यानि, ओली करें तो रासलीला और देउवा करें तो कैरेक्टर ढीला : सुरभि

सुरभि, विराटनगर | हे देवाधिदेव महादेव इन नेताओं को आपने इतना अधिक धैर्य कहाँ से प्रदान किया है ? कितनी भी जिल्लत झेल लें पर थेथरइ से बाज नहीं आते हैं । इतना ही नहीं बातों के तीर छोडना भी कोई इनसे सीखे । इनके दिलों तक तो पहुँचना मुश्किल है और वैसे भी दिल तो इनके काले ही रहते हैं अच्छा है कि हम उन तक नहीं पहुँचे । बस इनकी जुवान अपना रंग बदलती रहती है । अब देखिए महामहिम ओली जी ने भारत यात्रा की तो वो यात्रा राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत था (उनकी जुवान में) क्योंकि अभी राष्ट्र भक्ति का पूरा जिम्मा इन्हें ही मिला हुआ है, वैसे ये अलग बात है कि उस समय इनका हवाई जहाज चीन न जाकर भारत की ओर मुड गया, प्रचण्ड जी की भारत यात्रा सुखद और सफल रही ये दावे किए गए, अब किस मायने में सफल रही ये तो वही जानें और अब जब हमारे प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा पूर्व प्रधानमंत्रियों की तरह भारत भ्रमण कर के वापस लौट चुके हैं तो बेचारे स्पष्टीकरण दे देकर परेशान हैं क्योंकि उन्होंने तो संविधान शब्द का उच्चारण कर दिया है वहाँ । यानि ये तो वही बात है आप करें तो रासलीला और हम करें तो कैरेक्टर ढीला । बोली बदलते इन्हें देर ही नहीं लगती ।

वो तो यही समझते हैं कि जनता तो महामूर्ख वो भला कैसे समझेगी इनकी बदलती चाल को ? अब एक नमूना और देखिए कल तक मधेशी को आदमी नहीं समझने वाले राष्ट्रभक्त मधेश के दरवाजे पर जिल्लत सह कर भी जाने से बाज नहीं आ रहे हैं । अभी तो बस वादा ही वादा है इनके पास ठीक उन प्रेमियों की तरह जो प्रेमिकाओं से चाँद सितारे तोड लाने तक का वादा करते रहते हैं, ये वादा तो जितने चाहे ले लो, फिर तो रात गई बात गई । कौन से वादे, कौन से दावे, बस ये गाना गाएँगे, याद नहीं भूल गया और उसके बाद मधेशी चेहरा और माँग एकबार फिर से आयातीत नजर आने लगेगा ।

नेपाल के वरिष्ठ नेता नेपाल फिलहाल मधेश के चक्कर लगा रहे हैं और उनका भरपूर स्वागत भी किया जा रहा है जिसके दम पर वो दो नम्बर प्रदेश में भी एक नम्बर बनने का सपना देख रहे हैं । बाबा पशुपति नाथ इनका ही नहीं बाकी दो महारथी पार्टी का भी ऐसा कल्याण करें कि सभी नम्बर वन बन जाएँ । वैसे पाठकगण ये तो मैंने मुर्खों वाली बात कर दी क्योंकि नम्बर वन तो कोई एक ही बनेगा पर ये भी तो हो सकता है कि तीन के बीच से कोई चौथा बाजी मार ले जाय । देखें बाबा पशुपति की कृपा बरसती है या माँ जानकी की शक्ति प्रदर्शित होती है ? पर हमारा देश बडे काम का है यानि यहाँ जो काम नहीं करता वही चैन से है उस पर न तो कोई आरोप है और ना ही कोई अख्तियार । बस निकम्मा बने रहो तो सब ठीक पर अगर भूले से भी कोई सुधार उधार का काम कर लिया तो फिर आपकी शामत है ।

अब देखिए ना बेचारे कुलमान जी को । अँधेरों की दुनिया से बाहर निकालने वाले कुलमान जी को लगातार अँधेरों में खींचने की तैयारी शुरु से ही जारी है । न जाने कब बेचारे की छुट्टी हो जाय । इससे तो अच्छा होता वो भी बारह तेरह घंटे के अँधेरों को स्वीकार करते और आराम करते । कम से कम जेनरेटर और इनभरटर बेचने वालों का और कमीशन लेने वालों का बिजनेस तो बन्द नहीं होता । इससे अगर कोई देश हित में काम करना चाह रहा है तो वह सतर्क हो जायँ वरना अंजाम क्या होगा वो पता ही है । ( व्यंग्य )

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