महिला सशक्तिकरण का मूलमन्त्र शिक्षा और आत्मनिर्भरता

राजलक्ष्मी गोल्छा अर्थात जानीमानी उद्योगपति । लेकिन पिछले संविधानसभा के निर्वाचन के बाद उनकी एक नई पहचान बनी है  । वह संविधानसभा में एमाले की तरफ से समानुपातिक सभासद के लिए मनोनीत हर्ुइ । यद्यपि गोल्छा का नाम मनोनयन होने के बाद  एमाले में भी विभिन्न तरह की टीका टिप्पणी हर्ुइ थी । एक बार तो ऐसा भी हुआ कि उन्होंने संविधानसभा सदस्य बनना अस्वीकार भी कर दिया । लेकिन समय के साथ सब कुछ ठीक हो गया । व्यापारिक समूह गोल्छा अर्गनाइजेसन की निर्देशक राज लक्ष्मी मद्रास विश्व विद्यालय से ललित कला मंे स्नातकोत्तर हंै । इसके अलावा वह रुसी भाषा में एडभान्स डिप्लोमा, हिन्दी भाषा में विशारद, एलिमेन्टरी एजुकेसन में डिप्लोमा, प्रि प्राइमरी एजुकेसन में डिप्लोमा, होमियोप्याथी में डिप्लोमा, आइ केयर मेनेजमेन्ट में डिप्लोमा, इन्भाइरमेन्ट एन्ड इकोलोजी एजुकेसन मेंं डिप्लोमा जैसे और विभिन्न विधा में डिप्लोमा की हंै । इसके अलावा दर्जनौं संघ संस्था में वह निर्देशक रही हैं । सभासद गोल्छा की उद्योग से राजनीतिक यात्रा और भविष्य की योजना के बारे में हिमालिनी प्रतिनिधि कञ्चना झा ने लम्बी बात चीत की थी । प्रस्तुत है राज लक्ष्मी गोल्छा से की गयी बातचीत का अंश-
० एक जानी-मानी उद्योगपति और अब एक सभासद, कैसा अनुभव हो रहा है –

rajya laxmi golchha

राजलक्ष्मी गोल्छा

-उद्योगपति तो हर इंसान होता है । और ये कोई बडÞी बात है भी नहीं ,लेकिन जहाँ तक सभासद बनने की बात है, तो सबसे खुबसूरत लम्हा या कहें कि सुनहरा मौका है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है ।
० उद्योग से लेकर राजनीति तक की यात्रा, कैसे सम्भव हर्ुइ – क्या पहले से ही राजनीति में आने की इच्छा थी –
-उद्योग से राजनीति तक की यात्रा, सच कहूँ तो मंैने सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी राजनीति में आऊँगी । वैसे मायके में राजनीतिज्ञों का घर में आना जाना था लेकिन मेरी कभी रुचि नहीं रही थी राजनीति में और सच कहूँ तो आना भी नहीं चाहती थी । मैं तो इसे चमत्कार ही मानती हुँ । लेकिन समाजसेवा जरूर करना चाहती थी ।
० संविधानसभा सदस्य के लिए जब नेकपा एमाले ने आपका नाम सिफारिश किया था तो आपने अस्वीकार कर दिया था ।  अस्वीकार करने की कोई वजह –
-सही  कहूँ तो, मेरी पृष्ठभूमि राजनीतिक नहीं थी इसलिए आत्म विश्वास की भी कमी थी , शायद मैं अपने-आपको इसके लिए तैयार नहीं कर पा रही थी । इसलिए अस्वीकार कर दिया था ।
० लेकिन फिर अचानक आपने स्वीकार कर लिया –
-मैंने महसूस किया कि यह एक अच्छा अवसर हो सकता है क्योंकि मन में समाज सेेवा की बहुत चाह थी । खासकर माडÞवाडÞी और मधेशी समुदाय की महिला की अवस्था को देखकर उन लोगों के लिए कुछ करने का मन होता था । इस समुदाय की अधिकांश महिला अभी भी घंूघट में ही रहती है, चारदिवारी से बाहर नहीं निकलती । मुझे लगा मंै एक उदाहरण बनूं, कम से कम मुझे देखकर भी दो चार महिला साथी आगे आएँगी ।
० फिलहाल आप सभासद हैं, और आप पर बहुत बडÞी जिम्मेदारी है, संविधान बनाना । तो कब तक मिलेगा जनता को संविधान –
-सभी चाहते हंै कि जल्द से जल्द संविधान बने, छोटे-छोटे मसलांे पर विवाद है जिसे सुलझाने का प्रयास भी किया जा रहा है । मुझे तो लगता है तय की हर्ुइ समय सीमा के अन्दर ही संविधान बनेगा ।
० लेकिन राजनीतिक दल के बीच संघीयता, शासन प्रणाली जैसे बहुत सारे मुद्दों पर जबरदस्त विवाद है, ऐसे में कैसे सम्भव है संविधान –
-निश्चित रूप से कई मुद्दों पर विवाद हैं । लोकतन्त्र का सबसे बडा गुण भी यही है कि सभी अपना विचार खुलकर रख सकते हैं । अभी संविधानसभा में  विवादित मुद्दों पर बहस चल रही है और मुझे लगता है जिस अपेक्षा को लेकर जनता ने प्रतिनिधि बनाकर संविधानसभा तक पहुँचाया है उन लोगों की भावनाओं की कद्र करते हुए नेतागण जल्द से जल्द संविधान निर्माण करेंगें ।
० अब बात करें महिला की, आप तो स्वयं एक महिला है, आपके विचार से क्या है अभी नेपाल में महिलाओं की अवस्था –
– नेपाल की महिला की बात करें तो कुछ मामले में वे पीछे हंै । लेकिन उनकी अवस्था इतनी भी दयनीय नहीं जितना दर्शाया जा रहा है । सामाजिक और पारिवारिक संरचना के कारण कुछ समस्याएँ हैं, जो कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता से धीरे-धीरे खत्म होती जायेगी ।
० नेपाल में महिला की अवस्था दयनीय होने का दोष किसको देती हैं आप – महिला को आगे लाने के लिए क्या करना होगा –
– दोष समाजिक संरचना का है । नेपाल के अधिकांश भू भाग या जातजाति में पुरुष की प्रधानता है । वो नहीं चाहते है कि महिला आगे आये । दूसरी बात महिला की अवस्था के लिए वे खुद भी जिम्मेदार हैं । खास कर पिछले पीढÞी की महिला खुद कुछ नहीं कर पायी इसलिए वे अपने से बाद वाले पीढÞी को भी कुछ करने नहीं देती । यदा कदा कोई महिला आगे जाने की बात करती हैं तो खुद महिला ही टाँग खिंचना शुरु कर देती हैं ।
० खास कर देखा जाय तो मधेशी महिला की अवस्था और भी दयनीय है । उनको विकास के मूलाधार में लाने की क्या योजना है आपकी –
– सबसे बडÞी बात है शिक्षा । शिक्षा को घर-घर तक पहँुचाना होगा, और इस तरह से विकास की स्थिति बनती चली जाएगी ।  । बहुत बडÞी बडÞी बात तो मैं नहीं करुंगी, मेरा बस इतना प्रयास रहेगा कि घर-घर अर्थात हर महिला शिक्षित हो इसके लिए मैं अपने तरफ से प्रयास करुंगी और सरकार पर भी इस अभियान के तहत आगे बढने के लिए दबाव बनाना चाहूँगी ।
० आप तो उद्योग व्यापार से संबन्ध रखती है, अभी देखा जाय तो नेपाल के अधिकांश उद्योग बन्द हैं और जो सञ्चालन में है वह भी उत्साह जनक परिणाम नहीं दे रहे हैं – कौन है जिम्मेवार –
– इसके लिए सभी पक्ष जिम्मेवार है, सरकार, उद्योगी और मजदूर सभी । देश में औद्योगिक वातावरण बनाने का जिम्मा सरकार का है लेकिन  पिछले पाँच वर्षसे ऊर्जा संकट है, और सरकार मौन है । ऊर्जा के कारण उद्योग-धन्दा, कल-कारखाना धारासायी हो रहे हैं । उद्योगी की बात करें तो वे भी कामदार को अपने परिवार का अंग नहीं मानते । उनका पारिश्रमिक तक देने से मुकर जाते हैं और कामदार की बात करें तो वो भी बन्द हडÞताल में लगे हुए हैं ।
० देश में औद्योगिक वातावरण बने इसके लिए आपकी ओर से किस योगदान की अपेक्षा करें आम लोग –
– मेरा यह प्रयास रहेगा कि उद्योगी और कामदार के बीच संबन्ध अच्छा हो । उद्योग सञ्चालक हो या मजदूर सभी की प्रतिष्ठा है और मैं सभी उद्योगियों से मजदुरों की प्रतिष्ठा को कद्र करने का  आग्रह करुंगी ।
० उद्योगपति से सभासद……..अब आगे क्या –
– -हंसती हर्ुइं ) इतनी ही इच्छा है कि मैं इतना अच्छा काम करूँ कि मेरेे जाने के बाद भी लोग मुझे मेरे अच्छे काम को लेकर याद करें ।

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