मौसम ने ली अंगड़ाई, जाड़े ने पसारे पांव : विनोदकुमार विश्वकर्मा ‘विमल’

विनोदकुमार विश्वकर्मा ‘विमल’, काठमांड़ू, अगहन २5 ।
आने लगे विदेशों से ऊनी कपड़े बाजार में भी आई रौनक, नए फैसन के स्वेटर व जैकेट की बढ़५ मांग, कंबल व रजाई की दुकानों में बढ़ा है ग्राहकों का मजमा, शराब व मांस की दुकानों में लगी है लंवी कतार, बढ़ी है अंड़े की मांग आदि, इत्यादि, इत्यादिक । हाल–फिलहाल काठमांड़ू के हर दुकानों में देखने को मिलती है रौनक । खासकर शाम को बढ़ जाती है बाजार की रौनक ।

clothes
मौसम के बदले मिजाज के कारण बहुत कुछ बदला–बदला सा नजर आ रहा है । एक तरफ जहां ऊनी कपड़ों का प्रयोग बढ़ गया है । वहीं बाजार में चहल–पहल बढ़ गई है । कंबल–रजाई का भी अब उपयोग होने लगा है । आवश्यकता अनुसार इसकी खरीदारी भी हो रही है । लगन का वक्त होने के कारण भी ऊनी बाजार की रौनक बढ़ गई है । हालांकि दिन अभी अपेक्षाकृत गर्म है । मौसम में परिवर्तन हो रहा है । दोपहर के समय में समीर चलता है । नतीजतन इसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है । सर्दी, जुकाम व बुखार की समस्या आम हो गई है । विर अस्पताल, टेकू अस्पताल तथा प्राइवेट क्लिनिकों में उपचार करवाने हेतु मरीजों की लंबी कतार देखने को मिलती है ।
मौसम के करवट लेते ही वातावरण सर्द हो चला है । स्वाभाविक रूप से ऊनी कपड़ों का इस्तेमाल भी बढ़ गया है । ऊनी परिधानों पर भी आधुनिकता का पुट हो, इसकी चाह तो सबको होती है । खासकर युुवा वर्ग स्वेटर व जैकेट की तलाश में लगे हैं । इस बार नया क्या चल रहा है, इसकी उधेड़बुन हो रही है । कॉलेज पढ़नेवाली लड़कियां इस कतार में सबसे आगे हैं । वैसे जाड़े का मौसम रंग–विरंगे परिधानों के लिए अनुकूल होता है । अचानक कंवल व रजाई की मांग भी बढ़ रही है । इसका लगन भी एक कारण है । नर्म–मुलायम आकर्षक कंबलों की मांग में तेजी देखी जा रही है । बाजार में ‘टींबा रजाई’, ‘अरबी व कतारी कंबल’, ‘फाइवर रजाई’ भी लोग ढ़ूंढ़ रहे हैं ।

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