युरोपियन युनियन द्वारा जारी प्रतिवेदन प्रति सरकार असन्तुष्ट

काठमांडू, २२ मार्च । युरोपियन युनियन निर्वाचन पर्यवेक्षण मिसन द्वारा सार्वजनिक प्रतिवेदन के प्रति नेपाल सरकार ने असन्तुष्टी व्यक्त किया है । परराष्ट्र मन्त्रालय ने उक्त मिसन द्वारा मंगलबार जारी प्रतिवेदन प्रति गम्भीर आपत्ति प्रकट करते हुए बुधबार कहा है कि प्रतिवेदन ने शान्तिपूर्ण, स्वच्छ और धांधली रहितसम्पन्न निर्वाचन को नजरअन्दाज किया है, जो अन्तर्राष्ट्रीय निर्वाचन पर्यवेक्षण कार्यक्षेत्र और मान्यता के विपरित है ।

स्मरणीय है, युरोपियन युनियन ने मंगलबार एक प्रतिवेदन सार्वजनिक करते हुए प्रतिनिधिसभा और प्रदेशसभा चुनाव में की गई समानुपातिक समावेशी निर्वाचन प्रणाली प्रति प्रश्न किया है । प्रतिवेदन में कहा है कि उक्त प्रणाली में पुनविर्चार करना चाहिए और खस–आर्य समूह को आरक्षण से हटाना चाहिए । युरोपियन युनियन मिसन का नेतृत्व युरोपियन संसद के सदस्य एलजना जोभोको ने की है । जोभोको ने अपनी प्रतिवेदन में कहा है कि अस्थायी बासिन्दा को मताधिकार मिलनी चाहिए और उसको सुनिश्चिता होनी चाहिए । उन्होंने निर्वाचन आयोग की प्रभावकारिता के सम्बन्ध में भी प्रश्न की है, जिसके प्रति परराष्ट्र मन्त्रालय असन्तुष्ट है ।
परराष्ट्र मन्त्रालय के प्रवक्ता द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार निर्वाचन आयोग अन्तर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षण आचार संहिता तथा नेपाल सरकार और युनियन के बीच की गई सम्झौता के विपरित उक्त प्रतिवेदन सार्वजनिक की गई है । सरकार ने आग्रह किया है कि नेपाल की संविधान को प्रत्यक्ष चुनौती देनेवाली उक्त प्रतिवेदन में उल्लेखित सुझाव वापस होना चाहिए । विज्ञप्ति में यह भी कहा है कि सार्वभौम देश के जनता ने अपनी सामाजिक संरचना और समावेशीता के मर्म अनुसार तय की गई राजनीतिक मुद्दा में युरोपियन युनियन द्वारा सुझाव पेश होना दुःखद है ।

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