मोदी भ्रमण रद्दः मधेश विरुद्ध का षड्यन्त्र

कलैश दास:काँग्रेस-एमाले की संयुक्त सरकार जो चाहती थी वही हुआ ।
भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का ‘जनकपुर भ्रमण’ हो यह सरकार भी नहीं चाहती थी । इसका संकेत तो पहले ही मिल चुका था । फिर भी एमाओवादी सहित २२ दलीय मधेशी मोर्चा ने अपनी शक्ति की आजमाइश की । बन्द, हडÞताल, अनशन तक किया । नारा जुलूस एवं ज्ञापन पत्र तो आम सी बात थी । आरोप-प्रत्यारोप ही नहीं वीरगञ्ज स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास को भी गुहारा, लेकिन सब असफल रहा । यह तो होना ही था, क्योकि नेपाल में जो भी शासन आया, वर्चस्व खस शासको का ही रहा । खुली आँखो से देखे जाने वाले सपने को पूरा करने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है, और वह शक्ति अभी भी उन्हीं के पास है । फिर सपना तो सपना ही होता है ।

भ्रमण स्थगित होना दभाग्य
चन्दा चौधरी
अध्यक्ष, नेपाल-भारत महिला मैत्री समाज
भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी का जनकपुर और लुम्बिनी भ्रमण स्थगित होना दर्ुभाग्य है । मधेश के साथ बहुत बड विभेद हुआ है । जनकपुर का विकास भी नेपाल का ही विकास है सरकार नें ऐसा नहीं सोचा । नेपाल के तत्कालीन प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टर्राई जेनयु में, राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव का बनारस के विद्यालय में र्सार्वजनिक भाषण देना कूटनीतिक मर्यादा हो सकती है तो मोदी जी का र्सार्वजनिक भाषण कुटनीतिक मयार्दा का उल्लघंन कैसे हुआ – विमलेन्द्र निधि को भ्रमण की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी । उस क्षेत्र के नेता होने से भी निधि को इस भ्रमण को सफल कराना था लेकिन वो चूक गए । एमाओवादी और मधेशवादी दलों के कारण भ्रमण को रद्द किया गया ये बात पूरी तरह से गलत है । ये आरोप लगाकर सरकार स्वयं को दोषमुक्त कर रही है । नेपाल-भारत महिला मैत्री समाज की पहल से तर्राई के ग्रामीण जिलांे के गरीव छात्र/छात्रो में दो हजार र्साईकिल वितरण किए जाने का कार्यक्रम था । नेपाली मीडिया नें इसबात को नाकारात्मक तरीके से फैलाया इस पर हमारी घोर आपत्ति है । लेकिन सरकार ने इस भ्रमण को रोककर खोखला राष्ट्रवाद का पर््रदर्शन किया । भारत अगर नेपाली सेना को हेलिकाप्टर देता है तो राष्ट्रवाद और मधेश के बच्चों को साइकिल देता है तो राष्ट्रवादी नहीं – गृहमन्त्री बामदेव गौतम का जनकपुर में र्सार्वजनिक भाषण और साइकिल वितरण नहीं होगा ऐसा कहना उचित नहीं था ।
-हिमालिनी के लिए विनय कुमार से हर्ुइ बातचित के आधार प

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दक्षिण एशिया का शक्तिशाली राष्ट्र भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जनकपुर भ्रमण में आने वाले हैं, इस खबर ने जनकपुरवासियों को कई सपने दिखाए । उन्हें लगा कि अब जनकपुर विश्वमानचित्र पर अपनी जगह बना लेगा और बहुत जल्द जनकपुर विश्व सम्पदा सूची में सूचीकृत होगा । ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी जनकपुर जो वर्षों से राज्य द्वारा ही उपेक्षित है, उसके विकास के दरबाजे खुलेंगे । यहाँ के मठ-मन्दिर और सांस्कृतिक धरोहर विश्व के मानचित्र में दर्ज हो जाएंगे । देश-विदेश के लोग यहाँ आएँगे । यहाँ विश्व भर के हिन्दू भले ही न आए हों, लेकिन सञ्चार मध्यम में तो जनकपुर चर्चित हो ही जाएगा । किन्तु यह सोच, सोच ही रह गई ।
नेपाल में मधेश और खस शासक -पहाडÞी समुदाय) बीच का द्वन्द हमेशा चलता आ रहा है । यहाँ तक कि वे दूसरे का विकास भी नहीं देखना चाहते ।  भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को किसी ने जनकपुर भ्रमण के लिए आग्रह नहीं किया था । उन्होने स्वयं सावन १८ गते नेपाल के संविधानसभा को सम्बोधन करते हुए कहा था- अगली बार जब नेपाल आऊँगा तो जनक और सीता माता के दर्शन करुँगा । उसी समय से खस शासक ने शायद मन बना दिया था कि यह नहीं होने देना है ।  अगर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जनकपुर जाएँगे तो निश्चित है, वहाँ विकास की बात करेंगे । जो बजट सरकार द्वारा आना चाहिए, वो नहीं हो पाएगा और वहाँ का विकास वहीं के किसी संस्था द्वारा करवाया जाएगा । जब मधेश सम्पन्न होगा, मधेशी में जनचेतना आएगी फिर हमारी सत्ता मुश्किल में  पडÞ सकती है । सत्ता कब्जा भी तो मधेशी जनता के बल पर ही करते हैं । इसलिए मोदी का जनकपुर भ्रमण रोकना नितान्त आवश्यक समझा गया । मोदी जी का जनकपुर भ्रमण  लाभकारी होगा, सरकार इससे अनभिज्ञ नहीं थी । जनकपुर विकास के लिए भारत सरकार द्वारा पाँच अर्ब सहयोग राशि की बात आ चुकी थी । नेपाल-भारत बीच सडÞक, रेल मार्ग तथा अन्य समझौता कार्यान्वयन होने की सम्भावना भी दिखती थी । भारत और मधेश की सँस्कृति ऊँचाई छूने वाली थी । कहीं ना कहीं उन्हें डर था कि मोदी भ्रमण से मधेश को जो फायदा होगा, उससे उनके मन में भारत के प्रति जो कडÞवाहट है वह कम हो जाएगी और यह सत्ता के पक्ष में नहीं होगा और हुआ भी वही । मोदी के भ्रमण रद् होने की खबर ने एकबार फिर मधेश के मन में इस भावना को बल दे दिया कि भारत सिर्फअपने फायदे के लिए पहाडÞ को सहायता कर सकता है तर्राई का नहीं । किन्तु इसके पीछे की भावनाओं को भी परखने की आवश्यकता मधेश को है । सत्ता पक्ष अपनी साजिश में सफल हुआ ।
भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का जनकपुर भ्रमण रद्द होने के पीछे, कारण जो भी बताया गया हों पर पब्लिक अपना कयास तो लगाती ही है । सच सबके सामने है । हाँ थोडÞी देर के लिए मन विचलित अवश्य हुआ, पर सच्चाई से मुँह नहीं मोडÞा जा सकता । अगर उन्हे जनकपुर भ्रमण रद्द करना होता तो जनकपुरवासी को असमंजस की स्थिति में क्यो रखा जाता – भौतिक पर्ूवाधार तथा यातायात मन्त्री विमलेन्द्र निधि ने जब प्रेस विज्ञप्ति द्वारा मिडिया को जानकारी दी कि मोदी जी का जनकपुर का धार्मिक भ्रमण रद्द हो चुका है । उस पर काठमांडू स्थित भारतीय राजदूत रंजित राय प्रेस कान्प|mेन्स कर एक दिन पहले क्यो भ्रमण सम्बन्ध में अनभिज्ञता व्यक्त करते –
एक सही राजनीति के तहत समय पर भारत की ओर से फैसला लिया गया ।  मोदी भ्रमण इतना विवादित हो चुका था कि उसे रद् करना ही सही था । नेपाल मंे १८वां र्सार्क सम्मेलन होना था । सरकार किसी ना किसी बहाने इस भ्रमण को रोकना चाह रही थी । मधेशी जनता भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को जनकपुर भ्रमण माँग को लेकर सडÞक पर उतर चुकी थी । नारा जुलूस ही नहीं आमरण अनसन भी किया जा रहा था । सरकार को  चेतावनी दी जा रही थी कि अगर अब भी मधेश के साथ विभेद हुआ तो मधेशी जनता चुप नहीं रहेगी । सडÞक से सदन तक हंगामा होगा । और यह बात राष्ट्रीय-अन्तर्रर्ाा्रीय मीडिया ने नेपाल-भारत के कोने-कोने में फैला दिया । र्सार्क सम्मेलन में किसी प्रकार का द्वन्द्व या व्यवधान उत्पन्न ना हो इसलिए भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने जनकपुर भ्रमण के रद्द होने का कारण अपनी व्यस्तता को बताना ही उचित समझा ।
अब सवाल है प्रम मोदी के जनकपुर भ्रमण रद्द होने का कारण क्या है – मधेशी जनता इसकी वजह है या सरकार – । ऐसा भी हो सकता है भारत सरकार ने भारतप्रति मधेशी जनता की भावना सम्झने के लिए जनकपुर भ्रमण का हल्ला मात्र किया हो – यहाँ पर तीन सवाल है- जो आम जनता को असमंजस मंे रखे हुए  है ।
जहाँ तक मधेशी जनता का सवाल है तो वह मोदी के जनकपुर भ्रमण से अत्यधिक उत्साहित थी और पूरी तरह समर्पित भी । मोदी भ्रमण से जनकपुर को पर्यटकीय दृष्टिकोण से जो फायदा होता, वह निश्चय ही जनता के हक में होता । इसलिए उन्हें इसका कारण मानना गलत होगा ।
काँग्रेस-एमाले के संयुक्त सरकार ने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के जनकपुर भ्रमण स्थगित का जो कारण एमाओवादी और मधेशवादी का दिखाया है, वह आरोप मात्र है । चार महीना पहले मोदी जी का जनकपुर भ्रमण तय हो चुका था । फिर सरकार ने उसकी तैयारी क्यो नहीं की – सरकार और एमाओवादी-मधेशवादी दलबीच सुरक्षा विषय में तू..तू.., मैं..मैं क्यों हुआ । सरकार जानती है- मोदी जी को विकास और भाषण दोनो प्रिय हैं । उसके बावजूद भी विकास और भाषण दोनों पर रोक लगाना जनता की भावना ही नहीं मोदी जी की इच्छा के विपरीत थी । प्रम मोदी जी के जनकपुर भ्रमण की तैयारी नहीं करना, काँग्रेस के नेता रामशरण महत और गगन थापा द्वारा जनकपुर भ्रमण रोकने का प्रयास करना, नेपाल-भारत मैत्री समाज द्वारा दलित एवं  पिछडÞे वर्ग के छात्रों को साइकल वितरण पर गृहमन्त्री वामदेव गौतम द्वारा कूटनीति मर्यादा विपरीत होने का स्टेटमेन्ट देना आदि भ्रमण रोकने का षड्यन्त्र था ।
क्या पहाडÞ और मधेश के लिए अलग कानून या कूटनीतिक व्यवस्था है –  नेपाल सरकार को यह स्पष्ट करना  आवश्यक है । अगर भारत सरकार एक छोटा सा तोहफा मधेश के छात्रों को देना चाहती है तो वह कूटनीति के विरुद्ध कैसे हो जाता है – वह साइकिल थी, कोई तोप नहीं जिससे सरकार को डर लग गया । बात सीधी सी है कि सरकार मधेश के मन में भारत के प्रति कोई अच्छी भावना नहीं आने देना चाहती थी । क्योंकि यह सभी जानते हैं कि मधेश और भारत की संस्कृति में एकरूपता है, जो कहीं ना कहीं से मधेश को भारत से जोडÞती है । जिसके कारण मधेश को खुद उसके देश में ही पराया कर दिया जाता है और उसे विभेद का शिकार होना पडÞता है ।  । वहीं पर सेना के लिए हेलिकप्टर दिया जाता है, नेपाल-भारत के सहयोग में रेल सञ्चालन होती, एम्बुलेन्स दिया जाता है, सडÞकें निर्माण एवं मर्मत होती है तो उस समय यह कूटनीति कहाँ होती है – यह सवाल मधेशी जनता का है । हिन्दी कविता ‘सवल सहायक सवल के, कोई न निर्मल सहाय, पवन जगावत आग के, दीप ही देत बुझाए’ अर्थात् बडÞों के  सभी सहयोगी होते है छोटों  के कोई नहीं । एक ही हवा कभी तो दीया को बुझा देती है और कभी वही हवा किसी पुआल के ढÞेर में अगर चिनगारी भी पडÞ गई तो उसे आग का रूप दे देती है । सरकार की नीति यही रही तो हवा कब अपना रुख बदल ले यह कहा नहीं जा सकता । अपने ही लोगों ने मोदी भ्रमण के क्रम में जो रूप दिखाया है वह मधेश हमेशा याद रखेगा यह तो तय है ।
स्थगित भ्रमण से कहाँ घाटा कहाँ फायदा
भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का जनकपुर भ्रमण स्थगित होने से जनकपुर की जनता स्तब्ध  है । जितनी खुशी मोदी जी के भ्रमण मंे आने से पहले थी उनका भ्रमण रद्द होने पर चिन्तित एवं उदासीन होना स्वभाविक है । उनके जनकपुर भ्रमण से केवल जनकपुरवासी ही नही सीमावर्ती क्षेत्र की जनता भी बहुत ही उत्साहित थी । मधेश और शासक के बीच आन्तरिक द्वन्द के कारण स्थगित भ्रमण को लेकर जनकपुर को सबसे ज्यादा घाटा तो हुआ है, लेकिन भविष्य में मधेश को फायदा ही फायदा है ।
काँग्रेस-एमाले मोदी जी के जनकपुर भ्रमण से भयभीत हो गये कि अगर भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जनकपुर जाएँगे तो विश्व की नजर जनकपुर पर होगी और फिर हम शासक कही पीछे न पडÞ जाएँ । लेकिन यह सोच भी उन सभी पर उल्टा पडÞ गया । मोदी जी का जनकपुर भ्रमण स्थगन ने विश्व की जिज्ञासा को बढÞा दिया । जनकपुर मोदी जी क्यों जाना चाहते थे –  क्या है जनकपुर – कहाँ है जनकपुर – मोदी जी के जनकपुर भ्रमण स्थगित होने पर क्यों वहाँ की जनता आन्दोलित हर्ुइ – सरकार सच में वहाँ की जनता से विभेद कर रही है । जितनी उनके भ्रमण में विश्व को जिज्ञासा नहीं थी उससे ज्यादा भ्रमण स्थगित होने पर बढÞ गयी है । इसमें भी तो मधेशी के लिए फायदा ही है ।

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