो एक विराँगना की भाँति सडÞक आन्दोलन के लिए भी तैयार हूँ ।
० अव वात करें महिला की, देश की आधी जनसंख्या का आप प्रतिनिधित्व करती हैं वास्तव में  नेपाल मंे महिला पीछे है । समस्या कहाँ और आपके हिसाव से समाधान क्या हो सकता है –
– स्वयं भी महिला होने के कारण मैं महिला समस्याओं के प्रति ज्यादा ही गम्भीर हूँ इसलिए इसे मैं कुछ ज्यादा संजीदगी से अध्ययन कर रही हूँ ।
पुरुष प्रधान समाज ने अभी तक महिला को उपभोग की वस्तु की तरह प्रयोग किया है । जबकि उसका उपयोग होना चाहिए था । क्योंकि महिला जननी है तो उसे अपने जन्मित को संवारना वढÞाना अच्छी तरह आता हैं । परन्तु इस पुरुष प्रधान और कुण्ठित समाज ने ऐसा नहीं होने दिया ।
मेरी समझ में आरक्षण के द्वारा महिलाओं को उपर लाया जा सकता है । क्योंकि नेपाल की आधी आबादी महिला की है ।  इसलिए इसे कुछ निश्चित कालखण्ड के लिए ५० फीसदी आरक्षण के द्वारा ही एक सम्मानित जिन्दगी दी जा सकती है । खासकर निर्ण्ाायक जगहों पर तो उसकी आधी उपस्थिति को अपरिहार्य बनाना होगा । ताकि वो अपनी समस्यायों को पूरे जोर पर्ूवक निर्ण्र्ााकराकर उस पर अमल कर सके या करा सके । पैत्रिक सम्पत्ति या सम्पत्ति का मालिकाना हक महिलाओं में स्वयं बोधजन्य होगा । अतः सम्पतियों पर जव उसे पुरुषों के भाँति हक प्राप्त होगा तो वह स्वयं में अधिकार एवं जिम्मेवारी दोनो का बोध कर पायेगी ।
ऐसा करने के लिए सिर्फकागजी कानून नहीं बल्कि उसपर अमल की भी आवश्यकता होगी । इसके लिए महिलाओं को स्वयम् आगे आकर इसमें हिस्सेदारी के लिए  अपनी भूमिका निर्वाह करनी होगी ।
० अगर मधेशी महिला की बात करें तो हालात और भी वदतर है, वहाँ क्या समस्या है और उन लोगों को मुलधार में लाने की आपकी योजना क्या है –
– जहाँ तक मधेशी महिला का सवाल है तो जव समग्र मधेश ही पिछडÞा हुआ है तो मधेशी महिला का अति पिछडÞा होना अस्वभाविक नहीं है । मैं उन्हंे ऊपर लाने के लिए वहुत सारे उपायों का प्रयोग एवं अध्ययन दोनो कर रही हूँ । मधेशी महिलाओं में शिक्षा का अधिक से अधिक विकास हो । इसके लिए उन्हे शिक्षा के प्रति आकषिर्त करना होगा । विगत में हमारी पार्टर्ीीे महिलाओं को र्साईकिल के बहाने शिक्षा के तरफ उन्मुख किया। शिक्षा के साथ उन्हें रोजगारी मूलक कार्यक्रम द्वारा स्वावलम्वी वनाना आवश्यक होगा ताकि परिवार निर्माण में महिला को अहमियत मिले । आज पुरुष वर्ग आय आर्जन के आधार पर अपनी प्रधानता काबिज किए वैठा है । अतः महिलाओं को स्वावलम्वी वनाना आवश्यक है । इसके द्वारा परिवार के हर निर्ण्र्ााप्रक्रिया में उसकी भूमिका अहम होगी । तो घर से निकलकर समाज होते हुए वह राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम् भुमिका निर्वाह करेगी । इस तरह महिला घर निर्माण से लेकर समाज के सामाजिक एवं राजनीतिक भलिभांति गुजरते हुए राष्ट्र के निर्माण में अपनी अहम राजनीतिक भूमिका निर्वाह कर सके और उस तहत के मधेशी महिलाओं को लाया जा सके ऐसी मेरी सोच है और मैं उस ओर अपनी कदम वढा चुकी हूुँ ।
० वैसे तो आप समानुपातिक के तरफ से संविधानसभा मे आयी है तो भी आपके जिला के विकास के लिए आपकी क्या योजना है –
– मैं अपने संसदीय कोष का उपयोग या सदुपयोग कुछ इस तरह करने जा रही हूँ ।
क. कृषिको उन्नत वनाना अर्थात अपने जिले मंे सिंचाई एवं अन्य कृषि सुविधा को बनाने मंे प्रयोग ।
ख. हर वर्ग एवं समुदाय के लोगों में शिक्षा प्रदान करायी जाये । यदि अर्थाभाव में कोई वच्चा शिक्षा से वंचित हो तो उसे छात्रवृत्ति देकर हो या जैसे भी हो शिक्षित वनाना हमारा ध्येय है ।
ग. आज इस संचार के युग में हर व्यक्ति को संचार के पहुँच मंे लाकर उन्हें  नये विकास से अवगत कराते हुए अपने जिले में उसे व्यवहार में लाना हमारा ध्येय है । इसके लिए हमने स्वरोजगार अर्थात सिलाई बुनाई, पशुपालन, कृषि व्यवसाय, तरकारी खेती जैसे माध्यमों से रोजगार की ग्यारेन्टी करने जा रही हूँ ।
अर्थात अपने सभाषद कोष को अपव्यय न होने देकर उसका अधिकतम प्रयोग करने का कार्यक्रम बना चुकी हूँ । जब यथार्थ के धरातल पर मैं अपने कार्यों को अमल मंे लाउँ तो कृपया आप मीडिया वाले मुझे प्रोत्साहन स्वरूप मेरा हाल जरूर पूछें यही मेरी आपलोगों से विनम्र अनुरोध है ।

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