मूल्य खोजता हुआ मृत्यु खुद शहीद हो गया : कैलाश महतो

कैलाश महतो, परासी, २४ जनवरी |

मृत्यु भी अपना मुल्य खोजता है, अपना अस्तित्व खोजता है और जीवन-मृत्यु बीच का हिसाब किताब से एक व्यक्ती का जीवन का आधार स्तम्भ निर्माण होता है । वो अधार स्तम्भ का रूप जहाँ कही भी हो सकता है : उसके परिवार मे, उसके समाज मे, उसके राष्ट्र मे या विश्व मे ।

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आधा वर्ष के मधेश आन्दोलन ने आधा सय से ज्यादा मधेशियो की जाने ले ली, उन जान देने बालो ने अपने को तो सहीद बना ली, मगर अपने प्रियजन को अपने सहादत की गुलाम बना दी । अब वे तीन तीन गुलामियो को पूजा करेगे, उनकी आज्ञा पालन करेगे दर दर के ठोकरे खाएङ्गे । पहली गुलामी वे नेपालीयो तथा उसके सरकार के करेगे । दुसरी अपने गिरते हुए औकात की और तीसरे उन मधेशी दल तथा नेताओ की । नेपाली राज्य मे वे कोई भी सुबिधा सुबिधापूर्ण रूप से नही ले पाए । नागरिकता लेने के लिए लाईन मे,  कोई फारम भरने के लिए लाईन मे, अपनी जमीन बेचने के लिए लाईन मे तथा कुछ खरीदने के लिए भी लाईन मे रहने बाले मधेशियो को सहीद घोषित होने के लिए भी लाईन मे लगना ही निश्चित है । जीवन जिते जिते लाईन मे रहने बाले मधेशियो को नेपाली राज्य का गोली खाकर मरने के बाद सहीद नाम पाने के लिए भी लाईन मे लगना अनिवार्य है । उनके साथ उनके परिवार बाले भी सहीदो के परिजन होने के लिए कभी नेपाली राज्य तो कभी मधेशी दल और उनके नेताओ के पिछे लाईन मे रहेगे । वे मधेशी नेता सही के परिजनो कभी फुल माला के लिए, कभी सम्मान देने के लिए तो कभी सहीद के मातापिता व परिजन की परिचय देने दिलवाने के लिए अपने पिछे घुमाएगे ।और वे बेचारे वही परिचय, सम्मान तथा नेताओ के बगल मे मन्च पर बैठने के लिए उनके निर्देशान अनुसार आगे पिछे घुमेगे ।

मन्चो पर फिर से वर्षो पूराना वही नाटक मन्चन होगा । सहीदो का सपना पूरा करबाने की कसम खाए जाएगे, उनके तस्वीरो पर फुल और माले चढाए जाएगे, उनके परिजनो को दोसल्ला ओढाकर अबिर लगाए जाएगे और सहादत के पैसो के लिए उन्हे दर्जनो हाकिम और उनके चम्चो के आगे प्रकृया पूरे करबाए जाएङ्गे । वर्षो तक उन्हे गुलाम बनाए जाएगे और कुछ उधार के भिक्षा दिए दिलाए जाएगे ।

उसके बाद फिर भाषण होगी कि वे मधेश प्रान्त बनाकर ही सहीद बनाना छोडेगे, नेपाली सम्विधान और उसकी शासन मजबूत और दोहन की वैज्ञानिकता मधेशियो पर नए ढङ्ग से लाडाँकार ही शान्त होङ्गे और उन्हे गुलाम बनाकर ही दम लेङ्गे । वे शान्तिपूर्ण आन्दोलन के राह पर ही चलकर मधेशियो को हत्या करबाएङ्गे । वे मधेशियो को हत्या और आतङ्क से बचाने के लिए ही शान्तिपूर्ण आन्दोलन के जरिए मधेशियो को सहीद होने का सम्मान दिलाएङ्गे और मधेशी भैया लोग उनकी बातो को बडे आराम से मान भी जाते है । मधेशी भैया लोग भी यह सिखने से पिछे नही रह्ते कि आजाद मधेश के लिए तो जाने जा सकती है । इससे अच्छा तो गुलाम बनने मे ही भलाई है । सङ्घियता लेने मे ही जीवन की सुरक्षा है । स्वतन्त्र मधेश के लिए लडने बालो का कोई भरोशा नही है । वे तो मरवा देङ्गे, लुटवा देङ्गे । नेपाली मालिको से रही हमारी सदियो का रिश्ता तोडवा देङ्गे । हम तो मालिक के बिना मर जाएङ्गे । फिर हमे देशी, भैया, ढेले, भेले, काले, भूत, इन्डियन, बिहारी, पाकिस्तानी, चटपटे कौन कहेगा । यह सम्मान स्वतन्त्र मधेश मे मिलने का ज्ञारेण्टी कौन दे सकता है ? सहीद बनाने का सौभाज्ञ कौन दिलाएगा ?

एक तरफ मधेशी मोर्चा सीमाङ्कन बिना का सम्विधान तथा पहाडरहितबिना का मधेश प्रान्त से पिछे नही हटने की बात है तो वही दुसरे तरफ शासक तीन दल अपने अडान से टस से मस नही होने की अवस्था मे है । नेपाली राज्य के धृतराष्ट्र के पी बडे प्रेम पूर्वक मधेशी नेताओ को समझा रहे है कि तुम हमारे साथ नही रह सकते । तुम हमसे अलग रहो । हम अपने से तुम्हे तुम्हारा हस्तीनापुर नही दे सकते । तुम ले लो, मगर हमारे मोर्चाबाले नेता भैया लोगो का सम्वन्ध गोरे छाले से टुटना नही चाहिए । क्यूकी परिवार मे कुछ छालिय रङ्ग परिवर्तन तो उन्ही गोरे छाले के सहयोग से जो हुए है । किसी का महल, किसी का शेयर लगानी तो उन्ही गोरे लोगो के सन्स्थानओ मे मौजुद है और अगर वे सम्वन्ध तोडते है तो उनकी लगानी की क्या होगी ? क्या मधेशी जनता उसकी भरपाई करेगी ? नही कर सकती । इसिलिए मधेशियो को स्वतन्त्र बनाने से ज्यादा फायदे तो उन्ही गोरो से मिलकर रहने मे है । भाड मे जाय मधेश और मधेशी । जब तक चलता है, चलने दो । नही चला तो मधेश छोड देङ्गे, बाहरी देशो मे चलते बनेङ्गे, जहाँ पर पैसे इकट्ठे है । बेटाबेटी आबाद है ।

के पी जी ने बडा लाजबाव उद्द्घोष किया है कि मधेशी कल्ह चान्द पर हिस्सा मागेगा तो कौन दे सकता है ? बडे रहस्य की बात उन्होने की है । आदमी कभी कभी अचेतन मन से बिल्कुल सत्य का पर्दाफास कर देता है । ओली यह कह्ना चाह्ते है कि मधेशी अपना अधिकार हमसे क्यू माङ्ग्ता है ?  क्या किसी देश बनाने बालो ने किसी से माङ्गा कि वो देश बनाना चाहता है और उसे देश बनाने दिया गया ? वह तो वहाँ के लोग मिलकर खुद निर्माण करते है । चन्द्रमा पर पहुचने बालो ने चन्द्रमा से पुछने नही गया कि वे वहाँ पर जाना चाह्ते है, वहाँ पर वे जमिन खरिदना चाह्ते है और नया सन्सार बनाना चाह्ते है । लोगो ने अपना क्षमता निर्माण किया, पहुच बनाया और हिम्मत और तरकीब लगाकर चन्द्रलोक पर भी अपनी मौजुदगी कायम की ।

नेपाली राज्य कयी अप्रत्यक्ष भाषाओ मे मधेशियो से यह कह्ती आ रही है कि तुम अब अगर अधिकार के साथ मे जीना चाह्ते हो तो हमारे साथ वो गुन्जाइस नही हो सकता । तुम अलग दुनिया बनाओ, देश बनाओ हम से अलग होकर । इस बात को हमे समझना चाहिए । अब हमारा बाधक उनसे बडे हम खुद है, हमारे नेतृत्व है । हम विचार करे और फैसला जल्द ले कि आजाद हो या गुलामी को ही निरन्तरता दे ।

“नेपाली उपनिवेश अन्त हो, मधेश देश स्वतन्त्र हो ।”

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