मोदी सरकारः अच्छे दिनों का इन्तजार

प्रो. नवीन मिश्रा:‘हम मोदी जी को लाने वाले हैं, अच्छे दिन आने वाले हैं’ के नारों के साथ मोदी जी प्रचण्ड बहुमत से जीत कर प्रधानमन्त्री बन गए लेकिन अच्छे दिन आए क्या – सब्जियों के दाम तीन गुणा बढÞ गए । रेल भाडÞे में बढÞोत्तरी कर दी गई है । पेट्रोल, डीजल के दाम बढÞाने की बात हो रही है । मंहगाई है की रुकने का नाम नहीं ले रही है । सफाई में मोदी जी का कहना है कि अभी तो सरकार का हनीमून पीरीयड चल रहा है । यह बात जरूर है कि मोदी के पास कोई जादू की छडÞी नहीं है लेकिन सवाल है कि अच्छे दिनों के लिए और कितना इन्तजार करना होगा – modi
चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने अर्थव्यवस्था पर बहुत बल दिया था । उनका मानना था कि सरकार की पहली प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को सुधारना होगा । हमें विकास दर की समीक्षा कर इसे पटरी पर लाना होगा । मोदी को देश की अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए योजना बनानी होगी, जिससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके और विदेशी निवेशकों का भारत की अर्थव्यस्था पर विश्वास हो सके, इससे वे देश में अधिक से अधिक निवेश कर सकें । २०१२-१३ में देश का विकास दर ४.८ है, जो इस दशक का न्यूनतम आँकडÞा है । औद्योगिक उत्पादन में मात्र २.७ फीसदी की बढÞोत्तरी हर्ुइ है, जो सन्तोषजक नहीं है । विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान मात्र ५ फीसदी है । मोदी का मानना था कि मंहगाई रोकने के लिए बडÞे कदम उठाने होंगे । विशेष रूप में सप्लाई के क्षेत्र में ध्यान देना होगा । कृषि क्षेत्र की समीक्षा करनी होगी । सिंचाई योजना और नदी  परियोजना पर ध्यान देना होगा । मोदी के लिए सबसे बडÞी चुनौती है कि लगातार बढÞती महंगाई को काबू में लाए, जिससे देश की जनता सबसे ज्यादा परेशान और हताश है । निवर्तमान सरकार की सबसे बडÞी असफलता यही थी कि वह लडÞखडÞाती अर्थव्यवस्था को सम्भालने और महंगाई पर काबू पाने में नाकाम रही । खाद्य महंगाई दर २०१४ में ९.९ प्रतिशत, थोक महंगाई दर ५.७ फीसदी और महंगाई दर ४.६८ फीसदी थी । मोदी जी ने ‘जाँब वार’ का नारा दिया था । उनका कहना था कि रोजगार का सृजन करना हमारे सामने बडÞी चुनौती होगी । हम वैश्विक स्तर पर एक युद्ध लडÞने वाले हैं, जिस का नाम ‘जाँब वार’ होगा । अभी देश की सबसे बडÞी समस्या है- बढÞती जनसंख्या और घटता रोजगार । युवाओं को बहुत उम्मीद है कि नए पीएम रोजगार सृजन के क्षेत्र में बडÞे प्रयास करेंगे । सरकारी क्षेत्र में खाली पद भरे जाएँगे और निजी क्षेत्र में नए मौके मिले ऐसी योजना बनानी होगी । देश की ६६ फीसदी आवादी ऐसी है, जिसकी उम्र ३५ से कम है, जिनके लिए रोजगार सबसे बडÞी समस्या है । रोजगार वृद्धि दर २००२ से २०१२ तक सिर्फ२.२ प्रतिशत रही है । २०२२ तक देश के सामने ५० करोडÞ लोगों को रोजगार देने की चुनौती है । नक्सलवाद माओवाद देश की बडÞी समस्या है । ऐसी चुनौतियों के लिए एक स्पष्ट कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए । इससे निपटने के लिए केन्द्र को दोतरफा रणनीति बनानी होगी । ऐसे प्रयास करने होंगे की लोग बन्दूक न उठाएँ । मोदी के लिए चुनौती यहीं खत्म नहीं होती । मोदी को देश में बढÞ रहे नक्सलवाद को भी काबू में लाना होगा, जो धीरे-धीरे देश को हर राज्य में अपनी जडÞें जमा रहा है । देश की आन्तरिक सुरक्षा के लिए यह सबसे बडÞा खतरा बन चुका है । देश में करीब १८० उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं तथा १० बडेÞ राज्य नक्सलवाद से प्रभावित हैं । खेतीबाडÞी को किसानों के लिए फायदेमन्द बनाना होगा । कृषि उत्पादों के लिए एमएसपी तय करने की नीति में बदलाव लाने की जरूरत है । कोशिश होनी चाहिए कि कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढÞे और किसानों की आय में इजाफा हो, ऐसा मोदी का मानना था । देश की ७० फीसदी आवादी कृषि पर निर्भर है । लेकिन महंगी होती खेतीबाडÞी और उपज का बेहतर मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं । खेतीबाडÞी से देश का १४  जीडीपी आता है । ६४ फीसदी खेती देश में मानसून पर निर्भर है । २०११ का आंकडा बताता है कि देश में ८.६ करोडÞ भूमिहीन मजदूर हैं ।
देश में आर्थिक विकास कम होने के बहुत कारण हैं लेकिन इसका मुख्य कारण शासन से जुडÞा है । इसलिए सबसे जरूरी है कि तन्त्र में भरोसा और विश्वास पैदा किया जाए । साथ ही माइक्रो बैलेंस को सही करना होगा । विशेष रूप में राजकोषीय घाटे पर ध्यान देना जरूरी है । इसी उद्देश्य की पर्ूर्ति सबसिडी और खर्चों को घटा कर किया जा सकता है । इसके लिए आमदनी के नए साधन निजीकरण, सबसिडी पर नियन्त्रण और सकल घरेलू उत्पाद में कर सुधार जरूरी है । नई सरकार को विकास, मंहगाई और गरीबी की समस्याओं से निपटने के लिए उपेक्षित मुद्दों को सुलझाना होगा । वितरण प्रणाली में सुधार लाना और आपर्ूर्ति पक्ष की कमियों को दूर करना जरूरी है । अभी तक की बनावट कृषि क्षेत्र के प्रतिकूल है । कृषि उत्पादकता बढÞाने के लिए बडÞे पैमाने पर बाहरी और आधुनिक प्रौद्योगिकी की आवश्यकता है । रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विनिर्माण क्षेत्र का वास्तविक पुनरुद्धार जरूरी है ।
इसी तरह मानव विकास सूचकांक में बेहतरी के लिए सेहत, शिक्षा और सम्बन्धित मानकों से जुडÞे मानव विकास के मोर्चे पर भारत की स्थिति अच्छी नहीं रही है । ऐसे में सेहत और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है । विभिन्न स्तरों पर बढÞती विषमता आर्थिक तरक्की व सामाजिक एकता को कायम रखने की दिशा में सबसे बडÞी चुनौती है । अभी के केन्द्र राज्य सम्बन्ध भी दोषपर्ूण्ा हैं । इस में सुधार के लिए एक नये संघीय सम्झौते की आवश्यकता है ।
भारतीयों की मानसिकता बदल गई है । लोग गरिमा चाहते हैं, अपने लिए अवसर चाहते हैं और एक स्थान भी । एक सामान्य व्यक्ति अपनी शर्तो पर अपना जीवन चाहता है । वह अपनी महत्वाकांक्षा के लिए आगे बढÞना चाहता है । यह अपेक्षाएं अब और अधिक बढÞ गई हैं और खास कर युवा वर्ग कुछ नए की अपेक्षा कर रहा है । यह बात जरूर है कि कोई भी नेता कितना भी सक्षम, प्रतिबद्ध और दक्ष क्यों न हो, उसके लिए अकेले इन अपेक्षाओं को पूरा करना लगभग असम्भव है । उसे एक टीम की जरूरत होती है, जिसे भारत के संविधान के प्रावधानों के अनुसार मन्त्रिपरिषद कहा जाता है । मोदी की सफलता के लिए एक ऐसे मन्त्रिपरिषद की आज आवश्यकता है, जिस में राजनीतिक सन्त शामिल हो । एक ऐसा व्यक्ति जो मन्त्री के अपने पद से कुछ पाने की आशा न करे, बल्कि भारत के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए काम करे । भारत की आबादी का एक बडÞा हिस्सा जिस तरह आर्थिक अभावों से जूझ रहा है, उसके मन्त्रिमण्डल के हर सदस्य को राजनीतिक सन्त के रूप में कार्य करना होगा ।
भारत १९४७ से घोर गरीबी वाला देश था । हालांकि एक के बाद एक सरकारों द्वारा गरीबी, अभाव और गंदगी को मिटाने के लिए कम-ज्यादा प्रयास किए जाते रहे, लेकिन आज भी हालात वैसी ही निराशाजनक है । सुधार का आकांक्षी भारत वर्तमान सरकार से इन समस्याओं को शीघ्र दूर करने की अपेक्षा कर रहा है और इन अपेक्षाओं के आसमान छूने का कारण है, मोदी जी के द्वारा सपने दिखाना । मोदी के स्पष्ट विचारों और समस्याओं के समाधान के संकल्प ने ही उन्हें, भाजपा और राजग को भारी जनादेश दिलाया । अब मोदी जी को इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए ही हर सम्भव प्रयास करना होगा । गुजरात के मुख्यमन्त्री के तौर पर मोदी जी का दृढÞ संकल्प, कल्पनाशक्ति और कौशल का परिचय लोगों को मिल चुका है । लेकिन अभी तक मोदी जी ने जिन क्षमताओं का पर््रदर्शन किया है, अब उनसे हजार गुणा अधिक सामर्थ्य दिखानी होगी, क्योंकि भारत गुजरात से कहीं विशाल और र्सवथा भिन्न है । भारत की समस्याएँ भी बहुत विकराल हैं । हालांकि एक कर्मयोगी और दृढÞ संकल्पित व्यक्ति की क्षमताओं की कोई सीमा नहीं होती । इन सब महती जिम्मेदारियों को निभाने के लिए जरूरत है, तो बस पूरी तरह र्समर्पण की । देश के नेता के रूप में मोदी जी को सुनिश्चित करना होगा कि उनके साथ-साथ पूरी सरकारी मशीनरी इसी कुशलता और संकल्प के साथ काम करे ।
शुरुआत अच्छी है । मानसून के कमजोर पडÞने की सूचना के साथ ही प्रधानमन्त्री हरकत में आ गए । उन्होंने कृषि, खाद्य एवं आपर्ूर्ति और वित्त विभाग के मन्त्रियों से कहा कि वे उन्हें आपात योजना बना कर पेश करें । प्रस्ताव उनके पास आया और अगले ही घण्टे से उस पर अमल शुरु हो गया । इतना ही नहीं उन्होंने अपने सहयोगियों से अब तक की प्रगति और आगे की रणनीति पर भी बैठक बुलाई । ऐसी तत्परता पहले कभी नहीं देखी गई थी । बस आवश्यकता है, इन बातों की निरन्तरता की । कठिन घडिÞयों में ही व्यक्ति की परीक्षा होती है । सरकारी दफ्तरों का भी हाल बदल गया है । प्रधानमन्त्री खुद सुबह आठ बजे दफ्तर पहुँच जाते हैं । सचिवालयों और मन्त्रालयों में अब नौ बजे से ही रौनक आ जाती है । शनिबार के दिन जहाँ सन्नाटा पसरा रहता था, वहाँ लोग उस दिन अपने बचे-खुचे काम निपटाते नजर आते हैं ।

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