मुर्बई में “मिथिला राज्य”:करुणा झा

मैथिली परिषद मुर्बई द्वारा मैथिली सम्मेलन भव्यतापर्ूवक मुर्ंबई मे मनाया गया । अन्तर्रर्ट्रय मैथिली परिषद, मुर्ंबई द्वारा दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया । २९ तथा ३० जनवरी मुर्ंबई के मुलुंड में भारत के विभिन्न प्रान्तों से आये तथा नेपाल के मैथिली प्रेमी लोगों का भव्य सम्मेलन का आयोजन अन्तर्रर्रीय मैथिली परिषद, मुर्ंबई के अध्यक्ष चक्रधर झा जी द्वारा किया गया ।
इस कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि मुर्ंबई के भाजपा अध्यक्ष राज के. पुरोहित ने कहा- मिथिलावासियों द्वारा अलग मिथिला राज्य की मांग जायज है और ये मांग पूरी भी होनी चाहिए । भाषा के आधार पर भारत में बुहत सारे राज्य पहले भी बन चुके हैं । मैथिली भाषा बहुत पुरानी भाषा है, और इस भाषा को बोलनेवाले लोगों की संख्या भी बहुत है । मिथिला राज्य के सवाल पर उन्होंने आश्वासन दिया कि मैं और मेरी पार्टर्पलोगों के लिए हर संभव प्रयास करने से पीछे नही हटेंगी । मैथिली भाषा में बहुत मिठास है और मुझे अत्यन्त प्रिय है ।
अन्तर्रर्ााट्रय मैथिली परिषद, मुर्ंबई द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन प्रथम सत्र में अतिथि सम्मान का कार्यक्रम था जिसमें कुछ विशिष्ट व्यक्तित्व को सम्मानित किया गया । सम्मान कार्यक्रम में अन्तर्रर्ााट्रय मैथिली परिषद् के महासचिव रामरिझन यादव, बरिष्ठ पत्रकार राजेश्वर नेपाली, रेवती रमण लाल, सप्तरी से करुणा झा, शोभा साह, विराटनगर की मीना यादव, सिरहा की गीता साह को सम्मानित किया गया ।
डाँ. कमलकान्त झा की अध्यक्षता में यात्री जी के जन्म शताब्दी वर्षके अवसर पर “यात्री जी व्यक्तित्व आ कृतित्व” विषय पर विचार गोष्ठी किया गया । जिसमें देश विदेश के महान मैथिली विज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किये । जिनमें डा. भुवनेश्वर प्रसाद गुरमैता, डाँ. धनाकर ठाकुर, चक्रधर झा, राजेश्वर नेपाली, रामरिझन यादव जी ने अपने अपने विचार यात्री जी के बारे में प्रस्तुत किये जिनका संचालन प्रो. उदयशंकर मिश्र ने किया ।
दूसरे सत्र में इन्द्रप्रस्थ भवन के सभागृह में कवि गोष्ठी का आयोजना किया गया था, जिसमें भारत के विभिन्न प्रान्तों के कवियों की उपस्थिति थी । नेपाल से करुणा झा, आभा सेतु सिंह, महाकान्त ठाकुर, सबों ने अपनी अपनी रचनायें प्रस्तुत की । इस कार्यक्रम का संचालन उदयशंकर मिश्र ने किया ।
फिर, उसके बाद मैथिली साँस्कृतिक कार्यक्रम हुआ जिसमें सौभाग्य मिथिला चैनल तथा महुआ चैनल के कलाकारों ने रंगारंग मैथिली गीतों से श्रोताओं को झुमने नाचने पर मजबुर कर दिया ।
कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रथम सत्र में, विभिन्न संघ संगठनों द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया । जिसमें सप्तरी -नेपाल) के तरफ से मैथिली साहित्य परिषद, सप्तरी तथा उसकी सभी भगिनी संस्थाओं के लिए करुणा झा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जो अति प्रशंसनीय रहा । जनकपुर से प्रा. विजय कुमार दत्त, वरिष्ठ पत्रकार राजेश्वर नेपाली ने अपने प्रतिवेदन प्रस्तुत किये । दूसरे सत्र में, “मिथिला राज्य कियैक” विषय पर गोष्ठी में चर्चा के लिए डाँ. भुवनेश्वर प्रसाद गुरमैता की अध्यक्षता में विभिन्न क्षेत्रों से आये लोगों ने अपने अपने विचार प्रस्तुत किये । डाँ कमलकांत झा, उदयशंकर मिश्र, चक्रधर झा, धनाकर ठाकुर, शिवकुमार झा प्रमुख थे । तीसरे सत्र में महिला सम्मेलन डाँ रमा झा की अध्यक्षता मे हुआ, जिसका विषय था -“आजुक सर्ंदर्भ में मिथिलाङ्क नारी” । इस विषय पर गोदावरी झा, रंगकर्मी कनुप्रिया, कविता झा, लीला झा, करुणा झा, मीना यादव, आभा सेतु सिंह ने अपना अपना नजरिया महिलाओं के सर्ंदर्भ में रखा । दो दिवसीय कार्यक्रम मुर्ंबई जैसे महानगर में होना निश्चित रूप से मैथिल प्रेमियो के लिए गर्व की बात है । भविष्य में ऐसे ही महानगरों में मैथिली भाषा की गुंजती रहे ।

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