मुस्लिम आतंकवादी संगठन ‘इंडियन मुज़ाहिद्दीन’ के आतंकवादियों को नेपाली नागरिकता और पासपोर्ट

भारत में 166 व्यक्तियों की हत्या के जिम्मेदार मुस्लिम आतंकवादी संगठन ‘इंडियन मुज़ाहिद्दीन’ के आतंकवादियों को नेपाली नागरिकता और पासपोर्ट

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प्रस्तोता: रामाशीष , ३०,मार्च, काठमाण्डू । नेपाल द्वारा भारत के अनेक शहरों में विस्फोट कर, फरार मुस्लिम आतंकवादी संगठन ‘इंडियन मुज़ाहिद्दीन’ के चार लड़ाकुओं को नागरिकता के प्रमाणपत्र और पासपोर्ट दिए जाने की सनसनीखेज खबर बाहर आयी है। सन् 2008 में बनारस, गोरखपुर, फैजाबाद, जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ और दिल्ली में हुए बम विस्फोटों में संलग्न पांच लड़ाकुओं में से चार ने नेपाल प्रवेश कर नागरिकता प्रमाणपत्र और पासपोर्ट हासिल करने में सफल हुए थे। मुज़ाहिद्दीनों द्वारा कराए गए वक्त बम विस्फोटों में 166 लोग मारे गए थे।
भारतीय सुरक्षा निकायों की ‘मोस्ट वान्टेड सूची में दर्ज सलमान शेख, डाॅ. शाहनवाज, बाबा साज़ीद, मुहम्म्द ख़ालीद और अबू रसीद, पूर्वी नेपाल में सुनसरी जिले के नरसिंह गांव विकास समिति, वार्ड 7 के निवासी रहने का नकली कागजात बनाकर विक्रम संवत् 2066 साल के जेठ और आषाढ़ महीने में नागरिकता का प्रमाणपत्र लिया था।
गृह मंत्रालय स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार डाॅ. शाहनवाज़ ने शाहनवाज़ मियां, अबु रसीद ने मोहम्मद अहमद हुसेन मियां, सलमान शेख ने मोहम्मद फहद अन्सारी और मोहम्मद ख़ालीद ने इर्शाद अन्सारी के नाम से नागरिकता का प्रमाणपत्र लिया था। विदेशी आतंकवादियों द्वारा आसानी से नेपाली नागरिकता और पासपोर्ट हासिल कर, विदेशों में गतिविधियां चलाए जाने के इस तथ्य का लगभग 6 वर्षों के बाद खुलासा हुआ है। और, वह भी भारतीय गुप्तचर संस्था द्वारा पता लगाकर सूचना दिए जाने के बाद। उसके बाद ही गृह मंत्रालय ने छानबिन कर मुजाहिदीन लड़ाकुओं द्वारा नेपाली नागरिकता और पासपोर्ट हासिल करने का पता लगाया है।
pasportइससे जिला प्रशासनों द्वारा मनमाने ढंग से नागरिकता प्रमाणपत्र वितरित किए जाने की पुष्टि होती है, ऐसा पूर्व प्रशासकों का कहना है। उनका कहना है कि इससे से साबित होता है कि 2033 साल में जन्म लेने के आधार पर नागरिकता प्रमाण वितरण किए जाने के दौरान, काफी संख्या में गैर नेपालियों ने भी नेपाली नागरिकता का प्रमाणपत्र लिया होगा।
पुलिस हेड क्वार्टर द्वारा गत माघ 9 को किए गए पत्राचार पश्चात, गृह मंत्रालय द्वारा किए गए छानबिन के बाद इंडियन मुजाहिदीन के चार लड़ाकुओं द्वारा नेपाली नागरिकता हासिल किए जाने की खबर की पुष्टि हुई है। उसी नागरिकता के आधार पर चारो आतंकवादियों ने नेपाली पासपोर्ट हासिल किया था। शाहनवाज मियां और अहमद हुसैन ने मोहम्मद शमीम मियां को अपने बाप के रूप में पेश किया था और 2066 जेठ 22 को सुनसरी जिला प्रशासन कार्यालय ने उन्हें नागरिकता के प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया था। जबकि, इर्शाद आलम और फहद अन्सारी ने मिसर मियां के बेटे के रूप में अपने को पेशकर आषाढ़ 9 गते को नागरिकता का प्रमाणपत्र हासिल किया था। नकली बाप बने दोनों ही व्यक्तियों ने उक्त सभी चार आतंकवादियों को अपना बेटा होने की सिफरिश की थी।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी बताते हैं, सुनसरी जिले के तत्कालीन कार्यवाहक ‘प्रमुख जिला अधिकारी’ हरिकृष्ण उपाध्याय और तत्कालीन प्रशासकीय अधिकारी वेदनिधि खनाल ने ‘गांव विकास समिति के सचिव’ और ‘बाप बने’ दोनों व्यक्तियों की सिफारिशों की छानबिन किए बिना ही उनलोगों को लापरवाही वश (‘हचुवा’) नागरिकता के प्रमाणपत्र दिया या आर्थिक लेनदेन कर – यह जांच का विषय है ? नागरिकता के प्रमाणपत्र पर वेदनिधि खानाल के हस्ताक्षर हंै।
मोहम्मद शमीम और मिसर मियां नरसिंहपुर गांव विकास समिति के वार्ड नं. 7 के निवासी हैं। गृहमंत्रालय के तहकिकात से इस बात की पुष्टि हुई है कि मोहम्मद शमीम और मिसर मियां का उक्त नामों का कोई बेटा ही नहीं है। गृहमंत्रालय सूत्रों बताया कि मिसर मियां के 6 बेटे हैं लेकिन उक्त नामों के कोई ही बेटा ही नहीं है। यही नहीं बेटा बनकर नागरिकता लेनेेवाले तो गांव में कभी दिखे भी नहीं। गृह स्रोत का कहना है कि नागरिकता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद नेपाली पासपोर्ट हासिलकर, वे लोग अपनी आतंकवादी गतिविधियां चलाने के लिए वे विदेश चले गए। सभी को नागरिकता प्रमाणपत्र देने की सिफारिश गांव विकास समिति के सचिव राजकुमार न्योपाने ने की थी।
मालूम हो कि इंडियन मुजाहिदीन दक्षिण एशिया में इस्लामिक राज्य स्थापना करने के उद्देश्य से सन् 2008 में स्थापित आतंकवादी संगठन है। विशेष पुलिस ब्यूरो से सम्बद्ध सूत्रों के अनुसार सन् 2009 में हीे लड़ाकुओं की उपस्थिति नेपाल में दिखने लगी थी। बनारस, गोरखपुर, फैज़ाबाद, अहमदाबाद, लखनऊ और दिल्ली में बम विस्फोट कराने में संलग्न कुछ लड़ाकू, नेपाल आकर, सुनसरी जिले के भुटाहा गांव में रहे थे। वे लोग भुटाहा वार्ड 5 के खुर्शीद आलम अन्सारी के घर में ठहरे थे। अनुसंधान के दौरान यह भी खुला है कि वादा साजिद के बड़े भाई शकीर के उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में सहपाठी होने के नाते वे लोग खुर्शीद के मेहमान बनकर उनके यहां रहे थे। साकिर ने भारत में सम्पर्ककर ही उनलोगों को दो बार में भुटाहा भेजा था। भुटाहा में निवास के दौरान वे लोग खुर्शीद के रैयान नेशनल इंगलिश बोर्डिंग स्कूल के शिक्षक का काम करते थे। खुर्शीद के घर में ही उनलोगों के रहने और भोजन आदि की व्यवस्था की गई थी।
स्रोतों का कहना है कि नागरिकता और पासपोर्ट दिलाने का काम भी खुर्शीद ने ही किया था। पासपोर्ट पा जाने के बाद उक्त चारो ही लोग 2009 के अगस्त और सितम्बर में अल अरेबिया के उड़ान के द्वारा संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह पहुंचे थे। शारजाह में इंडियन मुजाहिद्दीन के नेताओं इकबाल भटकल और रियाज भटकल के साथ ही आमीर राजा के साथ भेंटकर वे लोग और अधिक ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान पहुंचे थे। स्रोत के अनुसार पाकिस्तान से 20 जनवरी 2010 को नेपाल पहुंचे सलमान शेख, तुरंत बाद ही भारत में पकड़ा गया था। डाॅ. शाहनवाज पाकिस्तान में ही है। बड़ साजिद, मोहम्मद खालिद, अबू रशीद, ट्रेनिंग लेने के बाद शारजाह ही लौट चुके हैं। अन्य तीन लोग नेपाली पासपोर्ट लेकर यूरोप में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसा स्रोतों का कहना है।
गृह मंत्रालय ने छानबिन के दौरान चारो ही इंडियन मुजाहिद्दीनों के लड़ाकू होने का पता लगने के बाद उनलोगों की नागरिकता खारिज़ कर दी है। गृह मंत्रालय ने परराष्ट्र मंत्रालय के मार्फत चारो ही लोगों के नाम से जारी पासपोर्ट को रद्द करने के लिए पासपोर्ट विभाग से पत्राचार किया है। गृह मंत्रालय ने कानून के अनुसार नागरिकता देने की सिफारिश करनेवाले गांव विकास समिति के सचिव, अपना बेटा बतानेवाले व्यक्ति, नागरिकता प्रमाणपत्र जारी करनेवाले कार्यवाहक प्रमुख जिला अधिकारी और प्रशासकीय अधिकारी पर कार्रवाई करने की सुनसरी जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है, ऐसा गृह मंत्रालय स्रोतों ने बताया है।
गैर-नेपाली को नागरिता प्रमाणपत्र देनेवाले गांव विकास समिति के सचिव राजकुमार न्योपाने, नकली बाप बनकर सिफारिश करनेवाले मोहम्मद शमीम तथा मिसर मियां और उनलोगों को नागरिकता का प्रमाणपत्र जारी करनेवाले तत्कालीन कार्यवाहक प्रमुख जिला अधिकारी खनाल पर नागरिकता कानून के तहत एक वर्ष से पांच वर्ष की कैद की सजा और 50 हजार रुपया तक जुर्माना किया जाएगा। जबकि, नागरिकता दिलाने में भूमिका अदा करनेवाले खुर्शीद पर नागरिकता ऐन के अनुसार मुकदमा चलाया जाएगा। तत्कालीन जिला अधिकारी उपाध्याय 58 वर्ष की सेवा अवधि पूराकर कर अवकाश प्राप्त कर चुके हैं जबकि खनाल और न्यापाने अभी भी सरकारी सेवा में कार्यरत हैं (स्रोत: मीडिया)।

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