मोबाईल की खुबियाँ और खामियां : पूजा गुप्ता

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पूजा   गुप्ता, दुहबी ,१० दिसिम्बर | एक समय वो भी हुआ करता था जब मन की हर बात काग़ज़ पर शब्दों के रूप में लिखे जाते थे ।जीवन में बित रही हरआपबीती ,अच्छी..बूरी बाते ,अपने अपने जीवन में सुख दुःख की बाते चिठ्ठी में अपने से कोसों दूर बैठे शुभचिंतकों के पास ऐसे भावविभोर होकर इतना अफसुरदाओ से सराबोर होकर लिखा जाता था कि जिसे पढ़ कर ऐसा प्रतित होता था मानो शब्द खुद ब खुद उठ खड़े होकर आपबीती बया कर रहे हो ।हांय कहाँ गए वो दिन जब ख़त ,लेटर ,चिठ्ठी लिखने के लिए फूरसत के लम्हे निकाले जाते थे ।वो भी एक वक्त हुआ करता था जब कोई बेटी अपनी माँ से कोसों दूर ससुराल में रहा करती थी पर ख़त ही एक माध्यम हुआ करता था जिसके द्वारा माँ बेटी के हिर्दय के तार हमेशा एक दुसरे के साथ जुड़े रहते थे ।एक वो भी ज़मना हुआ करता था जब अपनो से सुख दुःख की बाते बाँटने से पहले ख़त से बाँटा करते थे ।

puja gupta

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एक बड़ा रहस्यमय तथ्य यह भी है कि जाने कैसे एक प्रेमी एक ख़त यानि “love letter “के द्वारा अपनी प्रेमिका के हिर्दय में अपना आशियाना बना लिया करता था ।जाने वो कौन से धड़कते अल्फाज कागज़ पर उतारा करते थे जिसे पढ़ कर ऐसा अनोखा एहसास होता था की किसी नें शब्द अपना सीना चीर कर रख दिया हो । किसी ने क्या खूब कहा है कि होता नही हर फैसला सिक्के उछाल के , ये दिल का मामला है ज़रा देख भाल के , और मोबाइल के दौर के आशिक क्या पता , रखते थे ख़त पर कैसे कलेजा निकाल के ! आखिर कहा गए वो दिन जब हमारे जीवन में तार ,रजिस्ट्ररी ,अंतर्देशी जैसे शब्द भी हमारे जीवन का अहम हिस्सा हुआ करते थे । इस आधुनिकता भरे मॉडर्न युग ने बहुत सारी भौतिक वस्तुओं कॊ जन्म दिया ।जिसमें मोबाईल सबसे पहले सबसे उपयोगी चीजो में आता है ।मोबाईल का जन्म यानि इसका आविष्कार वर्ष 1963 में मोटोरोला के अनुसंधानकर्ता माट्रिन कूपर नें किया था यानि की माट्रिन कूपर मोबाईल के पितामह है । मोबाईल को दुनिया का सबसे तेज़ संचार व्यवस्था का माध्यम माना जाता है । अगर इसे हम अपने जीवन का लाइफलाईन कहे तो ग़लत नही होगा ।आज हर किसी के पास मोबाईल है चाहे वो ऐ.सी में बैठा करोड़पति कारोबारी हो चाहॆ चिलचिलाती धूप में अपने ठेले पर बेच रहा मामुली सा आइसक्रीमवाला हो ।चाहॆ वो मन्दिर का पुजारी हो चाहॆ वो सड़क साफ़ करने वाला ही क्यों न हो ।आज दादा दादी से लेकर उनकी दुधमुहे पोता पोती के हाथों में मोबाईल इस कदर रहता है जैसे चॉकलेट या बिस्कुट का डब्बा हो । आज़ की विगत परिस्तिथिती ऐसी है की हम बिना खाना बिना पानी के रह सकते है पर बिना मोबाईल के एक पल भी नही ।हम इस आधुनिक मशीन के इस कद्र आदि हो गए है की अगर एक पल के लिए भी हमसे खो जाए या गुम हो जाए तो उसके बैगर हम बैचन और परेशान जाते है । बात बहुत हद तक सही भी तो है आज़ मोबाईल के कारण हमारा जीवन बड़ा सरल और सुगम हो गया है ।अगर गौरतलब देखा जाए तो आज हर बिजनेस हर व्यासाय दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की के राहों पर और देश विदेश में दौड़ रहा है तो और इसमें इंटरनेट का बहुत बड़ा योगदान है ।बिजली का बिल जमा करना हो ,आनलाईन शौपिंग करनी हो ,घर में ही पीजा पार्टी करना हो ,यात्रा का टिकेट बुक करना हो ,कही पैसा भेजना हो वैगरह… वैगरह और इंटरनेट के साथ के कारण ये जिन्न हो गया है ।जो मांगो पलक झपकते हाज़िर ।मोबाईल के बदौलत ही हम सिर्फ़ अपने से कोसों दूर बैठे परिजनों का हाल सिर्फ़ जान ही नही लेते बल्कि उनकी आवाज़ सुनकर हमारा घबराया मन धीर धरने लगता है ।जैसे हमसे दूर नही बिल्कुल आस ही पास हो ।पहले ज़माने की तरह अपनो का हाल ख़बर जानने के लिए 10::15 दिनों तक इंतज़ार नही करना पड़ता बस बटन दबावों जिससे जब मन करे तब बात कर लो ।आज़ अगर हमारी बहु..बेटियाँ घर से बाहर किसी काम से या पढ़ने जाती है तो एक मोबाईल ही है जिसको देख कर हमारा घबराया मन धीर धरता है ।अभी तक हम बात कर रहे थे मोबाईल के गुणों के बारे में पर हर चीज़ अपने साथ अच्छाई और बुराई दोनो साथ लेकर आती है वैसे ही मोबाईल के भी कुछ “side effect ” है ।मोबाईल फोन और टावर से निकलने वाले रेडियन इतने हानिकारक होते है कि आपकी जेब में रखा मोबाईल कैंसर देने वाली मशीन की तरह काम करता है ।हर वक्त सीने से चिपका कर रखने वाली महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर का मुख्य कारक है । सिरहाने के नीचे रखना बार बार उठकर मेसेज चेक करना ये सब मोबाईल के कारण हुई मानसिक रोगों के लक्षण है ।पुरुषों में नपुंसकता ,शुक्राणुओं की कमी जैसे रोग पनप रहे है ।मोबाईल कॊ शर्ट के जैब में रखना दिल के लिए घातक साबित हो सकता है ।इसे ज्यादा उपयोग करने से त्वचा और आँखो के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है ।मिलाजुला कर यही निष्कर्ष निकलता है कोई भी वस्तु अच्छी है या बुरी यॆ हमारे उपयोग करने के तरीके पर निर्भर करता है ।वैसे ही मोबाईल के  अनगिनत गुण और अवगुण है । मोबाईल हमारे जीवन का बहुत उपयोगी वस्तु है पर उसे वस्तु ही रहने दें उसे जीवन का हिस्सा न बनाए ।
                              

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