Thu. Sep 20th, 2018

मैं खुद जाउँगी राहुल गाँधी के यहाँ बारात लेकर

 

बुलंदशहर (जेएनएन)। बहुविवाह और हलाला को असंवैधानिक करार देने को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाली डॉ. समीना का कहना है कि महागठबंधन के नेता तीन तलाक संबंधी बिल में रोड़ा अटका रहे हैं। राहुल गांधी यदि बिल पास कराने में सहयोग नहीं करते तो इसका अर्थ है कि वह शरिया कानून और बहुविवाह का समर्थन करते हैं। ऐसे में उन्हें तलाक पीडि़त चार महिलाओं से शादी करनी चाहिए। यदि राहुल गांधी ऐसा नहीं करते तो वे खुद बरात लेकर उनके घर जाएंगी।

दो बार तीन तलाक की पीडि़ता

बुलंदशहर में पत्रकार वार्ता में संभल की मूल निवासी डॉ. समीना ने कहा कि वह खुद दो बार तीन तलाक की पीडि़ता हैं। उन्होंने व छह अन्य महिलाओं ने बहुविवाह, निकाह-हलाला को असंवैधानिक करार देने को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। इनमें बुलंदशहर के गांव जौलीगढ़ निवासी रानी शबनम और सिकंदराबाद निवासी फरजाना भी शामिल हैं। तीन तलाक संबंधी बिल को संसद में पारित होने से रोकने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, देवबंद समर्थक और महागठबंधन के नेता एकमत हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी उनमें शामिल हैं।

बच्चों के साथ सुबकती रहीं रानी शबनम 

राहुल गांधी यदि शरिया कानून और बहुविवाह के समर्थक हैं तो उन्हें कथित तौर पर जायज बताई जाने वाली चार शादियां तलाक पीडि़त महिलाओं से करनी चाहिए। उनके ऐसा न करने पर वह खुद तलाक पीडि़ताओं के साथ बरात लेकर उनके घर पहुंचेंगी। अखिलेश यादव को भी ऐसा करना चाहिए। डॉ. समीना ने स्पष्ट किया कि उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्लिम महिला हितों के लिए सकारात्मक कदम उठा रहे हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मेरठ प्रांत संयोजक कदीम आलम, जिला संयोजक मोहम्मद रिहान आदि रहे। रानी शबनम और फरजाना भी रहीं। इस दौरान अपने दो बच्चों के साथ मौजूद रानी शबनम अधिकांश समय सुबकती रहीं।

ससुर-शौहर पर दर्ज कराएंगी मुकदमा
बरेली में ससुर से हलाला के बाद मां बनी मुरादाबाद की पीडि़त महिला, ससुर और शौहर के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराएगी। बुधवार को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तनवीर हैदर उस्मानी को पूरा घटनाक्रम बताने के बाद पीडि़ता मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी के साथ कानूनी कार्रवाई का रुख करेगी। फरहत नकवी के मुताबिक, ससुर के साथ हलाला नहीं हो सकता। इसलिए ससुर ने जो किया वह दुष्कर्म है। दूसरी बात, ससुर से हलाला के समय पीडि़ता पहले शौहर की बीवी नहीं थी। इद्दत के समय शौहर ने उसके साथ जबरन संबंध बनाए, तो यह भी दुष्कर्म हुआ। यानी दोनों ने जो किया वह दुष्कर्म है। वहीं जिन मौलवियों ने हलाला कराया, वे भी दुष्कर्म में भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि इन सबके विरुद्ध पीडि़ता की ओर से मुकदमा दर्ज कराने के बाद सुप्रीम कोर्ट जाऊंगी। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कानूनी मंत्री को पत्र लिखकर हलाला पर प्रतिबंध लगाने की मांग करूंगी।

यह है घटनाक्रम 
मुरादाबाद की युवती की शादी संभल के एक ट्रांसपोर्टर से 30 सितंबर 2015 को हुई थी। आरोप है कि दहेज में कार न देने को लेकर उसे प्रताडि़त किया और 24 दिसंबर 2015 को घर से निकाल दिया गया, तो वह मायके आ गई। शौहर ने तीन दिन बाद फोन पर तलाक दे दिया। समझौता की प्रक्रिया चली। दोबारा निकाह के लिए हलाला की शर्त सामने आई। फिर 24 दिसंबर 2016 को निकाह पढ़ाते वक्त जब पता लगा कि ससुर के साथ हलाला हो रहा है, तो उसने मना कर दिया।

दो मौलवियों के समझाने पर उसने हलाला किया। रातभर ससुर के साथ रही। सुबह तलाक हो गया। युवती के मुताबिक वह तीन महीना 10 दिन की इद्दत पूरी करने लगी। इद्दत के समय ही शौहर ने जबरन संबंध बनाए। वह गर्भवती हो गईं। बाद में शौहर से निकाह हुआ। उसे शक था कि बच्चा हलाला के समय का तो नहीं है। इसलिए वह बीवी का गर्भपात कराना चाहता था। बीवी नहीं मानी तो पंद्रह दिन कैद रखा। इसके बाद पुलिस पीडि़ता को छुड़ाकर ले गई। पीडि़ता ने मायके में बेटे को जन्म दिया जो अब दस महीने का है।

डीएनए टेस्ट को राजी पीडि़ता
पीडि़ता ने कहा कि औलाद किसकी है। यह सच सामने लाने के लिए वह डीएनए कराएगी। कहा कि मैं न्याय की यह लड़ाई लड़ूंगी। घुट कर जी ली, अब ऐसे और नहीं जीना है। जिंदगी बर्बाद करने वालों को सजा दिलाकर रहूंगी।

साभार दैनिक जागरण से

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