मेरे खिलाफ राजनीतिक षड्यन्त्रः अनिल झा

पार्टर्ीीे निष्कासन पर दुःख व आर्श्चर्य व्यक्त करते हुए अनिल झा ने खुद को पार्टर्ीीवभाजन के किसी भी कार्य में संलग्न नहीं होने का दावा किया । अगले दिन सुबह जब मीडिया द्वारा अपने निष्कासन की खबर झा के पास पहुँची तो वे भी सन्न रह गए । उन्हें इस बात का इल्म भी नहीं था कि जिस पार्टर्ीीौर जिस नेता के लिए उन्होंने इतना सब कुछ किया उसी पार्टर्ीीे उसी नेता द्वारा बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा । यह खबर सुनते ही झा के पास उनके शुभचिंतकों का लगातार फोन आने लगा । झा ने पार्टर्ीीारा अपने ऊपर लगाए गए सभी अरोपों का खण्डन करते नजर आए । उन्होंने कहा कि नेतृत्व द्वारा लगाए गए आरोप मेरे खिलाफ साजिश के तहत लगाया गया है । लेकिन मैं इससे विचलित नहीं हुआ हूँ । पार्टर्ीीे भीतर ही रहकर मैं संर्घष्ा करुँगा और खोई हर्ुइ प्रतिष्ठा भी लूँगा । लेकन अगले ही दिन मीडिया से मुखातिब हुए झा ने पार्टर्ीीेतृत्व पर जाकर आरोपों की झडÞी लगाई । पत्रकार सम्मेलन में उनके निशने पर रहे पार्टर्ीीध्यक्ष राजेन्द्र महतो व सह अध्यक्ष लक्ष्मण लाल कर्ण्र्ाा झा ने महतो पर व्यापक आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाते हुए आपर्ूर्ति मंत्रालय को पैसा लेकर भर्ती करने वाला केन्द्र बताया । झा यही नहीं रुके । महतो पर अपनी भडÞास निकालते हुए वो यहाँ तक कह गए कि समय आने पर वो महतो द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की एक एक फाईल खोलकर सामने रख देंगे । सह अध्यक्ष लक्ष्मण लाल कर्ण्र्ााी झा के निशाने पर रहे और उन्होंने कर्ण्र्ाार मंत्री पद पर रहते अपने परिवार वालों को ही फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया ।
अनिल झा ने कहा कि इस समय पार्टर्ीीवभाजन की बात युक्तिसंगत ही नहीं है । जिस सयम सरकार बनाने के लिए सभासदों की बोली करोडÞो में लगाई जा रही थी उस समय मेरे पास भी कई प्रस्ताव आए । उन परिस्थिति में जब मैंने पार्टर्ीीा साथ नहीं छोडÞा तो इस समय जब माओवादी के र्समर्थन से सरकार बन गई है और उन्हें बहुमत जुटाने की भी कोई जरुरत नहीं तो ऐसे समय पार्टर्ीीवभाजन से क्या फायदा – हालांकि अप्रत्यक्ष रूप से उन्होंने यह अवश्य स्वीकार किया कि पार्टर्ीीो वर्तमान सरकार में सहभागी हाने की बात को वो अवश्य उठाए थे । और पार्टर्ीीे भीतर अपना विचार रखना लोकतांत्रिक मूल्य मान्यताओं के पक्ष में है ।

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