मोदीजी का भ्रमण रद्द – पुर्णत: कुटनीति असफलता

modiसच्चिदानन्द मिश्र, काठमाण्डू ,२० नवम्बर, २०१४ । काँग्रेस और एमाले की सरकार जीत गई । वही हुआ जो सरकार चाहती थी । शुरुसे ही प्र म कोइराला और गृहमन्त्री गौतम चहते थे कि मोदीजी का भ्रमण मधेश मे नहीं हो । उनका मानना था कि अगर भ्रमण हो भी तो जैसे सरकार चाहती है वैसे ही हो । हुआ भी वैसा ही । सरकार ने मोदीजी का जनकपुर भ्रमण पर शिकंजा कसा और एक मन्त्री विमलेन्द्र निधि को नियुक्त किया व्यबस्थापन के लिये । मन्त्री महोदय बाहर से दिखा रहे थे कि वे भी मोदीजी का सम्बोधन खुलामन्च पर ही कराना चाहतें हैं । लेकिन अन्दर ही अन्दर उन्होंने सारी इन्तजाम एक बन्द कमरे मे कर रखा था । मोदी भ्रमण को जानकी मन्दिर के प्रांगण मे यानिकि  खुलामन्च का सम्बोधन को बन्द कमरे मे उन्होने सिमित कर दिया । इसपर आक्रोशित जनकपुरवासियों ने आन्दोलन ही छेड दिया । लोगों ने प्रधानमन्त्री सहित कई लोगो का पुतला जलाने की घोषणा तक कर दिया था । यहाँ तक कि कुछ लोगों ने मोदीजी को सडकपर रोक कर ही खुला मन्च पर लेजाने की चेतावनी भी दे दिया था । इसके आलावा सरकार व्दारा प्रायोजित मिडिया भी मोदी के खुलामन्च पर सम्बोधन के खिलाफ समाचार देने लगे । और तो और कान्तिपुर ने तो अपने सम्पादकीय मे लिख दिया कि मोदी का खुलामन्च पर सम्बोधन कुटनीतिक मर्यादा के विरुद्द है । इतना ही प्रयाप्त था, मोदीजी का भ्रमण रद्द होने के लिये । शायद नेपाल सरकार मोदीजी को नजरअन्दाज करके चलरही है । उसे मोदीजी की गहराई का अन्दाजा नहीं है ।

अब आरोप प्रत्यारोप का दौड शुरु है मन्त्री निधि ने २२ दलों के नेताओं को मोदीजी का भ्रमण रद्द कराने के लिये जिम्मेदार ठहरा दिया है । तो वहीं बृहतर जनकपुर के अध्यक्ष रामकुमार शर्मा ने सरकार को मधेश विरोधी कहकर भ्रमण रद्द का  जिम्मेदार ठहराया है । आन्दोलन जनकपुर मे हुआ लेकिन इसका खामियाजा भुगतना परा लुम्बनी और मुक्तिनाथ के लोगों को भी । गुस्सा दिखाने के लिये हो या नियत वस हो भारत सरकार ने मोदीजी का काठमाण्डू बाहर का सभी भ्रमण रद्द कर दिया है । यह निर्णय स्वगत करने योग्य है । अब देखना है कि नेपाल की सरकार इसको किस रुप मे लेती है ? विश्व मे मोदी का डंका बज रहा है । विश्वभर के लोग मोदी का भाषण सुनने को छटपटा रहें हैं । लेकिन नेपाल मे पहले से ही तय किया गया मोदी का सम्बोधन आज रद्द कर दिया गया है । क्या नेपाल की सरकार नेपाल की जनता को मोदीजी से अलग रखना चाहती है ? क्या विमलेन्द्र निधि का २२ दलों पर आरोप लगाना ही ऊचित है ? और इतना ही प्रयाप्त है ? क्या इतने मे मधेश की जनता को मनाया जा सकता है ? क्या एक वामदेव गौतम के ही नही चाहने से मोदी जैसे विश्वव्यापी व्यक्तित्व का भ्रमण रद्द हो सकता है ? ये सभी अनुत्तरित प्रश्नों का जवाब भविष्य देगा । फिलहाल यह कहा जा सकता है कि नेपाल की कुटनीति पुर्णत: असफल हो गयी है । और यह सरकार के लिये आगे के दिनों मे मुशिवत खडा कर सकती है । सार्क का ५ दिन बाँकी है । समय रहते सरकार नहीं सभंली तो इसका असर बहुत कुछ दिखा सकता है ।

 

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