मान लिया जाय कि राम सेतु की जगह राम को नेपाल में संविधान बनाना होता तो ?

nepali-ramayan |

तब क्या नजारा होता ? कुछ ऐसा ही होता ..
सिपु

मुरलीमनोहर तिवारी

राम बड़े हैरान परेशान से इधर उधर टहल रहे थे, समन्दर देवता (सुवास चन्द्र नेङवाङ) भी कुछ कोआपरेट नही कर रहे, लक्ष्मण ने भाई से पूछा “क्या लोचा है बिग ब्रदर ?” राम ने दुखी अवस्था में कहा   “समन्दर देव हमारी सुन ही नहीं रहे, इनको डोज देना ही पड़ेगा ।” इतना कहकर उन्होंने अपने हाई टेक धनुष बाण (किसी ट्रक का पुराना टायर) को उठाया और सड़क पर जला दिया । युद्ध (आंदोलन) शुरू । अब तो मोमबत्ती थामकर भी क्रांति होने लगती, यह काम भगत सिंह जाने कब का कर गए होते । आज भगत सिंह जहां कहीं से भी इन मोमबत्ती क्रांतिकारियों को देख रहे होंगे, उन्हें अपनी क्रांति पर अफसोस हो रहा होगा ।
समन्दर ने मांडवली से बीच का रास्ता निकालते हुए राम को सेतुपुल (संबिधान) बनाने का सुझाव दिया । ये सुझाव हजार बवालों की जड़ थी । सेतु (संबिधान) बनाने के सुझाव को एक्सेप्ट ही नहीं करना चाहिए था । किसी भी विकसित देश अमेरिका, स्विट्जÞरलैंड या भारत का ही संविधान माँग लेते तो लपÞmड़ा ही खत्म हो जाता । अब सेतु का मसला गम्भीर है इसलिये अलग अलग सरकारी विभागों से नो आब्जेक्शन सर्टि्पिÞmकेट लेना पड़ेगा ।
जब सेतु बनने की बात पÞmैली तो सबसे पहले ग्रीनपीस (यु एन) वाले आये । वो अपनी बोट लेकर  किनारे कैम्पिंग कर दिये, बोले हम इस पुल के निर्माण प्रोसेस का अध्ययन करेंगे और इन्श्योर करेंगे कि इससे पर्यावरण (विदेशी शक्ति) पर कोई खतरा तो नही है।
अभी इस पंगे से बाहर निकले ही थे, तो मछुवारों का एक गैंग (माओवादी ) सामने आया और बोला कि पुल नही बनना चाहिये, नही तो समन्दर के इस हिस्से में मछलियों का अकाल पड़ जायेगा । इसलिये हम पुल के बनाने का विरोध करते हैं, पिÞmर वही रोजाना धरना प्रदर्शन । अब निगोशियेशन करके आउट आपÞm कोर्ट सैटिलमेन्ट किया गया ।
अब मसला था, विभागों से एनओसी लेने का । निर्माण विभाग के सैक्रेटरी जोली बाबू पÞmाइल पर कुन्डली मारकर बैठ गये, बोले यहाँ मजबूत पुल बना तो पानी को नुकसान पहुँचायेगा । पिÞmर नुकसान भरपाई के लिए उन्हें अगले सरकार का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया।
अब सुरक्षा विभाग(कांग्रेस) से एप्रोवल लिया जाय, क्योंकि पुल अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से बनेगा । उसे भी रॉयल्टी दिया गया । फिर मजदूर संगठन(मधेशी) ने भी प्रोटेस्ट दर्ज करवा दिया बोले कि ये पुल तो बहाना है, इसका लक्ष्य मुल्क के शान्त माहौल को बिगाड़ना है । हमारी मजदूरी बढ़ानी पड़ेगी । यूनियन के लीडरों को भी गोप्य कमीशन दिया गया ।
राम की समस्याएँ बढती जा रही थी, एक के बाद एक नये पंगे सामने आते जा रहे थे । इधर एक विभाग से एप्रुवल मिलता तो दूसरा विभाग टांग अड़ा देता, किसी तरह से सभी से एप्रोवल प्राप्त किया गया तो एक मनचले ने जनहित याचिका दायर कर दी, और कहा कि राम की सेना के पास तो क्वालीपÞmाइड आर्किटेक्ट ही नही है, नल और नील ने तो किसी यूनिवर्सिटी से डिग्री नही ली, पता नही किसी किश्किन्धा यूनिवर्सिटी से पार्ट टाइम, पत्राचार कोर्स किया है । इसलिये इतने बड़े पुल का काम दो नौसिखियों के हाथ मे नही दिया जा सकता । अब रामजी पिÞmर से परेशान हैं ।
आखिरी समाचार मिलने तक, राम की सेना डेरा डाले हए है, इस बार उनकी  सेना में सिर्फ वानर ही नहीं है गिद्ध, कौआ, सियार, भी हैं ।  जिन्हें अकाल, भूचाल, दुःख, रुदन लाशों का पूर्वाभाष है । राम जी इसे रोकना चाहते है पर विभाग और एनजीओ दारु पर दारु पिये जा रहे हैं, पिÞmशिंग कम्पनी मछलियां पकड़े जा रही है । किसान इन्तजार में है कब सेतु बनेगा की बाढ़ और सुखाड़ से मुक्ति मिलेगी । गरीब इस आश में है कि सेतु बनेगा तो फसल अच्छी होगी, भरपेट भोजन मिलेगा । व्यापारी सेतु बनने पर व्यापार मार्ग खुलने के इन्तजार में हैं ।
रामजी ने सभी के साथ विचार विमर्श किया । सबका तर्क आया हम गरीब देश है । हमारी गरीबी पर ही डॉलर मिलता है । किसी भिखारी को अच्छे कपड़ो में भीख नहीं मिलती । हमें भी गरीबी बरकÞरार रखनी पड़ेगी । इसलिए ये सेतु(संविधान) बनना नहीं चाहिए सिर्फ बनते हुए लगना चाहिए । अगर बन भी जाए तो टिकना नहीं चाहिए । यहाँ राम भी बेकाम हंै । कोई आइडिया सोचने के लिए राम को आराम की सलाह दी गई है । आपके पास है क्या कोई आइडिया

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