“मेरे दिलों के हौसलों को आजमाने के लियें” गुल्जारे अदब द्वारा गजल गोष्ठी,

Guljare Adab  2072-2-30नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल, २०७२ जेष्ठ ३० गते ।
गुल्जारे अदब बाके ने नेपालगन्ज के महेन्द्र पुस्तकालय में शनिवार को अपना मासिक गजल गोष्ठी का आयोजन किया ।
गुल्जारे अदब ने अपना मासिक गजल गोष्ठी हरेक महीने के अन्तिम शनिवार को करते आ रहा है । उसी तरह नेपालगन्ज बाजार के उर्दू साहित्यकार मौलाना नूर आलम मेकरानी के प्रमुख आतिथ्य में और रसीद अहमद हयात की अध्यक्ष्ता में सम्पन्न हुआ मासिक गजल गोष्ठी में अवधी सास्कृतिक बिकास परिषद् बाके के अध्यक्ष सच्चिदानन्द चौवे, अदब के अध्यक्ष हाजी अब्दुल लतीफ शौक, सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशी, जमील अहमद हाशमी लगायत लोगों ने “मेरे दिलों के हौसलों को आजमाने के लियें” मिश्ररा पर अपनी–अपनी शैर वाचन किया अदब के सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशी ने बताया ।
शैर ः–
है वजूद अपना फकत नेकी कमाने के लिए
नेकियों की राह पर चलने चलाने के लिए
फिर हमें आखे दिखाने लग गए अहले सितम
तख्वए मश्के सितम हमको बनाने के लिए
जिन्दको जावेद रखना था उसे नामूसको
जा“ वो कुर्बा कर गया इज्जत बचाने के लिए
फेंक देता है गली में कोई बासी रोटिया“
और है महरुम कोई दाने दाने के लिए
एक फकत इस शमए ईमा“ को बुझाने के लिए
मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशी
नेपालगन्ज, १० बा“के
सहानुभूतिः–
फिर से हम नेपाल को बनाएंगे
चेतना जन– जन में जा जगाएगे
आपदा“ए आती और जाती है
इना से डर के न बैठ जाएगें
आज धर्म जाति वर्ग लिंग मत देखों
हाथ इन्सानियत का हम सभी बढाएगें
बहुत मुशीवत में फसें है पहाड के वासी
जिन्दगी उनकी जाकर सभी बचाएगे
देश –देशों से आ रही इमदाद सारी
जरुरत मन्दो को यथोचित उसे वटाएगे
आपदा राहत को गर खा गए कोई नेता
सत्य कहता हू“ वे पचा नहीं पायेंगे
देश में संत, योगी, मुनि, ऋषो और वेद गाईका
हावे कही अपमान ए हम देख नही पायेंगें
चाहते हो अगर आनन्द की हो देश देश में वर्षा
तो समूह देश से भ्रष्टाचार मिटाए“गे
सच्चिदानन्द चौवे
अध्यक्ष– अवधी सास्कृतिक बिकास परिषद् , बाके

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