मानव अधिकार उलंघनकर्ता अब ‘ब्लैकलिष्ट’ में, देखिए कौन–कौन पड़ सकते हैं– ‘ब्लैकलिष्ट’ में

काठमांडू, १२ भाद्र ।
गम्भीर प्रकृति की मानव अधिकार उलंघनकर्ता को अब ‘ब्लैकलिष्ट’ में रखने की तयारी की गई है । राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने ऐसा तयारी किया है । आयोग का कहना है कि राजनीतिक पहुंच के आधार में गम्भीर प्रकृति के मानव अधिकार उलंघनकर्ताओं को भी मंत्री तथा अन्य उच्च पद दिया गया है, यह आपत्तिजनक है । आज प्रकाशित नयाँ पत्रिका दैनिक में यह समाचार है । आयोग ने मानव अधिकार उलंघन करने वाले करिब दो सौ व्यक्तिओं को कारवाही के लिए सरकार से सिफरिस किया था । लेकिन कारवाही सिफारिस में पड़नेवालों में से कई लोगों को सरकार ने पदोनन्नति करके अथवा नयां पद देकर पुरस्कृत किया है । इसीलिए आयोग ने ऐसे लोगों को ‘ब्लैकलिष्ट’ में रखने की तैयारी किया है ।
स्मरणीय है, माओवादी द्वन्द्व काल में भैरवनाथ गण से ४९ बंदी को बेपत्ता करने वाले तत्कालीन सेनापति प्याराजंग थापा सहित ३३ जिम्मेवार अधिकारियों को आयोग ने कारवाही के लिए सिफारिस किया था । लेकिन उक्त सिफारिस अभी तक कार्यान्वयन में नहीं आया है । अर्जुन लामा के हत्या प्रकरण में पूर्व राज्य मंत्री सूर्यमान दोङ, जनकपुर के पाँच विद्यार्थियों का हत्या और वेपत्ता प्रकरण में तत्कालीन धनुषा जिला के डिएसपी कुबेरसिंह राना, भिमान व्यारेक में कार्यरत तत्कालीन मेजर अनुप अधिकारी, धनुषा के तत्कालीन प्रमुख जिला अधिकारी रेवतीराज काफ्ले, तत्कालीन एसएसपी चुडाबहादुर श्रेष्ठ लगायत को भी कारवाही के लिए सिफरिस किया गया था । लेकिन उन सभी लोगों को अभी तक कारवाही नहीं किया गया है । ऐसी कई घटना हैं, जिसमें मानव अधिकार का गम्भीर उलंघन किया गया है, लेकिन उसमें संलग्न व्यक्ति तथा सरकारी अधिकारी को अभी तक कारवाही नहीं हो रहा है । आयोग ने दावा किया है कि अब उन सभी को ‘ब्लैकलिष्ट’ में रखा जाएगा ।

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