मृत्यु क्या है ?

मृत्यु क्या है ? कुछ उदाहरणों के द्वारा इसे समझने का पयत्न करेंगे । मृत्यु के उपरान्त तेरहवें दिन सभी लोग एकत्र होते है तो उसे लोक में शोकसभा कहा जाता है, जबकि वह ‘शोकविमोचन सभा है , लोक तो तेरह दिन पहले हो चुका है, आज तो उस शोक से उबरने के लिए कुछ अच्छी–अच्छी बातें सीखने के लिये इकठ्ठे हुए हैं ।
आज हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि मृत्यु क्या है ? पहले यह जाने कि मृत्यु का भय किसे होता है । एक व्यक्ति तो ऐसा है, जो मृत्यु के बारे में कुछ जानता ही नहीं है, वह मृत्यु से नहीं डरेगा और एक व्यक्ति वह है, जो मृत्यु को पूर्ण रूप से जानता है ? वह भी मृत्यु से नहीं डरेगा कौन ? वह जिसे अधूरा ज्ञान है, जैसे आप और हम लोग क्योंकि हमें, मृत्यु के बारे में पूर्ण ज्ञान नहीं है । इसको एक उदाहरण से समझिये, एक चार मास का बालक है, जो खेल रहा है । एक सर्प आजा है तो वह बालक उस सर्प को पकड़ने की चेष्टा करेगा और पकड़ भी लेगा चूंकि वह नहीं जानता । उसी जगह पर एक संपेरा बैठा है, वह सर्प के आ जाने पर उसे पकड़ लेगा और बन्द कर लेगा, क्योंकि वह सर्प के बारे में पूर्णरूप से जानता हैं । वे दोनों ही सर्प से डरेंगे नहीं, डरेगा कौन ? हम सब । अभी यहां सर्प आ जाय, हम सभी इधर–उधर भागेंगे, क्योंकि हमे अधूरा ज्ञान है ।
एक और उदाहरण– एक सड़क पर एक व्यक्ति खड़ा है, उधर से एक ट्रक तीव्र गति से आ रहा है । सड़क के किनारे खड़े लोग चिल्ला रहे हैं, हट जाओ, लेकिन वह नहीं हट रहा है, वह ट्रक को आते भी देख रहा हुं और उन लोगों की चिल्लाहट भी सुन रहा है, लेकिन हट नहीं रहा है, उसका कारण है कि वह पागल है, वह नहीं जनता कि ट्रक उसे टक्कर मार देगा और वह मर जाएगा, वह मृत्यु आने पर भयभीत नहीं होगा । जब मृत्यु आएगी, उसे स्वीकार कर लेगा । डरेगा कौन ? हम, क्योंकि हमे अधूरा ज्ञान हैं ।
एक बात और समझिये– एक दीपक है, उसमें बाती भी है, तेल भी भरा है । दो घण्टे जल सके इतना तेल है । दीपक जल रहा है, लेकिन एक हवा का झोका आता है, उस दीपक को बुझा देता है तो अब ऐसे में कोई भी व्यक्ति क्या करेगा ? हम बताते हैं उस दीपक को उठाकर किसी ऐसे स्थान पर रख देंगे कि हवा का झोंका उसे बुझा न दे और फिर से जला देंगे । मृत्यु है, हमारे बीच तेरह दिन पहले जो दीपक जल रहा था, वह अचानक बुझ गया । आप कहेंगे कि वह बूथ हो चुका था, उसका तेल समाप्त हो गया था, ऐसा नहीं है, हो सकता है अभी और तेल बांकी हो, कई नौजवान लोग हमारे बीच से चले जाते हैं, उनके अन्दर बाती भी होती है, तेल भी भरपूर होता है, वे फिर भी बुझ जाते हैं । हमारे बीच में जो दीपक था, उसे उठाकर कही और जला दिया गया है । फर्क यह कि उस जलानेवाली शक्ति को उस परमपिता को हम नहीं देख पाये ।’ बस यही तो मृत्यु है ।
संसार में यह सम्भव है कि सभी व्यक्तियों को स्त्रीपुत्र धन–वैभव सम्मान मिले या न मिले, लेकिन मृत्यु सभी को आएगी, चाहे कोई गरीब हो या चाहे अमीर हो । यजुर्वेद के ४० अध्या के १५ वे श्लोक में कहा है–’ बस यही तो मृत्यु है ।
संसार में यह सम्भव है कि सभी व्यक्तियों को स्त्री,पुत्र धन–वैभव सम्मान मिले या न मिले, लेकिन मृत्यु सभी को आएगी, चाहे कोई गरीब हो या चाहे अमीर हो । यजुर्वेद के ४० अध्या के १५ वे श्लोक में कहा है– ‘भस्मान्त शरीरम’ मतलब है शरीर तो अन्त में भस्म होनेवाला ही हैं । यदि इस बात को समझ लिया जाए तो मृत्यु से भय नहीं लेगा ।
एक मां का पुत्र उसे छोड़कर कहीं चला जाता है, वह ५ वर्ष, १० वर्ष तक नहीं आता है । माँ ! तेरा पुत्र तो कनाडा में है । वह बहुत खुश होती है, लेकिन वह व्यक्ति कहता है कि माँ, समस्या यह है कि तेरा वह पुत्र कभी तुझसे मिलेगा नहीं, वह अब कभी आएगा नहीं, तो वा मां कहती है कि एक बात तो बता वह ठीक तो है ? हां, मां वह बहुत मजे में है, तो वह भी कहती है कि कोई बात नहीं, वह नहीं मिेलगा न सही, व जहां है खुश है न बस, वह खुश ही रहे । हमारे बीच से जो व्यक्ति गया है, वह अब कभी हमें मिलेगा नहीं, वह वह अब अब कभी यहां आएगा नहीं, तो क्या हम उस व्यक्ति के लिए रोने–तड़पने की जगह उस मां की तरह सब्र नहीं कर सकते । यह मानक कि वह खुश है, हम खुश नहीं हो सकते । यदि हम इस बात को समझ लें तो मृत्यु से भयभीत होंगे ।
ध्यान दीजिएगा चाणक्य ने तीन बातें बतायी है । यदि उन बातों को हर समय याद रखा जाए तो मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है, पहली बात जिस समय हम श्मशान जाते हैं और चिता को जलते हुए देखते हैं तो सभी के मन में एक ही बात आती है कि यह संसार मिथ्या है, हम सभी को इसी तरह चिता में जल जाना है, सभी लोगों को क्षणिक वैराग्य हो जाता है, लेकिन देखा यह जाता है कि जैसे ही हम लोग श्मशान से बाहर आते है, फिर वही मोह, माया, घर परिवार कारोबार की बातें । अभी थोड़ी देर पहले वाला वैराग्य भूल जाते हंै । दूसरे जब किसी बीमार व्यक्ति मिलते हैं, जो अस्पताल भी में जीवन और मौत से लड़ रहा हो, उस समय पर भी वही स्थिति होती है, तीसरी जगह है सत्संग, जहां पर बैठकर भी हर व्यक्ति को क्षणिक वैराग्य हो जाता है । यदि इन तीनों जगह पर होने वाली मनस्थिति को हम चौबीसों घण्टे हर समय बनाये रखे तो आप यह समझ लीजिये कि मोक्ष निश्चित है ।
इस लिये यह बात याद रखिये कि मृत्यु तो अवश्यम्भावी है, इससे पहले की चिता जल उठे, चेत जाइये । हो जब आयेगा जबरे बलावा प्रभु का, तो सब को ही छोड़कर जाना पड़ेगा ।
वहाँ पर किसी का कोई न मिलेगा ।
सब ही का सब ही यही रहेगा ।।

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