मोदी का गुजरात माँडल और नेपाल की उम्मीदें

विनय दीक्षित:भारत सिर्फपडÞोसी मुल्क ही नहीं बल्कि नेपाल से घरायसी सम्बन्ध भी है, भारत की राजनीतिका असर नेपाली क्षेत्रों में भी देखनेको मिलता है, भारत नेपाल patrakarसम्बन्ध आपस में सहकार्य मूलक हैं लेकिन नेपाल की ओर से हमेशा यह आरोप लगता रहता है कि नेपाल की राजनीति भारत से संचालित है । भारत में जब भी सरकार फेर बदल होती है नेपाल के लिए कुछ नया होता, उसी प्रकार नेपाल में अस्थिर सरकार होना भी कुछ लोगोंका मानना है कि भारत ही उसका मुख्य कारक है । मोदी लहर ने नेपाल ही नहीं विश्वको प्रभावित किया है, भारतीय इतिहास में कोई एक पार्टर्ीीतने बहुमत के साथ जीत हासिल करे यह एक आर्श्चर्यचकित करने वाली घटना है ।
भारत में चुनाव होता है तो नेपाली नागरिकका जितना ध्यान उधर होता है उतना भारतीय पक्षका ध्यान नहीं होता । तर्राई क्षेत्र में अधिकाँश के पास तो भारतीय नागरिकता भी है, और वे लोग भारत के विभिन्न चुनावों में मतदान करने भी जाते हैं, भारतीय क्षेत्र में चुनाव होता है तो उसके पोष्टर बैनर नेपाली गावों में भी लगे मिलते हैं ।
कुल मिलाकर मोदी की जीत के बाद हिन्दुवादी लोग मानते हैं कि कमल थापा की राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टर्ीीेपाल मजबूत होगी और संभावना है कि नेपाल फिर हिन्दू राष्ट्र कायम हो । मुसलमान सोचते हंंै कि मोदी हिन्दुवादी होने के कारण उन्हे कठिनाई होगी । दोनों विचार लाजमी हैं लेकिन मोदी अब देश के प्रधानमन्त्री हैं और उन्हे सरकार की नीति नियम और संविधान के तहत अपनी योजनाएँ बनानी पडेगी, लोग यह भी समीक्षा कर रहे थे कि पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री नवाज सरीफ भारत नहीं आएँगे, लेकिन उनका आना और मोदी से आतंकवाद पर चर्चा करना भी एक सकारात्मक सन्देश देता है कि मोदी किसी धर्म, सम्प्रदाय या जाति विशेषको लेकर नहीं बल्कि पूरे देशको लेकर चलेंगे ।
नेपाल में मोदी की जीत के बाद एक नयाँ उमंग है, लोग विकास और सहयोग पर भी आशा लगाए हुए हैं । मोदीका गुजरात माडल शायद नेपालियों को भा गया है, वहाँ की तरह हर जगह का विकास होना चहिए यह आज पूरे भारत से मांग उठ रही है । मोदी ने बहराइच में चुनावी सभाको सम्बोधन करते हुए कहा भी था कि अब सिर्फगुजरात ही नहीं पूरे देशको गुजरात होना चहिए ।
पिछले दशक में गुजरात में तेजÞ आर्थिक विकास हुआ है. भारी औद्योगीकरण की वजह से गुजरात की अर्थव्यवस्था मे काफी सुधार हुआ । एक ऐसे देश में जहाँ बिजली कटौती आम बात है, वहा गुजरात सरकार अपने १८ हजÞार गांवों में २४ घंटे बिजली आपर्ूर्ति का दावा करती है. उसने और भी बुनियादी सुविधाओं में निवेश किया है, सैकडÞों मील सडÞकें बनी हैं और बंदरगाह भी बने हैं ।
अब सवाल यह उठता है कि क्या गुजरात के विकास माँडल को बहुत अधिक सफलता मिली है, जैसा कि नरेंद्र मोदी और उनके र्समर्थक दावा कर रहे हैं या वह केवल एक मिथक है, जैसा कि उनके विरोधी बता रहे हैं – और क्या भारत की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मदद करेगी – यह सवाल अब सिर्फभारतका सवाल नहीं रहा बल्कि पडÞोसी देश भी जवाब की तलाश मे हैं ।
नेपाल में भारतीय राजनीति के जानकार कुछ बरिष्ठ विश्लेषकों से हिमालिनी ने जानने की कोशिश की है कि मोदी की जीत के बाद नेपाल में सकारात्मक और नकारात्मक दिशाएँ क्या हो सकती हैं –

पहले तो हमारी राजनीति ठीक होनी चहिए, ताकि मोदी का विकास माडल नेपाल में भी लागू हो सके, दक्षिणी हवा का असर नेपाल में जल्द होता है तो जाहिर है कि मोदी का असर भी नेपाल में देखने को मिलेगा, उसके लिए नेपाल की राजनीति को एकर् इमानदार राजनीति के रूपमें उभर कर सामने आना पडÞेगा । आशा आपेक्षा जरुर है मोदी से ।
– झलक गैरे, केन्द्रिय सदस्य एवं मध्यपश्चिम इन्चार्ज
नेपाल पत्रकार महासंघ

मोदी के व्यक्तित्व के हिसाब से यह नहीं कहा जा सकता है कि मोदी नेपाल के लिए कुछ नहीं करेंगे बल्कि सामाजिक, साँस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक रूपसे पडÞोसी होने के कारण कुछ न कुछ असर जरूर होता है । गुजरात में मोदी ने जो अकल्पनीय विकास किया है उससे नेपाल में भी आर्थिक रूप से विकास होने की सम्भावना है, यहाँ के नेता यदि सक्षम हुए तो जरूर मोदी विकास माडलका असर नेपाल में भी देखनेको मिलेगा ।
– नीरज गौतम
सल्लाहकार, नेपाल पत्रकार महासंघ, बाँके

भारत के प्रधानमन्त्री के रूप में एक हिन्दुवादी नेता जरूर हैं लेकिन वहाँ की परराष्ट्र नीति प्रधानमन्त्री के विचार के हिसाब से परिवर्तन नहीं होती, नेपाल हिन्दू राष्ट्र था लोग आशा फिर लगा रहे हैं कि मोदी हिन्दू राष्ट्र के लिए सहयोग और र्समर्थन करेंगे, लेकिन सिर्फएक गलत आशा मात्र है । भारत की स्पष्ट नीति है, मोदी विकासवादी होने के कारण नेपाल में कुछ विकास की उम्मीद और संभावना जरूर है ।
– जे पाण्डे
पत्रकार, कान्तिपुर टेलिभिजन, नेपालगन्ज

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