माघ गुप्त नवरात्र आज से ०६ फरवरी २०१७ तक रहेगी : आचार्य राधाकान्त शास्त्री

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आचार्य राधाकान्त शास्त्री, बेतिया , २८ जनवरी | माघी गुप्त नवरात्री 2017 :-शास्त्रों से नवरात्र में मां दुर्गा की साधना के लिए अति महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्र के समय साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्र  विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र  कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है।
गुप्त नवरात्र 2017
माघ गुप्त नवरात्र २८जनवरी २०१७ से लेकर ०६ फरवरी २०१७ तक रहेगी।
गुप्त नवरात्र पूजा विधि
मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र में अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन करना चाहिए।
गुप्त नवरात्रि का महत्त्व
देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।
गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।
गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां
गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजन करते हैं ।
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माघी गुप्त नवरात्री 2017 कार्य क्रम  :-
28 जनवरी 2017 ( शनिवार ) घट स्थापना, शैलपुत्री पूजा
29 जनवरी 2017 ( रविवार ) द्वितीया ब्रह्मचारिणी पूजा
30 जनवरी 2017  ( सोमवार ) तृतीया चंद्रघंटा पूजा
31 जनवरी 2017 ( मंगलवार) चतुर्थी कुष्मांडा पूजा
01 फरवरी 2017 ( बुधवार ) पंचमी स्कंदमाता पूजा
02 फरवरी 2017 ( गुरुवार) षष्ठी कात्यायनी पूजा
03 फरवरी 2017 ( शुक्रवार) सप्तमी कालरात्रि पूजा
04 फरवरी 2017 ( शनिवार ) अष्टमी महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा,
05 फरवरी 2017 ( रविवार ) नवमी  सिद्धिदात्री पूजा
06 फरवरी 2017 ( सोमवार ) दशमी नवरात्री परायण
यह है घट स्थापना का समय
माघ गुप्त नवरात्री का पहला दिन इस बार कल यानि 28 जनवरी शनिवार से पड़ रहा है। इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 09:33 बजे से 10:47 बजे तक है।
यह है कलश स्थापना सामग्री :-
नवरात्रि के लिए मिट्टी का पात्र और जौ, शुद्ध, साफ मिट्टी, शुद्ध जल से भरा हुआ सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश, मोली (कलवा), साबुत सुपारी, कलश में रखने के लिए सिक्के, फूल और माला, अशोक या आम के 5 पत्ते, कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन, साबुत चावल, एक पानी वाला नारियल, लाल कपड़ा या चुनरी की आवस्यकता होती है।
ऐसे करें कलश स्थापना
नवरात्रि में कलश स्थापना करने के दौरान सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लें।
लकड़ी की चौकी रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
कपड़े पर थोड़े-थोड़े चावल रखें।
चावल रखते हुए सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें।
एक मिट्टी के पात्र में जौ बोयें।
इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।
कलश पर रोली से स्वस्तिक या ‘ऊँ’ बनायें।
कलश के मुख पर कलवा बांधकर इसमें सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखें।
कलश के मुख को चावल से भरी कटोरी से ढक दें।
एक नारियल पर चुनरी लपेटकर इसे कलवे से बांधें और चावल की कटोरी पर रख दें।
सभी देवताओं का आवाहन करें और धूप दीप जलाकर कलश की पूजा करें।
भोग लगाकर मां की पूजा करें। माँ जगदम्बा आप सबकी सभी मनोकामना पूर्ण करें , आप सबके लिए माघी गुप्त नवरात्री शुखद शुभद एवं मंगलमय हो ,
radhakrishna shastriआचार्य राधाकान्त शास्त्री, बेतिया, बिहार, भारत।
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