मैथिली भाषा को कोई खतरा नही है : राष्ट्रपति डा.यादव

Raspatiकैलास दास,जनकपुर, पुस ७ । राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव ने ११ वाँ अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन को सोमवार उद्घाटन करते हुए कहा कि बहुभाषा, बहुधार्मिक तथा बहुसाँस्कृतिक ही समृद्ध नेपाली साँस्कृति की परम्परा है ।

सभी जात जाति की भाषा, साँसकृति, भेषभूषा ही नेपाली राष्ट्रीय पहचान है । अनेकता के बीच एकता ही हमारी परम्परा है । उन्होने यह भी कहा कि सभी भेषभुषा, संस्कृति, रहनसहन, खानपान समान के कारण राष्ट्रीय एकता को बल मिलता है । मैथिली भाषा के विकास के लिए सरकार ने नेपाल विद्यापति पुरस्कार कोष स्थापना भी कीया है ।

इस बार की अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन में जो वक्ताओं ने मैथिली भाषा को नेपाल की दुसरी भाषा की प्राथमिकता दी जाए माँग किया है । नेपाल में सबसे ज्यादा नेपाली भाषा के बाद बोली जाती है तो वह मैथिली भाषा । और  मैं प्रयास करुगा कि नयाँ संविधान में दुसरी भाषा मैथिली ही होनी चाहिए ।

राष्ट्रपति डा. यादव ने नेपाल–भारत का पाँच करोड से ज्यादा व्यक्ति मैथिली भाषा बोलते है । इसलिए मैथिली भाषा के उपर किसी प्रकार की खतरा नही है उन्होने कहा । इसे आधुनिक प्रविधि से जोडने की आवश्यकता है । अन्तर्राष्ट्रिय सम्मेलन से भाषा साहित्य के माध्यम द्वारा नेपाल भारत बीच का सम्बन्ध और मजबुत होगा उन्होने विश्वास दिलाया ।

Raspati1राष्ट्रपति डा. यादव ने कहा कि मुल्क में परिवर्तन के बाद बनने वाला संविधन में सभी भाषा, सँस्कृति तथा भेषभूषा को नेपाली जनता को उचित सम्मान मिलेगा । संविधान निर्माण के लिए राजनीति दलो को सहमति के लिए हम पहल करेंगे ।

शिक्षा मन्त्री चित्रलेखा यादव ने भी मैथिली भाषा उपर नेपाल में किसी प्रकार के खतरा नही है दावी की ।

कार्यक्रम में राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव ने मैथिली भाषा विकास में विषेश योगदान देनेवाले प्राध्यापक सुनिल कुमार झा, संगीतकार गुरुदेव कामत, लोकचित्रकार कृष्ण कुमार कश्यप को  मिथिलारत्न और नेपाली भाषा में योगदान देनेवाले चन्द्रशेखर उपाध्याय, भोजपुरी साहित्य का विद्वान उमाशंकर द्विवेदी को मिथिला श्री से सम्मानित किया  । कार्यक्रम मे डा. रमानन्द रमण द्वारा लिखित मैथिली कथा नेपाल, मैथिली कथा नेपाल, एघारौं मैथिली सम्मेलन के तिरहूत नामक स्मारिका, रामभरोष कापडि भ्रमर द्वारा लिखित अहाँ जे कहलहुँ और डा. वैजनाथ चौधरी बैजुद्वारा लिखित दिल्ली सँ जनकपुर नामक कृति को राष्ट्रपति ने विमोचन किया था ।

अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन आयोजक समिति के संयोजक प्राज्ञ रामभरोस कापर भ्रमर की अध्यक्षता मे हुआ सम्मेलन का महासचिव डा. वैजनाथ चौधरी वैजु, डा. पशुपथि नाथ झा ने विचार राखा था ।

१३ बुँदे घोषणापत्र जारी मंगलवार सम्पन्न

११ वाँ अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन नेपाल और भारतीय क्षेत्र में मैथिली भाषा के विकास के लिए विभिन्न १३ बुँदे घोषणापत्र जारी कर सम्पन्न हुआ है ।

अतिप्राचीन भाषा मे से एक मैथिली भाषा राज्यसत्ता की उपेक्षा का कारण कमजोर हो रहे अवस्था में इसका संरक्षण करते हुए दोनो देश के मैथिली साहित्य का विद्वान एवं अभियानी ने अग्रसरता दिखाते हुए निर्णय किया है । सम्मेलन ने नेपाल में निर्माणाधिन लोकतान्त्रिक संविधान मे मैथिली सुनिश्चित होना चाहिए, जनकपुर राजधानी राजधानी होना चाहिए सहित घोषणा पत्र में रखा गया है ।

सम्मेलन के अन्तिम दिन कवि गोष्ठी का आयोजना किया गया था । साहित्यकार अयोध्यानाथ चौधरी की अध्यक्षता और साहित्यकार रामभरोस कापडि के आतिथ्य एवं कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा के कुलपति डा. देवनारायण झा को विशेष अतिथि में एक सौ से जयादा कविओं का कविता वाचन कीया गया।

कवि गोष्ठी के संयोजक काशीकान्त झा के संयोजकत्व में भारत का जनक, विष्णुदेवा सहित कवि ने कविता पाठ किया था । उसी प्रकार नेपाल का विजय दत्त मणी, राजाराम राठौट, जयशंकरनाथ झा, लालजी ठाकुर, कैलास दास, नरेश ठाकुर, सपना कर्ण, विद्याकर, विष्णुदेव झा, मन्दिाकिनी कर्ण, अमरकान्त ठाकुर, विजेता चौधरी, मनोज झा, रामभरत साह सहितका कविओं ने कविता वाचन किया था ।

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