मां को बच्चे को पहचान दिलाने का अधिकार होना चाहिए

पद्मिनी प्रधानांङ, अध्यक्ष
सशक्ति नेपाल
हमारे देश की महिलाओं की मानसिकता आज तक बदली नहीं है । आज भी कई महिला ऐसी हैं, जो यह सोचती हैं कि हम बेटी क्यों पैदा करें ? बेटी पैदा करने पर जब हमें समाज में, परिवार में सम्मान न मिले तो हमें बेटी पैदा करनी ही नहीं चाहिए । ऐसी है इस समाज की व्यवस्था । अंतरिम संविधान ने एक उम्मीद जगाई थी कि हमें पुरुष प्रधान समाज से मुक्ति मिलेगी इस उम्मीद को भी वर्तमान संविधान ने तोड़ा । निर्वाचन क्षेत्र में भी

पद्मिनी प्रधानांङ, अध्यक्ष सशक्ति नेपाल

पद्मिनी प्रधानांङ, अध्यक्ष
सशक्ति नेपाल

हमारी सहभागिता की कटौती की गई है । सच तो यह है कि इस संविधान ने महिलाओं को मनुष्य की गिनती में ही नहीं रखा है । माँ बच्चे को पैदा करती है इसलिए माँ को ही अपने बच्चे को पहचान दिलाने का अधिकार होना चाहिए । लेकिन हम बच्चे पैदा तो कर सकते हैं किन्तु उसे अपने नाम से समाज या देश में स्थान नहीं दिला सकते । नागरिकता के सवाल पर भी पुरुष को जो अधिकार दिया गया उसी अधिकार से महिला को वंचित कर दिया गया । बहु को अधिकार है क्योंकि बेटा उसे ब्याह कर लाता है किन्तु दामाद को यह अधिकार नहीं है क्योंकि बेटी उसे ब्याह कर लाती है । ऐसे विभेदपूर्ण नीति को लेकर आज का संविधान आया है । सम्पत्ति के अधिकार में भी हमें पीछे कर दिया गया । बेटी को शिक्षा दो उसे सम्पत्ति क्यों देना यह धारणा हमारे समाज में है । समानुपाती का भी कोई मतलब नहीं है आज के संविधान में वह सिर्फ दिखावा भर है । सभी क्षेत्र में महिला के कोटा को हटा दिया गया है । यह संविधान पूरी तरह महिलाओं के हक के विरुद्ध है ।

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