मोदी जी मधेश आ रहे हैं !!! क्या अच्छे दिन भी ला रहे हैं –

पंकज दास:३ नवंबर को नेपाल गृहसचिव सुरक्षा और खुफिया विभाग के प्रमुखों को साथ लेकर जनकपुर पहुंचे थे । उसी दिन भारतीय राजदूत रंजीत राय भी अपने कुछ अधिकारियों के साथ जनकपुर में मौजूद थे । नेपाल सरकार में मंत्री रहे बिमलेंद्र निधि और जनकपुर के कई सभासद भी वहां काफी व्यस्त दिख रहे थे । सुरक्षा बलों की गाडिÞयाँ जनकपुर की तंग गलियों से लेकर भारतीय सीमा नाका तक धूल उडÞाती नजर आ रही थी । सीमा पर रहे एसएसबी के जवान और भारतीय सुरक्षा अधिकारी भी काफी व्यस्त दिखाई दे रहे थे । यह सब नजारा उस शख्स के आगमन की तैयारी के लिए था जो आज विश्व नेता बनने की कतार में खडÞा है । यह सब तैयारियां भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जनकपुर आगमन को लेकर हो रही थी । उनके जनकपुर भ्रमण को लेकर सरकार को यह चिंता थी की कैसे उनके भ्रमण को बिना किसी बाधा बिघ्न के सफल बनाया जाए । भारतीय दूतावास को यह चिंता थी की कैसे अपने प्रधानमंत्री के इस दौरे को ऐतिहासिक बनाया जाए और सुरक्षा बलों को दुनिया के र्सवाधिक थ्रेट में रहे मोदी की सुरक्षा व्यवस्था को कैसे चाक चौबंद बनाया जाए ।modi
लेकिन इन सबसे दूर धनुषा और महोत्तरी के गाँव के लोग इन सब चिंता से दूर इस बात को लेकर खुश थे कि चलो अब तक जो भी हुआ लेकिन अब शायद उनके दिन भी फिरने वाले हैं । जिस अच्छे दिन का अनुभव सीमा पार के लोग कर रहे हैं या करने वाले हैं उसी अच्छे दिन के असर का सुखद अनुभव सीमा के इधर के लोग भी करना चाहते हैं । आखिर इतना हक तो बनता है उनका । विकास और तरक्की की जो बयार दक्षिण में बह रही है उस हवा का झोंका इधर भी आए । मोदी से सिर्फभारत की सवा करोडÞ जनता को ही उम्मीद नहीं बल्कि उनके पडोस में रहने वाले तीन करोडÞ नेपाली जनता को भी है । और सबसे अधिक उम्मीद भारत के सबसे करीबी रहे सवा करोडÞ मधेशी को है । क्योंकि नेपाल और भारत में यदि धार्मिक, राजनीतिक और कूटनीति संबंध है तो मधेश और भारत में पारिवारिक संबंध है । नेपाल और भारत के बीच जिस पारिवारिक और बेटी-रोटी के संबंध पर दोनों देश गर्व करते हैं वह संबंध दरअसल मधेश के साथ ही है । मधेश के साथ भारत का खून का रिश्ता कोई आज का नहीं बल्कि यह त्रेतायुग से ही चला आ रहा है । महापुरुष कहे जाने वाले भगवान राम के जमाने से ही हमारे बीच पारिवारिक रिश्ता बंधता आया है जो परंपरा आज भी जारी है ।
नरेन्द्र मोदी ने अपने पहले नेपाल दौरे के समय दोनों देशों के संबंधों की व्याख्या करते हुए संसद में कहा था कि जब हिमालय से बर्फीली हवाएं चलती हैं तो ठण्ड हमें भी महसूस होती है और जब सूरज यहाँ निकलता है तो गर्मी की तपन में हम भी जलते हैं । हो सकता है नेपाल और भारत के बीच ऐसे संबंध हों लेकिन मधेश के साथ भारत का संबंध इससे भी एक कदम आगे है । जब भारतीय क्रिकेट टीम की जीत होती है तो गाली मधेशी जनता को खानी पडÞती है । जब भारत किसी खेल में नेपाल को हरा देता है तो भद्दी गालियों का अपमान मधेशी जनता को ही सहना पडÞता है । और आज से नहीं बल्कि दशकों से ऐसे अपमान सहने का आदि हो गया है मधेश । शायद इसी इन्तजार में कि कभी दिन बदलेंगे और कभी तो अच्छे दिन आएँगे ।modi in janakpur
पिछली बार ही मोदी के जनकपुर और लुम्बिनी जाने का कार्यक्रम तय किया गया था । लेकिन सुरक्षा कारण को लेकर अंतिम समय में उनका यह दौरा रद्द कर दिया गया था । इस खबर से मधेश की जनता में मायूसी थी और इस बात को मोदी अच्छी तरह भांप गए थे । शायद इसलिए उन्होंने पिछली बार ही संसद से ही अपने अगले नेपाल भ्रमण के समय जनकपुर और लुम्बिनी का भ्रमण कर मधेश की जनता की अपेक्षा को जीवित रखा था । राजनीति के चतुर खिलाडÞी और दूरदृष्टि रखने वाले नरेन्द्र मोदी नेपाल के मिजाज को अच्छी तरह समझते हैं । वो नेपाल के पहाडÞ में फैले भारत विरोधी मानसिकता को भी समझते हैं और मधेश की जनता की भारत से अपेक्षा को भी जानते हैं । शायद इसलिए अपने पिछले दौरे में उन्होंने नेपाल में रहे भारत विरोधी मानसिकता को चीरने का काम किया और इसमें वो काफी हद तक कामयाब भी हुए । नेपाल की संसद में दिए गए मोदी के भाषण के बाद यहाँ के पहाडÞी समुदाय के लोग काफी प्रभावित हुए और उनके मन में भारत को लेकर जो कुछ आशंकाएं थी वह दूर हो गयी । उनके पहले नेपाल भ्रमण से एक बात तो तय है कि लोग भारत को थोडा बहुत कोस भी ले लेकिन मोदी के प्रशंसक जरूर बन गए हैं जो भारत की नजर से काफी सकारात्मक है ।
पिछली बार संसद से मधेश शब्द का प्रयोग नहीं करना उनकी रणनीति का हिस्सा था । हालांकि बिना मधेश का नाम लिए मोदी ने वो सब कुछ कह दिया था जो कि मधेश को उनसे अपेक्षा थी । लेकिन यहीं के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी नेता इस संकेत को समझ नहीं पाए और दुष्प्रचार करने की कोशिश भी की । लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ । मधेश के कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के पक्षधर और वामपंथी विचारक भी मोदी के भाषण से खुश नहीं थे और दबे जुबान ही सही उनकी आलोचना करने से पीछे नहीं हटे । लेकिन बावजूद इसके आम मधेशी जनता में मोदी को लेकर उम्मीदें अभी भी बरकरार है । मधेशी जनता को आज भी यह लगता है कि मोदी के प्रस्तावित जनकपुर और लुम्बिनी यात्रा के बाद यहाँ के राजनीतिक हालात बदलने वाले हैं । खुद को विकास पुरूष के रूप में स्थापित कर चुके नरेन्द्र मोदी के मधेश भ्रमण में विकास की कई परियोजनाओं की घोषणा करने की तैयारी चल रही है । मधेश के कई जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्ूवाधार विकास की धारा बहने की उम्मीद है, लेकिन मधेश की जनता शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास से परे कुछ और ही चाहती है । अपने सम्मान और पहचान के लिए दशकों से संर्घष्ारत मधेशी जनता मोदी से सिर्फइतना चाहती है कि वो उनके इस संर्घष्ा को अपनी आवाज बनाएं । उनके इस लडर्Þाई को जायज ठहराए । हमें पूरा यकीन है कि उनका र्सार्वजनिक रूप से मधेश के अधिकार और पहचान के बारे में बोलने से उसका असर होगा और जो संर्घष्ा दशकों से चली आ रही है उस संर्घष्ा को करने में मधेशी जनता का हौसला बढÞ जाएगा । यह लडर्Þाई तो मधेशी जनता को खुद ही लडÞनी है लेकिन मोदी जैसे शख्स यदि एक बार र्सार्वजनिक तौर पर उसका जिक्र कर देते हैं तो यहाँ के शासक वर्ग पर थोडÞा दबाब तो पडेगा ही ।
नेपाल इस समय अत्यंत ही संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और मधेश में एक अजीब तरह की कशमकश है अपने आने वाले भविष्य को लेकर । एक तरफ यहाँ शासक वर्ग के द्वारा उसके अधिकारों को कुचलने की कोशिश की जा रही है तो दूसरी ओर मधेशी राजनीति के पर कतरने का षड्यंत्र भी चल रहा है । ऐसे में मधेश आने वाले दिनों में काफी उठा पटक और अशांत होने की अवस्था में आ सकता है । नेपाल की हाइड्रोपावर परियोजना, अस्पताल और स्कूलों की ऊँची-ऊँची इमारतें, पक्की सडÞक, छात्रों को मिलने वाला स्काँलरशीप से मधेश में लगने वाली आग को शांत नहीं किया जा सकता । और मोदी जी खुद कहा करते हैं कि भारत तभी शांत और समृद्ध बन सकता है जब उसका एक एक पडÞोसी में सुख और चैन हो । भारत के सबसे नजदीक और खुली सीमाओं में रहने वाला मधेश तो सिर्फतभी शांत हो सकता है जब उसे संविधान के द्वारा राजनीतिक अधिकार मिल जाए और उसकी पहचान को कोई संकट नहीं हो । नेपाल में मधेशी को बार बार अपनी राष्ट्रीयता नहीं बतानी पडÞे और मधेशी जनता को बार बार खुद के राष्ट्रवादी होने का सबूत नहीं देना पडÞे ।

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