मोदी को नेपाली सत्ता नादान समझती है, वे जुडना चाहते हैं सरकार रोकती है

modiश्वेता दीप्ति,काठमाण्डू, १९ नवम्बर । अन्ततोगत्वा सरकार की नीति और नीयत सामने आ ही गई  । वृहस्पतिवार को सार्क तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था के सम्बन्ध में हुई बैठक में साँसदों द्वारा किए गए जवाब में प्रधानमंत्री सुशील कोईराला अ‍ैर गृहमंत्री वामदेव गौतम ने यह जानकारी दी कि तीर्थाटन के क्रम में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी का सार्वजनिक भाषण नहीं होगा सिर्फ अभिनन्दन होगा । इस खबर ने मधेशी जनता को एक बार फिर मायूस कर दिया है । कल तक सुरक्षा और सुविधा का हवाला देकर भारतीय प्रधानमंत्री की जनकपुर यात्रा को रोकने की भरपूर कोशिश की जा रही थी । आज उनकी चिंता का कारण स्पष्ट नजर आ रहा है । चिन्ता मोदी जी की सुरक्षा या सुविधा की नहीं थी वरन् असल चिन्ता उनके भाषण और सहयोग की थी जो खुलकर सामने आ गयी । सत्तासीन पार्टी की चिन्ता अभी उभर–उभर कर सामने आ रही है । सम्भव है कि उसमें कोई कूटनीतिक समस्याएँ हों किन्तु उससे अधिक समस्या उनके अन्तःमन की है ।

राजधानी में भाषण होता है तो सही है, पहाड़ या पशुपतिनाथ को उपहार मिलता है तो उसकी प्रशंसा मुक्त कंठ से होती है किन्तु जब मधेश का सवाल आया तो सौ अड़चनें सामने हैं । और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि हमारे साँसद और मंत्री का सामान्य ज्ञान कितना तीक्ष्ण है कि उन्हें नेपाल की विरासत, उसकी पहचान और संस्कृति का केन्द्र जनकपुर और लुम्बिनी एक टोला और महल्ला से ज्यादा कुछ नहीं लगता क्या ये मधेश की धरती का सही आकलन है ? इस सवाल का जवाब तो उन्हें देना ही चाहिए । हमारे प्रधानमंत्री का कमजोर वक्तव्य कि अगर  कोई घूमना चाहता है तो कैसे रोक दें ? क्या ऐसा नहीं लगता कि इनके वश में होता तो यह भी हो जाता किन्तु शायद कहीं थोडी नैतिकता इनमें बाकी है । रहा सवाल सम्बोधन का तो यह किसी राष्ट्र के लिए नई परम्परा नहीं है । स्वयं नेपाल के कई बड़े नेता भारत जाकर वहाँ की जनता को सम्बोधित कर चुके हैं जिनका उद्देश्य वहाँ के नेपाली भाषाभाषी जनता के करीब जाना और उनसे जुड़ना रहा होगा । गिरिजाप्रसाद कोइराला हो, माधव नेपाल हों, प्रचण्ड हों या बाबुराम भटराई हों (लिस्ट और भी लम्बी है) इन सबने कभी ना कभी पटना, वाराणसी, कोलकाता, दार्जिलिंग आदि जगहों पर सार्वजनिक भाषण किया है तो आज नेपाल की सरकार इतनी परेशान क्यों हो गई है ? आखिर कौन सा भय इन्हें यह कदम उठाने को बाध्य कर रहा है ?  

अनेक राष्ट्रों में मोदी जा चुके हैं और अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व और वक्तव्य का जादू चला चुके हैं । किसी देश को यह डर नहीं लगा कि मोदी के भाषण का उनके देश की जनता पर क्या असर होगा । किन्तु यहाँ डर है, आखिर यह डर क्यों है ? या तो आप अपने ही चेहरे को आइने में देखने से डर रहे हैं या फिर मधेश की जनता को इतना कमजोर समझ रहे हैं जिस पर किसी अतिथि के भाषण का इतना अधिक असर हो जाएगा कि उनकी अपने देश के प्रति वफादारी कम हो जाएगी । और अगर सत्ता को इस स्थिति का भय है तो उन्हें यह भी समझना चाहिए कि असंतुष्टि ही ऐसे बातों की जड़ होती है और यह जड़ तो मधेशी जनता के मन में बहुत पहले से है जो कदाचित वृक्ष बनने के क्रम में है । अगर इसे दूर किया गया होता तो किसी अतिथि को रोकने और बोलने ना देने के लिए इतनी चालें नहीं चलनी पड़ती । आज अगर यही सम्बोधन मधेश में ना होकर वहाँ होता जहाँ सत्ता चाहती है तो कोई मर्यादा, कोई नीति और नियम का सवाल नहीं उठाया जाता यह तो तय है ।

मोदी की नीति को विश्व सराह रहा है और वो इतने नादान नहीं हैं कि अपने भाषण में किसी अनुचित, या किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र की मर्यादा और सम्मान के विपरीत बात करेंगे यह डर सिर्फ आपकी अपनी सोच का है, कहते हैं साँच को आँच नहीं । किन्तु जहाँ यह नहीं है वहाँ डर तो लाजिमी है । भाषण या तोहफे से मधेश की स्थिति नहीं बदल नहीं जाएगी पर मोदी इसी बहाने लोगों से जुडना चाहते हैं जिसे हर सम्भव रोकने की कोशिश में सत्ता लगी हुई है । मानें या ना मानें मोदीमय तो विश्व हो चुका है । सत्ता सम्बोधन से भले ही रोक दें किन्तु इससे सत्ता की नीयत में जो खलल है उसका संदेश तो विश्व के सामने अवश्य जाएगा और जाना भी चाहिए तभी तो नेपाल में मधेश और मधेशी जनता अवहेलना के बावजूद क्या महत्व रखते हैं इससे विश्व समुदाय परिचित हो पाएगा । सरकार को समझना चहिये कि मोदी उतने नादान नहीं है जितना नेपाल की सरकार समझती है ।

जहाँ तक मधेश और मधेशी जनता का सवाल है तो लगता यही है कि—

फिर धीरे धीरे यहाँ का मौसम बदलने लगा है,

वातावरण सो रहा था अब आँख मलने लगा है ।

मधेश सजग है अपने और अपने अधिकार के लिए, रोकने की चाहे कितनी भी कोशिशें कर ली जाय पर अब ये आँखें बन्द नहीं होंगी । मोदी के भाषण और तोहफों से मधेश को बचाने की कोशिश की जगह, खुले दिल से अपनी संस्कृति और परम्परा का निर्वाह करें जहाँ यह कहा गया है कि अतिथि देवो भवः ।

 

 

 

 

 

 

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: