मिथिलाञ्चल में जानकी नवमी अब धूमधाम से

नवीनकुमार नवल:सीतामढÞी/वैसे तो राम नवमी -चैत्र नवमी) सदियांे से राम जी के जन्म उत्सव के रूप में हिन्दू धर्मावलम्बी समुदाय मनाते आ रहे हंै । जो अयोध्या के साथ सीतामढÞी जनकपुरधाम में विशेष रूप से मनाया जाता है । साथ ही इस बार पटना के हनुमान मन्दिर मे ५० हजार भक्तो नंे २ लाख का नैवेद्य चढÞाकर पटना के ५० जगहों से झाँकी निकालकर रिकार्ड बना डाला तो गौण रूप से मनानेवाला जानकी नवमी -बैशाख नवमी) विगत कई वर्षों से दिन प्रतिदिन धूमधाम से मनाया जा रहा है । माँ सीता का जन्म बैशाख नवमी को हुआ था इसीलिए इसे जानकी जन्म उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है । इधर सीतामढÞी के पुनौरा धाम में २००र्०र् इ.स. से तत्कालीन डी.एम. भूषण प्रसाद के विशेष सहयोग से धार्मिक पर्यटकीय स्थल बनने के वाद जानकी नवमी पुनौराधाम में बडÞी भव्यता के साथ प्रत्येक साल जिला के डि. एम., एस.पी., व्यापारी एवं आम नागरिक के सहयोग से मनाया जा रहा है ।
पिछले साल जानकी नवमी के अवसर पर पुनौराधाम -सीता जन्म स्थल) मे १० दिवसीय श्री सीताराम महायज्ञ से जुडÞे कई अनुष्ठान, नगर परिक्रमा आदि सम्पन्न हुआ । जिसमे श्री राम भद्राचार्य का प्रवचन काफी सराहनीय रहा । जिसमे वर्तमान डि.एम. डा. प्रतिमा जी का काफी योगदान था । लेकिन इसवार लोकसभा चुनाव जानकी नवमी से एक दिन पहले -७ मई) होने की वजह से समान्य रूप से मनाया गया । लेकिन उत्साह उतना ही देखा गया था । इस सबसे कुछ हटकर देखा जाए तो सीतामढÞी एवं जनकपुरधाम के मध्य स्थित भिठ्ठामोडÞ बोर्डर से आधा कि.मी. उत्तर जलेश्वर नगरपालिका वडा नं. १२ मे स्थित मलिवारा कुट्टी से जानकी नवमी मनाने की परम्परा ९० वर्षपुराना बताया गया है । जहाँ प्रत्येक वर्षवैशाख नवमी के दिन जानकी जी -किशोरीजी) का डोला मलिवारा कुट्टीसे महन्थ के सञ्चालन मंे सम्पर्ूण्ा गाँव के महिला पुरुष के साथ भिठ्ठामोडÞ होते हुए नौवाही -भारत) गाँव मे भिठ्ठामोडÞ सीतामढÞी मुख्य सडÞक पर नौवाही मठ से लायी गई जानकी जीका डोली का मिलन होता है । जिसमंे लगभग २५ गाँव के पुरुष महिला का भव्य मेला ४ः०० बजे  शाम मे लग जाता है । मलिवाडÞा कुट्टी पहले श्मसानवाला जगह था । जिसमे ९० वर्षपहले श्री श्री १०८ महावीर शरण जी महाराज -भजनीया बाबा) जी ने मन्दिर बनाकर जानकी जन्म उत्सव की शुरुआत की जो अभी तक उनके शिष्य द्वारा प्रत्येक वर्षमनाया जा रहा है । इस वर्षभी जानकी नवमी के शुभ अवसर पर मलिवाडा मठ मे १० दिवसीय रामनाम सँग कर्ीतन महायज्ञ एवं रामचरित्र मानस महायज्ञ के साथ श्री जानकी जन्म बधाई कार्यक्रम १० दिन तक चलता रहा वैशाख नवमी के दिन जानकी जी के डोला को लेकर गाजा बाजा सहित सैकडÞों मुनी महात्मा के साथ नौवाही – भारत ) मे जाकर मिलन समारोह किया गया । जिसमे वर्तमान मलिवाडा कुट्टी -जानकी दुल्हकेली कुंज) के महन्थ पन्डित भरत शरण शास्त्री जी के द्वारा भव्य व्यवस्था के साथ सभी कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । अभी मलिवाडा कुट्टी ४-५ बीघा में अवस्थित है । जिसमे जानकी मन्दिर १ पोखरा, १ धर्मशाला एवं स्व. प्रीतमशरण जी महाराज के स्मारिका मण्डप एवं बाग बगीचा के रूप में सुशोभित है । जिसमे जनकपुर वृहत्तर विकास के सहयोग से ३ लाख का पोखर घाट ४ लाख का धार्मिक पुस्तकालय भवन एवं ५ लाख से बाउण्ड्रीवाल का काम चल रहा है ।
निकट भविष्य में विशेष ध्यान दिया जाय तो यह कुट्टी जानकी नवमी महोत्सव के साथ नेपाल भारत के धार्मिक सँस्कृति के धरोहर के रूप मंे उदाहरण बन सकता है साथ ही पर्यटकीय स्थल के रूप में जाना जाएगा । क्योंकि जानकी जन्म उत्सव बैशाख नवमी सीतामढÞी जनकपुर के साथ मलिबाडा कुट्टी को भी प्रसिद्ध माना जा रहा है । वैसे राम नवमी की तरह जानकी नवमी मनाना उतना ही शुभ फलदायी माना जाएगा । इधर मिथलाञ्चल में लडÞके के जन्म उत्सव को लोग ज्यादा महत्व देते हैं तो बेटी के जन्म उत्सव मनाने की परम्परा को भी बल मिलेगा । पहले जानकी नवमी गौण रूप से मनाया जाता था । लेकिन अब धूमधाम से मनाने की वजह से लोग इसके महत्व को जानने लगे हैं । वैसे जिस मिथिला की धरती पर बेटी स्वरूप माँ जानकी जी का जन्म हुआ हो उसका जन्म उत्सव मनाना सौभाग्य की बात है तो क्यों न राम नवमी की तरह जानकी नवमी मनाकर इस धार्मिक परम्परा को कायम रखा जाय ।

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