Thu. Sep 20th, 2018

मोदी के स्वागत में जनकपुर दुलहन की तरह सौन्दर्याभिमुखी होने लगी है : अजय कुमार झा

अजय कुमार झा, जनकपुरधाम | नेपाल जैसे एतिहासिक देस के नेपाली जैसे वौने बुद्धि के जनता को गरिमा मंडित करने आ रहें सर्वमान्य, विश्वप्रतिष्ठित, महामानव, युगपुरुष भारत के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र भाई दामोदर दास मोदी जी के सम्मान में प्रदेस नंबर दो के जनता और खासकर मधेसी मूल के नागरिक अपना तन मन धन समर्पित कर इस यात्रा को अविस्मरणीय और ऐतिहासिक रुप प्रदान करने हेतु अद्वितीय रुपमे स्वागत तथा नागरिक अभिनन्दन का कार्यक्रम आयोजना कर चुके हैं। जनकपुर नगर को जिस प्रकार राजा जनक ने अयोध्यावाशियों के स्वागत और सम्मान में सीता विवाह के समय सजाया था। उसी प्रकार दुलहन की तरह जनकपुर मोदी के स्वागत में सौन्दर्याभिमुखी होने लगी है।

गाव गाव से लोग जनकपुर पहुचने के लिए उतावले नजर आ रहे हैं। बारह बीघा रागाशाला को मोदी जी के सम्मान में नागरिक अभिनन्दन हेतु विशेष रूप से सजाया जा रहा है। मैं देख पा रहा हूँ, जिस प्रकार मंत्री के साथ बैठने बाले साधारण जन भी कुछ पल के लिए महिमा मंडित हो जाते हैं। वैसे ही उस दिन कुछ लोग जिन्हें मधेसी घृणा की दृष्टि से देखते हैं; मोदी के कारण वो भी सम्मानित हो जाएंगे। परन्तु नेपाली होकर पाक और चीन से हृदय मिलाने बाले तथा भारत को गाली देनेवाले नेपाल के मुठ्ठीभर बौने मानसिकता और क्षुद्र बुद्धि के तथाकथित राष्ट्रवादी लोग मोदी के इस यात्रा से नाखुस ही नहीं आक्रोशित भी दिखाई दे रहे हैं। बेचारे! कुछ कर भी तो नहीं सकते। क्योंकि अब देस संघीय गणतंत्र है , न की राजतंत्र और तथाकथित प्रजातंत्र। कैसी बिडम्बना है! जब नेपाली लोग भूकंप से मर रहे थे तब मोदी ने बचाया। जब माओवादी के कारण देस डूबने लगा था तब भारत ने समझौता करबाया। जब राजा ज्ञानेंद्र ने प्रजातंत्र की हत्या की तो भारत ने कर्ण सिंह को भेजकर प्रजातंत्र पुनर्वहाली करबाया। लेकिन फिर भी वौने बुद्धि के धनि नेपाली विद्वानों और नागरिकों को विश्व में निरंकुशता और आतंक के प्रतिक देसों से ही मधुर सम्बन्ध स्थापित करने में मजा आ रहा है। वै

से इनमे होस ही कितना है! हिंदी के साहित्यों को पढ़कर ज्ञानी बने। हिन्दुस्तानी विद्वानों ने नेपाली पढ़ना सिखाया,लिखना सिखाया, और बोलना सिखाया। जिसका प्रमाण बनारस में स्थित नेपाली भाषा प्रकाशन केंद्र है। हिंदी साहित्यों को नेपाली में उल्था कर साहित्यकार बने, कवी बने, निबंधकार बने, डाक्टर, इंजिनियर,शिक्षक,प्राध्यापक,प्राविधिक,गायक, नर्तक….क्या क्या लिखूं सब बने !अरे,आज नेपालियों में जो कुछ भी गुण और ज्ञान है, वो सब भारत के कृपा के कारण है। फिरभी भारतीय प्रधानमंत्री जो विश्व मानपटल पर हिमालय की भाँती शोभायमान हैं,उस महाशुर्य को दीप दिखा रहे हो! अरे थोड़ा सा भी जमीर ज़िंदा है तो उनके भव्य स्वागत में पंक्तिबद्ध हो के इस जीवन को धन्य कर लो। वरना पूरी जिंदगी पश्चाताप के शिवाय और कुछ हाथ नहीं लगने वाला है।

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sir kunai bela tapaile hamilai Nepali padhaunuvako thyo 15 barsa agadi. aja Nepali haru lai nai eti gali garera Indian ko gun gan gako dekhda afai dekhi ghin airako cha tapai jasto chudra byakti sanga kunai bela Nepali padhiecha vanera. shame on you.