मोदी के भ्रमण का भ्रम

modi modi projectजब से नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमन्त्री बने हैं तब से लगातार नेपाल की मिडिया में मोदी के भ्रमण को लेकर अपनी तरह से ही कयास लगाए जा रहे हैं । भाजपा की हिंदुत्व छवि और नेपाल के प्रति विशेष सहानुभूति रखने के कारण पहले यही अटकल लगाईं जाती रही कि शायद नरेन्द्र मोदी अपना पहला विदेश भ्रमण नेपाल से ही शुरू करेंगे । इसके पीछे मोदी का पडÞोसी देशो के साथ संबंध को ना सिर्फसुधारने बल्कि विशेष महत्त्व देने के लगातार आ रहे बयानों के कारण रहा । मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पडÞोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को निमंत्रण देकर इसकी पुष्टि भी कर दी थी । लेकिन जब मोदी के पहले विदेश भ्रमण की बात आई तो भूटान उनकी पहली प्राथमिकता में निकल कर सामने आया । भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अकबरुद्दीन के औपचारिक प्रेस वार्ता से कुछ घंटे पहले तक पहले विदेश भ्रमण को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हर्ुइ थी ।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह से लेकर संघ के अधिकारी तक सभी यही चाहते थे कि नेपाल से विशेष संबंध होने के कारण मोदी का पहला विदेश दौरा नेपाल से ही हो । मोदी भी इससे सहमत हो गए थे । लेकिन नेपाल की तरफ से आवश्यक तैयारी नहीं हो पाने और सरकार की तरफ से भी इसमे कोई खास दिलचस्पी नहीं लेने के कारण नेपाल के स्थान पर भूटान को प्राथमिकता दी गई । मोदी की तरफ से नेपाल भ्रमण की तैयारी किस कदर कर ली गई थी इसका एक उदाहरण भुटान भ्रमण के दौरान उनके मुख से नेपाल का बार बार उच्चारण होना था ।
भुटान के सफल भ्रमण के बाद से अब मोदी के नेपाल भ्रमण की चर्चा एक बार फिर से जोरों पर है । वैसे भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रधानमन्त्री मोदी के विदेश दौरे की जो फेहरिस्त र्सार्वजनिक की थी उसमे नेपाल कि यात्रा नवम्बर में बताई गई थी जब यहाँ दक्षिण एशियाई देशी के शिखर सम्मलेन में वो शिरकत करने वाले हैं । लेकिन नेपाल में र्सार्क शिखर सम्मलेन की तैयारी जिस मंद गति से चल रही है उसको देखते हुए तय समय पर यह सम्मलेन हो पाना असंभव सा लगने लगा है ।
भारतीय प्रधानमन्त्री के नेपाल भ्रमण को लेकर नेपाल की मीडिया में आए दिन कुछ ना कुछ खबर आ ही रही है । भगवान् पशुपतिनाथ में मोदी कि आस्था जग जाहिर है । शायद इसी को आधार बनाकर नेपाली मीडिया यह कयास लगा रही है कि मोदी श्रावण के किसी सोमवार को एक दिवसीय नेपाल भ्रमण पर आ सकते हैं । लेकिन सिर्फभगवान् कि पूजा करने homepage_main.rarके लिए मोदी नेपाल आएँगे यह संभव नहीं दिखता है । भाजपा के नेपाल सेल के प्रभारी अजित कुमार कहते हैं कि उनका पूरा प्रयास है कि मोदी समय निकाल कर नेपाल भ्रमण करें लेकिन वो एक प्रधानमन्त्री भी हैं इसलिए बिना किसी एजेंडे के उनका नेपाल भ्रमण नहीं हो सकता है । अजित कुमार जोडÞते हैं कि भाजपा नेपाल के साथ विशिष्ट संबंधों के कारण उनके र्सार्थक भ्रमण कि कोशिश में जुटा हुआ है । ताकि मोदी के नेपाल भ्रमण के समय भूटान की ही तरह वहां के लोगों के लिए भी अच्छे दिन वाले संकेत मिल सके । वाकई में भारत के प्रधानमन्त्री का नेपाल भ्रमण सिर्फमंदिर में पूजा करने के लिए तो नहीं हो सकता है । आखिर क्या कारण है कि पिछले १० वर्ष में किसी भी भारतीय प्रधानमन्त्री का नेपाल भ्रमण नहीं हो पाया – भारत के निवर्तमान प्रधानमन्त्री डा मनमोहन सिंह अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में नेपाल भ्रमण के काफी इच्छुक थे लेकिन नेपाल सरकार की तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण ही यह संभव नहीं हो पाया । क्या है कारण कि भारतीय प्रधानमन्त्री का नेपाल भ्रमण नहीं हो पा रहा है और भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी के नेपाल भ्रमण की क्या तैयारियां सरकार कर रही है – इस बारे में नेपाली विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आधिकारिक रूप से तो कुछ भी कहने को तैयार नहीं होते लेकिन विदेश मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि नेपाल की कमजोर राजनीतिक इच्छा शक्ति और ‘वेल प्लानिंग’ के अभाव में भारतीय प्रधानमन्त्री का भ्रमण अनिश्चित बना हुआ है ।
काठमांडू स्थित भारतीय राजदूतावास के अधिकारियों का कहना है इतने बडÞे देश के प्रधानमन्त्री का नेपाल भ्रमण इसी तरह से नहीं होता है उसके लिए व्यापक तैयारियां करनी पडÞती है और यह तैयारी नेपाली पक्षों से होनी चाहिए । भारतीय प्रधानमन्त्री सिर्फमंदिर में मत्था टेकने नहीं आएँगे । वो आएँगे तो नेपाल के लिए बडÞी सौगात लेकर आएँगे और उसके लिए नेपाल को सिर्फअपने भाषणों में नहीं बल्कि जमीनी तौर पर तैयारी करनी होगी । भारत ने नेपाल पुलिस के लिए एक प्रशिक्षण प्रतिष्ठान निर्माण करने का प्रस्ताव किया है लेकिन अभी तक नेपाल इसके लिए तैयारी नहीं कर पाया है । इसके अलावा भारत के सहयोग से कब का बन कर तैयार हो चुकी वीर अस्पताल ट्रामा सेंटर जो अभी भी उद्घाटन की प्रतीक्षा में है उसकी तैयारी पूरी नहीं हो पाई है । नेपाल में अभी तक सुपर्ुदगी संधि को लेकर राजनीतिक सहमति नहीं बन पाई है । नेपाल में अभी तक सरकार इस बात पर सहमति नहीं जुटा पाया है कि कोई बडÞा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट भारत सरकार के सहयोग से निर्माण किया जाए । जब किसी बात के लिए नेपाल सरकार की तैयारी है नहीं और नेपाल सरकार किसी भी योजना के लिए यहाँ राजनीतिक सहमति नहीं जुटा पा रहा है तो फिर भारतीय प्रधानमन्त्री का भ्रमण किसलिए होना चाहिए- नेपाल में सरकार नाम की कोई चीज है जो अपने कूटनैतिक रिश्ते के लिए संजीदगी से सोचता हो या कुछ करने की सोच रखता हो इस बात की कभी अनुभूति ही नहीं हो पाई है । चाहे वो नेपाल के प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला का दिल्ली भ्रमण हो या फिर चीन भ्रमण । दोनों ही अवस्था में उनका कमजोर नेतृत्व साफ दिखाई दे गया ।
भारतीय विदेश मंत्रीसुषमा आएंगी नेपाल
भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जल्द ही नेपाल भ्रमण पर आने वाली हैं । साउथ ब्लाँक उनके नेपाल भ्रमण की जोर शोर से तैयारी कर रहा है । वैसे उनका भ्रमण कुछ पहले भी होने की संभावना है । भारत में मोदी सरकार के द्वारा पडÞोसी देशों के साथ संबंध के नए आयाम को गढÞने की कोशिश में जुटा विदेश मंत्रालय अपने विदेश मंत्री के नेपाल भ्रमण को सफल बनाने की हर संभव कोशिश कर रहा है ।
वैसे तो नेपाल भारत के बीच इस समय किसी भी प्रकार के समझौते या संधि होने की उम्मीद दिखाई नहीं दे रही है इसलिए उनका यह भ्रमण सिर्फराजनैतिक मुलाकातों में ही सिमटा रहेगा । नेपाल के प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला के नेपाल आने के बाद से सुषमा स्वराज के नेपाल भ्रमण की तारीख का ऐलान कर दिया जाएगा ।
काठमांडू में भी भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भ्रमण को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है । पतंजलि योग पीठ नेपाल के प्रमुख शाल्रि्राम सिंह ने बताया कि पूरे वैदिक रीति रिवाज और मंत्रोच्चार के बीच सुषमा स्वराज का भव्य रूप से नागरिक अभिनन्दन किया जाएगा । जिसमे करीब सौ से अधिक सभासद, सरकार के एक दर्जन मंत्री और अनेक उच्च ओहदे के पुलिस, सैन्य और सरकारी कर्मचारी उपस्थित रहेंगे ।
इसी साल नवम्बर में काठमांडू में प्रस्तावित र्सार्क शिखर सम्मलेन में भारतीय प्रधानमन्त्री के भ्रमण से पहले यहाँ कि वस्तुस्थिति को समझने के लिए भी भारतीय विदेश मंत्री स्वराज का यह भ्रमण महत्वपर्ूण्ा माना जा रहा है ।
वैसे र्सार्क शिखर सम्मलेन के नवम्बर से टलने की पूरी संभावना है क्योंकि अभी तक जिस नेपाल सभागृह में र्सार्क शिखर सम्मलेन करने का मन सरकार ने बनाया है उसके पुनर्निर्माण के लिए कोई भी काम शुरू नहीं किया गया है । इसके साथ ही शिखर सम्मलेन के मद्देनजर काठमांडू की सडÞक व्यवस्था में भी तय समय तक पूरे सुधार होने की संभावना कम ही है ।
नेपाल भारत के राजनीतिक संबंध को नजदीक से देखने वाले एक वरिष्ठ विश्लेषक का कहना है कि भारतीय विदेश मंत्री का नेपाल भ्रमण इसी बात के लिए होगा कि आखिर किन कारणों से भारत के प्रधानमन्त्री मोदी नेपाल भ्रमण पर नहीं आ सकते हैं और यह भी कि र्सार्क शिखर सम्मलेन भी तय समय पर नहीं होने के बाद भारतीय प्रधानमन्त्री का नेपाल भ्रमण और आगे ना टल जाए ।

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