मेरी जेल यात्रा राजनीतिक जीवन का अन्त नहीं, नई पारी की शुरुआत

मेरी गिरफ्तारी पर फूले न समाये उपेन्द्र यादव ने खुशी में लड्डू बांटे, अबीर यात्रा भी की। जब वे एमाले में थे, काठमांडू के खुले मञ्च में, खुली सभा में प्रदीप नेपाल ने एमाले के एक सय भ्रष्टाचारियों का नाम पढा था। उन में वामदेव गौतम का नाम सबसे ऊपर था और उपेन्द्र यादव उस समय वामदेव गौतम के बडे सहयोगी थें।

जेपी गुप्ता
नेपाल के विद्यमान राज्यसत्ता द्वारा दण्डिÞत कर मुझे जेल में रखा गया है। यह मेरी पहला जेल यात्रा नहीं है, और यह अप्रत्याशित भी नहीं थी। एक दमनकारी राज्य का यह चरित्र स्वभाविक ही है कि, जो राज्यको तोडÞने का प्रयत्न करेगा-राज्य उस पर कहर ढ

JP gupta

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हेगा ही। निःसन्देह, मेरे साथ यही हुआ है। हम प्रायः यह मान बैठते हैं कि मन्त्री वगैरह रहे कुछ व्यक्तियो का झुण्ड ही राज्य का शासक हैं। दिखता तो ऐसा ही है, परन्तु नेपाल के सर्न्दर्भ में यह यथार्थ नहीं हैं। नेपाल के सर्न्दर्भ में स्वार्थों का कुछेक सम्मिश्रति रूप वास्तविक सत्ता है, और वही नेपाली राज्य व्यवस्था में ‘स्थायी सत्ता’ है।
१) मन्त्री परिषद कहेंे या सरकार, २) खास समुदायों के बर्चस्व का संसद कहेंंे या विधायिका, ३) राज्य का विद्यमान स्वरूप के पृष्टपोषण करने बाली राजनीतिक पार्टर्ीीँ, ४) सुरक्षा के निकाय -सेना, सशस्त्र बल, प्रहरी एवं गुप्तचर), ५) एक ही जातीय कर्मचारीतन्त्र, ६) एकात्मवादी राज्य व्यवस्था का ही हित संरक्षक न्याय प्रणाली वा अदालत, ७) निहायत निजी स्वार्थ के लिए परम्परागत चाटुकार पूँजीपति वर्ग, और ८) विद्यमान प्रेस मिडिÞया-संचारगृह-पत्रकार-बस्तुतः ये ही राज्य में ‘स्थायी सत्ता’ हैं। वर्तमान राजनीति में मुख्य द्वन्द्व स्थायी सत्ता के रूप में रहे ये सभी एक पक्ष और मधेशी समुदाय के बीच में है। आधारभूत रूप में इन्हीं दो पक्षों का संर्घष्ा ही नेपाल में वर्तमान राजनीतिक द्वन्द्व है। इन्ही दो पक्षो में आज का समग्र राजनीति ध्रुवीकृत हैं। समान स्वार्थ के सहकारी, उपर उल्लेखित ‘स्थायी सत्ता’ के लोग चाहते है- ‘वे अक्षुण्ण रहें। इन का स्वार्थ का साम्राज्य बरकरार रहे।’ हम, मधेशी चाहते हैं- ‘इसे तोडÞना होगा। इन्हे तोडÞकर, राज्यका नया रूपान्तरण करना हमारा ध्येय हैं।’ मैने इसे ही तोडÞने का संकल्प लिया है, और इसलिए मुझे तोडÞने के लिए ही जेल भेजा गया हैं। अदालत का निर्ण्र्ाातो एक षडÞयन्त्रात्मक राजनीतिक स्वांग के सिवाय और कुछ भी नहीं हैं। मैने जंजीर तोडÞना चाहा, मुझे जंजीर में लपेटा गया। इन की वास्तविक नीयत तो न्याय देना कदापी भी नहीं हैं, अपितु मुझे राजनीति के मुख्यधार से बाहर रखना इन का मनसाय हैं।
दमनकारी राज्य की ऐसी कार्यशैली न तो नेपाल के सर्न्दर्भ में और न ही अन्य देशों के सर्न्दर्भ में पहली है। मालदिभ्स में विगत ४० वर्षों का तानाशाही को तोडÞकर प्रथम जननिर्वाचित हुए राष्ट्रपति मो. नशीद अभी गिरफ्तार हुए हैं। अदालत ने ही उन्हे बर्खास्त किया था। सत्ता के दुरूपयोग का मुकदमा है, परन्तु शर्त है- हारने के वाद राजनीति नहीं कर पाएगें। अभी-अभी इरान के पर्ूवराष्ट्रपति अकबर हासेमी रफसनजानी की बेटी फाजेह हासेमी को राज्य के विरुद्ध दुष्प्रचार के अभियोग में ६ महिने के लिए जेल भेजा गया है। परन्तु, आगामी ५ वर्षके लिए उनको राजनीति करने में बन्देज लगाना अदालत ने नहीं भूला। इसी अक्टोबर माह में फिलिपिन्स के पर्ूवराष्ट्रपति ग्लोरीया अरोया, जो नौ वर्षो तक राष्ट्रपति थीं- भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार की गयी हैं। वहाँ की सरकार का कहना है, वो चुनाव नहीं लडÞ पाएंगी।
श्रीलङ्का में वर्तमान राष्ट्रपति महिन्द्र राजपाक्षे ने अपने सेना प्रमुख जनरल फोनसेका को प्रयोग कर तीन वर्षपहले एक ही सप्ताह में तीन लाख से ज्यादा तमिल नागरिको का नरसंहार किया। सिंहलीयो के बीच सेना प्रमुख हिरो माने गये। अपनी लोकप्रियता को भुनाने वे राष्ट्रपति के उम्मीदवार हुएं। सेना प्रमुख के बडÞे प्रशंसक रहे राष्ट्रपति राजपाक्षे ने उन्हे भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार करवाया। दो वर्षजेल में रहने के वाद अभी रिहा हुए हैं। अदालत ने आदेश दिया है- वे चुनाव नहीं लडÞ पाएंगे। मलेशिया में तो वहाँ के अत्यन्त लोकप्रिय उपप्रधान एवं अर्थमन्त्री अनबर इब्राहिम, जो मलेशिया के विकास के मुख्य शिल्पकार माने जाते थे, बलात्कार के आरोप में कई वर्षों तक जेल में रखे गए। आज वे निर्दोष साबित हुए है, परन्तु राजनीति से दरकिनार कर दिए गए हैं। अभी-अभी पाकिस्तान में जो हो रहा हैं- हम सभी जानते है। ये और ऐसी अनेक घटनाओं से स्पष्ट होता है कि कानून का संरक्षक कहे जानेवाले अदालत और न्याय प्रणाली सिर्फमाध्यम रहा है। कई राज्यों ने अपने स्वार्थ के लिए लोकप्रिय तथा अपने मकसद पर दृढÞ रहे नेताओं को निर्ममता के साथ रौंदा है। नेपाल में तो और भी कई उदाहरण हैं। वी.पी. कोइराला जैसे नेता को डÞकैती का मुकदमा लगाया गया था। सुवर्ण्र्ााम्सेर जैसे नेता को अपमानित करने लिए उनकी पत्नी के कपडÞों को निलाम किया गया था। कभी राजा के मुहबोले रहे प्रधानमन्त्री डÞा. तुलसी गिरी को भी कार्पेट काण्डÞ में मुकदमा झेलना पडÞा। विगत १५ वर्षके भीतर पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्डÞ’ और अभी प्रधानमन्त्री हुए डÞा. बाबुराम भट्टर्राई पर कई डÞकैती और लूट, हत्या का मुकदमा लगाया गया। जिसे अभी अभी सरकार ने वापस लेने का निर्ण्र्ााकिया है। नेपाली कांग्रेस के लोग नहीं भुले होगें कि, शाही सत्ता में राजा ज्ञानेन्द्र ने पर्ूव प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा को भ्रष्टाचार के आरोप में आठ महिना तक नजरबन्द में रखा था। २०६३ साल में दूसरे जनआन्दोलन के वाद गिरिजा प्रसाद कोइराला शक्तिशाली प्रधानमन्त्री नहीं होते तो धमिजा प्रकरण, लाउडÞा एयर काण्डÞ जैसे कई काण्डÞ और अभियोग में अख्तियार के प्रमुख र्सर्ूयनाथ उपाध्याय के चंगुल में पडÞके संभवतः उनकी मृत्यु डिÞल्लीबजार वा सेन्ट्रल जैसे किसी जेल में होना निश्चित था।
मै यहाँ किन किन लोगों का नाम लँू – नेपाली कांग्रेस, एमाले और मेरे मधेशी कई ऐसे नेतागण आज भी विराजमान हैं, जिन्होने अख्तियार को बडÞा रकम दिया या फिर राजा के चरणो में निर्वस्त्र हुए। वे सभी अपने अतीत के साक्षी रहे हैं। मेरी गिरफ्तारी पर फूले न समाये उपेन्द्र यादव ने खुशी में लड्डू बांटे, अबीर यात्रा भी की। जब वे एमाले में थे, काठमांडÞू के खुले मञ्च में, खुली सभा में प्रदीप नेपाल ने एमाले के एक सय भ्रष्टाचारियों का नाम पढÞा था। उन में वामदेव गौतम का नाम सबसे ऊपर था और उपेन्द्र यादव उस समय वामदेव गौतम के बडÞे सहयोगी थें। आज के ही पदासीन न्यायाधीशों से भरा हुआ सर्वोच्च अदालत के बेञ्च ने अख्तियार और पर्ूव राजा ज्ञानेन्द्र के शह पर गिरिजा प्रसाद कोइराला को अदालत में हाजिर होने का सम्मन जारी किया था और प्रतिकृया में कोइराला ने कहा था- सर्वोच्च अदालत को नारायण हिटी राजदरवार के परिसर में स्थानान्तरण कर देना चाहिए। यह प्रतिक्रिया कोइराला के बदले यदि मैने दिया होता तो राष्ट्रपति भवन शीतल निवास के प्राङ्गण में महामहिम राष्ट्रपति रामवरण यादव जी के सम्मुख इसी दशहरे में मेरी बली चढÞाना निश्चित था। सत्ता को बली तो चाहिए ही। शिर कलम करे, या फिर जेल भेजें। इन सवालो का जिक्र मेरे मुकदमा के सर्न्दर्भ में अपना स्पष्टीकरण देने के लिए नहीं किया है। अपितु, मैने इस लिए चर्चा कि है कि, हम नेपाली राज्य के चरित्र को समझें। और हमारे मकसद के बारे में स्पष्ट हो सकंे।
मैं महिनों से नेपाली राज्य सत्ता का कैदी बन जेल में कैद किया गया हूँ। मुझे जबरन राजनीतिके मूलधार से अलग किया गया हैं।

दिग्भ्रमित मधेशी मोर्चा दिशाहीन मेधश यात्रा

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